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Thursday, 13 November 2025

एक ये ऑटो वाले और एक वो ऑटो वालाOne is this auto driver and the other is that auto driver Neelam Bhagi

 


सफेद टाइगर सफारी देखकर  कृष्णा राज कपूर ऑडिटोरियम रीवा, जहां अखिल भारतीय साहित्य परिषद का 17वां अखिल भारतीय अधिवेशन 2025 हो रहा था, पहुंची. ऑटो वाले दीपक कुशवाहा को भाड़ा चुकाया. अभी मुश्किल से मैं दो कदम भी नहीं चली थी, उसने आवाज लगाई. मैंने मुड़कर देखा, उसके हाथ में मेरा सिप्पर कॉफ़ी मग और स्टील की पानी की बोतल थी. दोनों चीजें लेकर धन्यवाद दिया. मेरी कोशिश होती है कि मैं डिस्पोजेबल कम ही इस्तेमाल करूं. इसलिए मग  बोतल मेरे पास रहती है. समय कम था सत्र में भी समय से पहुंचना था इसलिए मैंने मग में चाय ली और पानी लिया आने जाने का ऑटो करके मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी के लिए चली गई. दीपक को ही मग,  बोतल पकड़ा कर अंदर चली गई. लौटने पर मुझे याद ही नहीं था पर उसने मुझे याद करके दिया! इसी तरह पहले दिन नितिन यादव ऑटो वाले ने भी, हम तीनों को रीवा में घुमाया कोई फालतू पैसा नहीं लिया. हमने उनका फोन नंबर भी लिया था ताकि आगे जाना हो तो उन्हें बुलायें. सफारी जाने से पहले भी उनको फोन किया उन्होंने फोन नहीं उठाया, याद आया कि उन्होंने कुछ साहित्यकारों को चित्रकूट ले जाना था. दीपक कुशवाहा भी ऐसे ही मिले. किसी से कोई पहचान नहीं. मेरा नोएडा में एक्सीडेंट हुआ तब भी कोई भला ऑटो वाला मुझे अस्पताल में छोड़ आया. दीपक भी तो कोई सवारी लेकर, मेरी बोतल और मग के साथ लौट  सकता था पर उसने हमारा इंतजार किया. यात्राएं करती हूं अच्छे लोग ही मुझे मिले हैं.

  और मुझे वह ऑटो वाला याद आता है. मैं छोटी सी गीता को उसकी पहली रेल यात्रा करवाती हुई नोएडा आई. निजामुद्दीन स्टेशन पर ऑटो वाले हमेशा की तरह घेरा डाल लेते हैं और ऊंट पटांग पैसे मांगते हैं. मैं थोड़ा रुक जाती हूं तो फिर कोई ठीक सा दाम वाला ऑटो मिल जाता था और चल देती हूँ. इस बार मेरे साथ गीता थी. अपना सामान मेरे पास न के बराबर होता है क्योंकि मुंबई में भी मेरे कपड़े रखे रहते थे. नोएडा तो मेरा घर ही है. छोटा सा मेरा पसंदीदा ट्रॉली बैग जिसमें गीता के कपड़े और पॉटी सीट थी. एक ऑटो वाले से बात बनी, वह  हमें लेकर  स्टेशन के पीछे की तरफ  एक ऑटो खड़ा था  उसने बैग लेकर सीट के पीछे रख दिया बोला,"बच्चे के साथ आराम से बैठो." घर पर गीता के इंतजार में सब गेट पर ही खड़े थे. गीता को सब अंदर ले गए. ऑटो वाले ने ऑटो स्टार्ट ही रखा. मैंने पैसे दिए उतरी, ऑटो ये जा वो जा. एकदम मुझे याद आया कि समान तो उसमें ही रह गया. फटाफट गाड़ी लेकर पीछा किया. मेन गेट के सामने तीन रास्ते जाते हैं, पता नहीं वह किधर निकल गया. 8 नवंबर रात 8:00 बजे गाड़ी में ही नोटबंदी की खबर सुनी थी. बच्चे के साथ पैसे खर्च हो गए थे. मैं दूसरा ऑटो लेकर फिर स्टेशन पर गई, जहां वह ऑटो हमें खड़ा मिला था. सामने दुकानदार से पूछा तो उसने कहा कि यहां दो तीन ही लोगों का ऑटो खड़ा रहता है. वह सवारी लाते हैं और यहां से बिठाकर ले जाते हैं. क्या पता उसे आगे सवारी मिल गई हो? और वह निकल गया हो. आप किस में बैठकर गई हैं हमें नहीं पता जो भी आएगा उस सामान का पूछेंगे, तो हम सामान लेकर रख लेंगे. मैं कब तक बैठी रहती. गीता को घर छोड़ कर आई थी और वह पहली बार उत्कर्षनी राजीव जी के बिना आई थी. मेरे साथ हिली हुई थी. घर लौटी. अब जो पैसे थे, वह चल नहीं रहे थे. मुंबई के मुकाबले यहां ठंडा मौसम, गीता के पास कपड़े भी नहीं. सबसे मुसीबत पॉटी सीट, पॉटी सीट के बिना गीता पॉटी न करें.अंकुर श्वेता के ट्रैवल बैग में पुम्मू के लिए रखी थी, वह दे गए. और उसी के ही कपड़े आए. अगले दिन गीता को लेकर फिर स्टेशन गई. उनकी यूनियन का लीडर भी आ गया. दुकानदार ने जो नाम बताया था लीडर उस नाम के उन सब को बुलाकर लाया पर वही ऑटो वाला नहीं था. मैं कोई बाहर की सवारी नहीं थी. उसे मेरा घर पता था, ईमानदारी होती तो देकर जाता न.

https://www.instagram.com/reel/DRAQUCSEif1/?igsh=MWd5bGNrY3Y5NHZyNA==

https://neelambhagi.blogspot.com/2024/08/blog-post_24.html

Saturday, 8 November 2025

बीहर रिवरफ्रंट रीवा Bihar River front Reeva Neelam Bhagi नीलम भागी



प्रत्येक नदी वहां के स्थानीय लोगों के लिए पूजनीय होती है. कोई भी शुभ काम करने से पहले परिवार में नदी पूजन की भी परंपरा होती है. विवाह पंचमी श्रीराम जानकी विवाह से पहले, विवाह की एक रस्म है, कमला नदी पूजन की, उसे मटकोर कहते हैं। लोक कथा है कि सीता जी के विवाह में मटकोर(कमला पूजन) में कमला माई की मिट्टी लाई गई थी जो सीता जी के हल्दी में मिलाई थी. सीता जी के नेत्र से कमला जी उदय हुई थीं। सीता जी की प्रिय सखी कमला हैं, उसके किनारे बचपन में खेली है । मटकोर पूजन का प्रश्न उत्तर में एक लोकगीत है, जिसे मिथलानियाँ इस अवसर पर गाती हैं। 

कहाँ माँ पियर माटी, कहाँ मटकोर रे।

कहाँ माँ के पाँच माटी, खोने जाएं।

पटना के कोदार है, मिथिला की माटी।

मिथिला के ही पाँचों सखी, खोने मटकोर हैं। 

पाँच सुहागिने कुदार, तेल, सिंदूर, हल्दी, दहीं लेकर 5 आदमी नदी के किनारे की मिट्टी खोदते हैं, उसमें से मिट्टी निकाल कर, ये सब सुहागचिन्ह और पाँच मुट्ठी चने डाल देते हैं। वर वधु नदी में स्नान करते हैं। लौटते समय चने, पान, सुपारी बांटते हैं। उस मिट्टी को वर वधु के उबटन में मिला कर, हल्दी की रस्म होती है। विवाह पंचमी के बाद से मिथिला में साहे शुरु होते है। तब से मिथिला में विवाह संस्कार की शुरुवात ही नदी पूजन से होती है। 17 वें अखिल भारतीय साहित्य परिषद अधिवेशन रीवा मध्य प्रदेश में मैं आई हूं. रीवा से परिचय करती हुई, बीहर रिवर फ्रंट पहुंच गई. वहां से एक परिवार बाजे गाजे के साथ मिट्टी के घड़े में नदी का जल लेकर से लौटा था. नदियां हमारी संस्कृति की पोशाक हैं. तभी तो नदी नहीं तो हम नहीं.

https://www.instagram.com/reel/DQ0U8aJjBn-/?igsh=Z3FnbGl2bm9vc3J1




Friday, 7 November 2025

शोभा यात्रा अखिल भारतीय साहित्य परिषद नीलम भागी

  



अखिल भारतीय साहित्य परिषद के 17 वें त्रिदिवसीय अधिवेशन रीवा  में शोभा यात्रा निकल गई। शोभायात्रा में रीवा, मध्य प्रदेश के परंपरागत वाद्यों के साथ भारत भर के कोने-कोने से आए हुए कार्यकर्ता झूमते हुए दिखाई दे रहे हैं। शोभा यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता इसमें साहित्यकार अपने राज्य की पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए. दक्षिण भारतीय सिल्क की साड़ियां और उड़ीसा की संबलपुरी साड़ियां बहुत ही खूबसूरत लग रही थी. कुछ महिलाओं की एक सी साड़ियां देखकर, मैंने पूछा, " आप किसी संस्था से हो? वहां की यूनिफॉर्म है. उन्होंने हंसते हुए जवाब दिया, 'यह हमारी कर्नाटक की स्पेशल साड़ियां हैं. " मैंने कहा, " तो थोड़ा अलग-अलग पहन लेती, हमें और देखने को मिलती. " वे बोलीं, "  फ्रेंड हैं न, हमने वैसे ही एक सी पहनी ताकि दिखें भी."

https://www.instagram.com/reel/DQwdv_wDCEf/?igsh=MTE4bGZqN3Q5cG01aA==





Thursday, 6 November 2025

रीवा में तीन नदियों का बेहद खूबसूरत संगम नीलम भागी The beautiful confluence of three rivers in Reeva Neelam Bhagi

 


रीवा में तीन नदियों का बेहद खूबसूरत संगम बिछिया नदी, सोन नदी और बीहर नदी के संगम से बनता है। किले में स्थित म्यूजियम को देखने के  आप मंदिर के दर्शन करेंगे  तो वही है आपको मनमोहक स्थान दिखाई देगा.  यह संगम रीवा के राजघाट में स्थित है, जो एक प्रमुख तीर्थ स्थल और पर्यटन स्थल है। राजघाट का निर्माण 16वीं शताब्दी में हुआ था और यह अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए जाना जाता है । यहाँ पर लोग स्नान करते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं।

रीवा की प्रमुख नदियों में टोंस या तमसा और सोन नदी भी शामिल हैं, जो गंगा की सहायक नदियाँ हैं। बिछिया नदी रीवा शहर के बीचों-बीच बहती है और इसका नामकरण रीवा के इतिहास से जुड़ा हुआ है.

https://www.instagram.com/reel/DQuaBBCDAPC/?igsh=eHlvNmJrZmp2ajd5