मैंने उत्कर्षनी से कहा कि यहां पर पेड़ विशाल और सीधे तने और बड़े स्वस्थ हैं। उसने जवाब दिया कि यहां पर पेड़ लगाने के बाद उसका बहुत ध्यान रखा जाता है। आप देख रही हो न पेड़ के तने की 3 इंच दूरी से मल्चिंग की गई है। मतलब पेड़ के नीचे सूखी पत्ती, घास, लकड़ी का बुरादा बिछा दिया जाता है। ऐसा पेड़ को गर्मी-सर्दी से बचाने के लिए किया जाता है। पेड़ के तने से 3 इंच दूर से लेकर पूरे घेरे में 2-4 इंच मोटी परत सूखी पत्ती, घास, भूसा, नारियल की जटा, लकड़ी का बुरादा, लकड़ी के छोटे-छोटे टुकड़े बिछा देते हैं । पेड़ के लिए मलचिंग के बड़े फायदे हैं।
इससे पानी बचता है क्योंकि मिट्टी से वाष्पन नहीं होता।धूप सीधी मिट्टी पर नहीं पड़ती जिससे वाष्प बनकर पानी नहीं उड़ता है। और 50% तक पानी बचता है। गर्मी में भी पेड़ प्यासा नहीं मरता। मल्चिंग घास-खरपतवार रोकता है। धूप जमीन तक नहीं पहुंचती तो जंगली घास नहीं उगती। गुड़ाई-निराई का भी झंझट खत्म हो जाता है।
मल्चिंग मिट्टी ठंडी रखती है। 45°C की धूप में भी जड़ें 25-30°C पर आराम से सांस लेती हैं। जड़ जलती नहीं है। सूखी पत्ती धीरे-धीरे सड़कर केंचुआ खाद बन जाती है। पेड़ को ऑर्गेनिक और फ्री में खाना मिलता है।
बारिश में मिट्टी कटकर नहीं बहती। जड़ें मजबूत रहती हैं। बड़ा होने तक पेड़ों की बहुत देखभाल की जाती है और जो भी बारिश होती है उसका पानी भी यही समा जाता है। फुटपाथ पर ढाल ऐसी दी जाती है कि पानी पेड़ के चारों ओर बने स्क्वायर में ही जाता है। इसलिए यहां पर हरा-भरा नज़र आता है। नया पेड़ लगाया है तो ये करना सबसे जरूरी है। वरना धूप में 15 दिन में पेड़ सूख जाएगा।
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