4 साल की दित्या, इस उम्र के बच्चों की तरह बहुत एनर्जेटिक है। 4-5 साल में दिमाग और शरीर दोनों सुपर फास्ट बढ़ रहे हैं। हर चीज़ छूनी है, कूदना है, पूछना है। उत्कर्षनी को घर में उसकी ऊर्जा को पाइप लाइन देनी है क्योंकि एनर्जी दुश्मन नहीं है। ये सिग्नल है कि बच्चा नॉर्मल है, हेल्दी है। स्कूल में टीचर है, सॉकर और स्विमिंग क्लास में कोच हैं जो दित्या जैसे बच्चों को व्यस्त रखते हैं। स्कूल से क्लासेस में राजीव जी ले जाते हैं और रास्ते भर दित्या से बतियाते हैं और उसके प्रश्नों के उत्तर देते हैं। उसके घर आने से पहले उत्कर्षनी अपना लेखन कर लेती है, जो छूट जाता है उसे रात में गीता दित्या के सोने के बाद पूरा करती है। अमेरिका में सब काम खुद करना होता है। दित्या के घर आते ही हम सबको मना है कि कोई उत्कर्षनी से बात नहीं करेगा। वह सिर्फ दित्या से बात करेगी। दित्या बहुत खुश होती है कि इस समय उसकी मां सिर्फ उसकी है। दित्या जो भी करती है, उत्कर्षनी उसका साथ देती है। उसका साथ एनर्जी को प्यार में बदल देता है। साथ साथ वह अपने घरेलू काम निपटाना शुरू करती है। जिसमें दित्या की ऊर्जा का भी इस्तेमाल होता है। उससे बतियाते हुए, छोटे काम उसको करने देती है। पौधों में पानी देना, अपने खिलौना समेटना, रायता बनाने के लिए दही फेंटान आदि। अपनी देखरेख में "बड़ा वाला काम" फील कराकर, उसकी एनर्जी यूज़ करते हुए जूस निकालना आदि।
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