श्वेता का फोन आया कि आपने आदम्या को कौन सा गाना सुनाया था, ला ला ला ला कर रहा है। कभी 'तम तमा तम तम' कर रहा है। मुझे याद आया जब मेरे पास आकर लेटा तो मैं अपनी आदत के अनुसार गाने लगी, " ए दिल मुझे बता दे तू किस पर आ गया है, वो कौन है जो आकर ख्वाबों पे छा गया है।" कुछ देर में वह मेरे साथ ला ला ला ला करने लगा और गुनगुनाने भी लगा। बार-बार यह गाना सुनाने को कहता। मैंने गाना बदला, " सैया दिल में आना रे, आके फिर न जाना रे" तो यह मेरे साथ तम तमा तम तम करने लगा। रात को स्वेता के पास लेटते ही यह वही गाने सुनने की जिद करने लगा। श्वेता को समझ ही नहीं आ रहा था, यह कौन से गाने काे कह रहा है। शब्द इसे याद नहीं थे और इतने पुराने गानों की, वह बच्चे से उम्मीद भी नहीं कर रही थी। अब श्वेता इसको ये गाने यूट्यूब पर लगा देती। कुछ दिन बाद मैं फिर गई। छोटे से आदम्या ने पूछा, "आपको गाना सुनाऊं? " मेरे हां करते ही वह वही दोनों गाने सुनाने लगा। मैं हैरान! प्ले स्कूल के छात्र, आदम्या ने इतना बड़ा गाना सुर लय से सुनाया। 4 साल पहले श्वेता को पता चला, उनकी सोसाइटी में म्यूजिक टीचर भी हैं। श्वेता ने उनके पास आदम्या को भेजना शुरू किया। यह बहुत खुशी से उनसे सप्ताह में दो क्लास लेने जाता है। श्वेता कितनी भी थकी हुई हो, आदम्या जब भी सुनाने को कहता है, वह बहुत खुशी से सुनती है।
गाना सीखने से , बच्चों का दिमाग भी तेज होता है।
मेमोरी, फोकस और मैथ्स-लॉजिक वाली क्षमता बढ़ती है। संगीत वाले बच्चे पढ़ाई में भी आगे रहते हैं।
भाषा जल्दी सीखते हैं। सुर और लय समझने से बच्चा नए शब्द, उच्चारण और भाषा जल्दी पकड़ता है।
स्टेज पर परफॉर्म करने से स्टेज फियर खत्म होता है।कॉन्फिडेंस बढ़ता है। पर बच्चों को जबरदस्ती मत कराएं, बच्चा खुद इंटरेस्ट लेगा तो ही फायदा होगा।
