7 मार्च की शाम को उत्कर्षनी ने कहा, "कल 8 मार्च को रात के 2:00 बजे से अपनी घड़ी आदि में टाइम एक घंटा आगे कर लेना है। याद से करना है क्योंकि होली खेलने जाना है, नए समय के मुताबिक 12:00 बजे हम घर से निकलेंगे।" मतलब आज जितने समय पर 11 बजे थे कल वही समय 12:00 होगा! मेरे लिए यह सब कुछ नया था। सुबह संडे को वैसे ही देर से उठते हैं। होली खेल कर आए पूरी कोशिश की कि दित्या दिन में सो ना जाए क्योंकि गीता दित्या, रात को 9:00 बजे सो जाती हैं। गीता का स्कूल बहुत दूर है, डेढ़ घंटा बस लेती है। 10 मिनट की ड्राइव से उसे बस स्टैंड पर पहुंचना होता है इसलिए वह 5:45 पर उठती है। 6:15 पर उसको घर से निकलना होता है। आज समय बदलते ही वह आज के 9:00 बजे सोने चली गई। पर शरीर की घड़ी नहीं बदली थी इसलिए कल के समय से थोड़ा पहले सो गई। लेकिन सुबह बदले हुए समय पर उठना तो जरूरी है। बस मिस गई तो राजीव जी को छोड़ने जाना पड़ेगा। आना-जाना 3 घंटे। धीरे-धीरे बॉडी वॉच भी सेट हो जाएगी। लेकिन 4 साल की आदित्य जमकर होली खेल कर आई और थकी हुई थी। उस पर खूब ध्यान दिया कि दिन में सोए ना। पर वह शाम को सो गई मुश्किल से आधा घंटा थोड़ी सोई थी उसे जगाया खेल में लगाया। 9:00 बजे उसे भी सोने के लिए लेकर आए। मैं गीता दित्या एक रूम में सोते हैं। मुझे भी बच्चों के साथ 9:00 बजे सोने की आदत हो गई है। गीता सुबह उठकर बहुत शांति से तैयार होती है, किसी को डिस्टर्ब नहीं करती। लेकिन आज दोनों बहनों ने सोने से कुछ देर पहले शैतानी की। क्योंकि उनकी नींद का समय नहीं था। गीता के सोने के बाद, दित्या क्योंकि शाम को सो चुकी थी इसलिए उसकी आंखों में दूर-दूर तक नींद नहीं थी लेकिन अंधेरे में भी शांति से वह कुछ न कुछ करती रही ताकि किसी की नींद डिस्टर्ब न हो। आज संडे था। सुबह देर तक सोई थी इसलिए मैं भी 11:00 के बाद सो गई। मेरे बाद दित्या पता नहीं कब सोई! सुबह उसे उठाना बहुत मुश्किल हो गया था। दित्या को स्कूल छोड़ने राजीव जी के साथ मैं भी जाती हूं। पहले दिन उसकी क्लास तक चली गई, दित्या ने अपनी क्लास दिखाई थी। अब मैं गाड़ी में बैठी रहती हूं राजीव जी उसे क्लास तक छोड़कर आते हैं। यहां पेरेंट्स को क्लास तक जाने की बिल्कुल रोक-टोक नहीं है। मैं गाड़ी से बच्चों का उनके पैरेंट्स के साथ स्कूल आना देखती रहती हूं। यह देखना मुझे बहुत अच्छा लगता है। एक भी बच्चा दुखी और रोनी सूरत में स्कूल नहीं आता यानी स्कूल का माहौल बच्चों के लिए बहुत ही अच्छा है। समय बदलाव के कारण आज पहला दिन था मुझे देखना था कि बच्चों को एक घंटा पहले उठने के बाद स्कूल कैसे आते हैं पर हम लेट हो गए। आज मंगलवार को हम समय से पहुंच गए। बच्चे स्कूल आ रहे थे, वे पहले की तरह ही मस्त हैं। 8 मार्च को दिन के उजाले की बचत के लिए समय को 1 घंटा आगे बढ़ाना। यह प्रक्रिया डे लाइट सेविंग टाइम (DST) के नाम से जानी जाती है, जिसमें गर्मियों के मौसम में समय को आगे बढ़ाकर दिन के उजाले का अधिकतम उपयोग किया जाता है।
8 मार्च 2026 को रविवार को समय को 1 घंटा आगे बढ़ाया , जिससे समय 2:00 बजे से 3:00 बजे हो गया। यह समय परिवर्तन आम तौर पर रात 2:00 बजे किया जाता है, ताकि लोगों को समय परिवर्तन के कारण कम असुविधा हो। दो-तीन दिनों में असुविधा सुविधा में बदल जाती है। 😃
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