अमेरिका में भी उत्कर्षनी के घर में हरी मिर्च जरूर मिलती है। सप्ताह में एक दिन स्टोर में सब्जी लेने जाते हैं तो हरी मिर्च खरीद लेते हैं। हरी चटनी बनाने के बाद कुछ मिर्ची संभाल ली जाती हैं। अगर खराब हो जाए या खत्म हो जाए तो उसके कंटेनर बगान में जरूर मिलती हैं। वह उसमें से तभी तोड़ती है जब बाजार से लाई मिर्च खत्म हो जाती है। उत्कर्षनी ने वर्टिकल कंटेनर में कई तरह की मिर्च लगा रखी है। उसे पौधे में लगी मिर्ची देखना बहुत अच्छा लगता है। वह पेड़ पर ही लाल होकर बहुत सुंदर लगती हैं। जब कहीं भी पेड़ पौधों का मेला लगता है और वह वहां से अन्य पौधों के साथ मिर्च का पौधा जरूर खरीद कर लाती है। बहुत अच्छी कुक है। उसकी कुकिंग में कोई कमी न रह जाए इसलिए हर वक्त मिर्च उसके घर मिलेगी। उसका मिर्ची के प्रति प्रेम देखकर, मैं भारत लौटने से पहले कई मिर्च के पौधे तैयार करके आई थी।
कंटेनर में मिर्च उगाना - बहुत आसान है
गमला कम से कम 10-12 इंच गहरा और चौड़ा लें। एक गमले में 1 पौधा ही लगाएं। नीचे छेद होना जरूरी है। अमेरिका में तो बनी बनाई मिट्टी, पॉटिंग मिक्स की बोरी आती है। वैसे 50% बगीचे की मिट्टी + 30% गोबर की खाद / वर्मीकम्पोस्ट + 20% रेत या कोकोपीट
मिर्च को हल्की, भुरभुरी मिट्टी पसंद है, चिपचिपी नहीं। अपने इलाके की बीज की दुकान से बीज लाकर या
बाजार की सूखी लाल मिर्च से बीज निकाल कर 6-8 घंटे पानी में भिगो दें। बीज को मिट्टी में आधा इंच गहरा डाल कर पानी छिड़क दें।
7-10 दिन में पौधे निकल आएंगे। जब 4-5 इंच के हो जाएं तो अलग-अलग गमले में शाम को लगा दें।
दिन में 5-6 घंटे की सीधी धूप चाहिए।
रोज़ पानी नहीं, मिट्टी सूखी लगे तभी पानी दो। ज्यादा पानी से जड़ सड़ जाती है।
हर 15 दिन में एक मुट्ठी गोबर खाद या केले के छिलके का पानी देना चाहिए।
फूल आने लगे तो 1 चम्मच लकड़ी की राख डाल दो - मिर्च तेज होगी और फूल झड़ेंगे नहीं। वहां पर मिर्च के पौधे की खाद का पैकेट आता है। उसे पानी में घोलकर डाल देते हैं।
कीड़े लगे तो नीम का तेल 5ml + 1 लीटर पानी + थोड़ा सा शैंपू मिला कर हफ्ते में एक बार छिड़काव कर दो।
बीज से लगभग 60-70 दिन में पहली मिर्च तोड़ने लायक हो जाती है। एक पौधा 6-8 महीने तक देता रहता है। चित्र में उत्कर्षनी के घर में लगे हुए मिर्च के पौधे हैं





