उत्कर्षनी ने कंटेनर में कई तरह की हर्बस उगा रखी हैं। जो गमले में देखने में भी सुंदर लगती है और किसी भी व्यंजन में बहुत कम मात्रा में इस्तेमाल होती हैं। घर में उगाने से जब जरूरत होती है तो ताज़ी मिल जाती है। ताजी पत्तियां होने से स्वाद भी बहुत बढ़ जाता है। इसे "Nana Mint" या "Spearmint की स्पेशल नस्ल" भी कहते हैं। मोरक्को की ट्रेडिशनल चाय इसी से बनती है। खुशबू नॉर्मल पुदीने से ज्यादा मीठी और ठंडी होती है। एक गमले में पुदीने से कुछ मिलते जुलते पत्ते देखे। तो उत्कर्षनी से उसकी जानकारी ली। यह मोरक्कन पुदीना कहलाता है। इसके पत्ते नॉर्मल पुदीने से लंबे, पतले और चमकदार होते हैं। डंठल सीधा ऊपर जाता है। स्वाद में कम कड़वा, ज्यादा स्वाद होता है। मोरक्कन चाय की खास महक इसी से आती है। इसके उगाने का तरीका भी नॉर्मल पुदीने जैसा है। मैं लिंक लगा दूंगी। आप क्लिक करके देख लेना।
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सालभर उगता है, पर सर्दी-बारिश बेस्ट है। 15°C से 30°C तक आराम से चलता है। दिल्ली में अक्टूबर-मार्च बेस्ट है । लगाना भी बहुत आसान है।
नर्सरी से पौधा ले आओ या बाजार के पुदीने का तना पानी में रख दो। 7 से 14 दिन में जड़ आ जाएगी। इसे शाम को गमले में लगा दो।
50% मिट्टी + 30% गोबर खाद + 20% रेत। मिट्टी नम रहे पर पानी रुकना नहीं चाहिए। 8-10 इंच का चौड़ा गमला। गहरा कम, फैलाव ज्यादा चाहिए क्योंकि जड़ें साइड में भागती हैं। उसमें यह मिट्टी भर दो।
रोज 4-6 घंटे हल्की धूप चाहिए। दोपहर की तेज धूप से पत्ते जल जाते हैं। सेमी-शेड बेस्ट है ।
गर्मी में रोज, सर्दी में 1 दिन छोड़कर पानी देना है। मिट्टी हमेशा हल्की नम रखो।
जब पौधा 6 इंच का हो जाए, ऊपर से 2 इंच काट दो। कटिंग जरूरी है। काटने से नीचे से झाड़ीदार हो जाएगा। नहीं काटोगे तो सिर्फ लंबा होगा।
इसे अकेले गमले में लगाओ क्योंकि इसकी जड़ फैलती हैं वरना जड़ें दूसरी सब्जी की जड़ें दबा देंगी।
महीने में 1 बार चाय की पत्ती की खाद या वर्मी कम्पोस्ट देनी है। बहुत खाद से खुशबू कम हो जाती है।
45-60 दिन में तोड़ने लायक। ऊपर से पत्ते तोड़ो, जड़ छोड़ दो। 3 महीने तक एक पौधा चलता है।
उपयोग मसलन मोरक्कन मिंट टी, लेमन मिंट ड्रिंक, तबूलेह सलाद, रायता, लस्सी, चटनी में डालो। मटन/चिकन के साथ बहुत बढ़िया लगता है। फ्रूट सलाद, आइसक्रीम, कोल्ड कॉफी के ऊपर गार्निश की जाती है।सांस की बदबू में 2-3 पत्ती चबाने से मुंह फ्रेश हो जाता है। गैस, अपच, एसिडिटी में तुरंत आराम मिलता है। खाने के बाद चबा लो। ज्यादा मात्रा नुकसान भी कर सकती है।

