लगता है अधिकतर आबादी आजकल घूमने ही निकली हुई है। कुछ भी गाड़ियों के पीछे साइकिल लगी हुई है, जहां मौका मिलेगा साइकलिंग करेंगे।
सर्दी के कारण यहां रात बहुत जल्दी हो रही है। 3:30 बजे से अंधेरा शुरू हो जाता है, चार,4:30 बजे चांद तारे निकल आते हैं यानी घुप अंधेरा। हाईवे पर दी गई स्पीड से गाड़ी चलानी होती है। यह तक लिखा होता है कि कहां कितने मील तक में लाइन बदल सकते हैं। कितनी दूरी पर रेस्टरूम है, वहां जाकर वॉशरूम का उपयोग कर सकते हैं जो एकदम साफ मिलते हैं। जरूरत का सामान खरीदने के लिए गैस स्टेशन( पेट्रोल पंप) पर भी स्टोर होते हैं, उन में भी रेस्ट रूम होता है। उसमें भी फ़ारिग होने जा सकते हैं। सीनिक दृश्य पर रुक रुक कर फोटो खींचने वीडियो बनाने के लिए हाईवे के साइड में जगह होती है, जहां गाड़ी पार्क करके प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकते हैं और उसे कैमरे में कैद कर सकते हैं। यहां खड़ा आपकी तरह कोई भी सौंदर्य प्रेमी, आपका फोटो खींचने को तैयार रहता है। आप खड़े सेल्फी लेने की कोशिश कर रहे हैं, कोई भी आपसे पूछ लेगा क्या मैं आपकी मदद करूं? और आपकी जैसे आप चाहोगे फोटो खींच देगा। हमारी यात्रा का मुख्य मकसद होता है, प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद उठाना इसलिए राजीव जी सुबह यात्रा जल्दी शुरू करते हैं और रात होते ही हम शहर में होते हैं और होटल का सूट बुक ही होता है। गीता दित्या भी मस्त होकर बाहर देखती रहती हैं। सबसे हैरान तो मुझे दित्या करती है जो बेल्ट से फिट होकर अपनी चेयर कार पर बैठी रहती है, कुल 4 साल की ही तो है। शायद खूबसूरत नजारे उसे अच्छे लगते हैं। बीच-बीच में मुझसे मोबाइल लेकर, बाहर की वीडियो और फोटो भी लेती है। उत्कर्षनी रास्ते में इन जगहों के बारे में बताती जाती है। गाड़ी में गीता दित्या गाती भी हैं और अंधेरा होने पर सो जाती हैं। खाने की कोई परेशानी नहीं है, मुझे छोड़ कर सब नॉनवेज खाते हैं इसलिए कोई परेशानी नहीं है। जहाँ गए वहीं का स्थानीय मशहूर व्यंजन खाया। मेरे खाने के लिए बहुत खोजबीन करनी पड़ती है। मसलन आज की यात्रा में लंबी दूरी तय करनी है क्योंकि यहां रास्ता ही दर्शनीय है तो हम लंच के लिए समय ऑफॉर्ड नहीं कर पा रहे हैं। मार्केट रोड पर ही है उसमें मैकडॉनल्ड, पेट्रोल पंप भी है। उत्कर्षनी ने आर्डर किया, राजीव जी ने पेट्रोल भरा, यहां पेट्रोल खुद ही भरते हैं। बच्चे मैकडॉनल्ड के प्ले एरिया में खेलने लगे। तब तक आर्डर आ गया और राजीव भी आ गए। बच्चे खाने खेलने में लगे रहे। यह दोनों मेरे लिए वेजीटेरियन ढूंढने चले गए। गाड़ी में स्नैक्स, नट्स जूस आदि रखा ही रहता है। मैं कहती हूँ, मैं यह सब खा लूंगी या मैकडॉनल्ड के फ्रेंच फ्राइज ही खा लूंगी। पर कुछ लेकर ही आते हैं। उनके आते ही हम सब गाड़ी में बैठते हैं और हमारा खाना गाड़ी में ही होता। दिन जो छोटे हैं। 😄 अंधेरा होते ही गीता, दित्या सो गई। La Quinta होटल में सुइट बुक है। नाइट स्टे के लिए आ गए। छुट्टी हैं इसलिए बच्चों को ज्यादा टीवी की परमिशन है। दित्त्या को कार्टून लगा दिया। राजीव जी ने नेटफ्लिक्स पर हिंदी पिक्चर लगा दी। मैं देखते हुए सो गई। क्रमशः










