हमारी सात राज्यों की सड़क यात्रा में, सुबह हम होटल से नाश्ता करके निकलते और कोशिश करते थे कि शाम के 5:00 बजे तक अगले शहर में पहुंचे। सर्दी के कारण 3:00 बजे तो शाम हो जाती, 4:00 बजे रात हो जाती थी। 6:00 बजे ही बुक किए गए, होटल में पहुंचते और रात रुकते। दिन भर में हमें शहर घूमना होता, वहां के दर्शनीय स्थल देखने होते। नई जगह भी जाना है। कुछ जगह ऐसी आती थी, जहां पर वेजीटेरियन का कॉन्सेप्ट उन्हें समझ नहीं आता था इसलिए उत्कर्षनी राजीव जी का समय मेरे लिए लंच खोजने में लग जाता, समय बचाने के लिए ज्यादातर खाना हम लोग पैक करवा लेते थे। एक जगह उत्कर्षनी बड़ी खुशी से आ रही थी। हाथ में उसके पैकेट था। उसने मुझे पकड़ाया और बोली, " आप खुश हो जाओगी, आपका खाना देखकर। हमेशा आपका खाना लाते हुए, मैं सोचती पता नहीं आपको यहां के खाने का स्वाद आएगा कि नहीं आएगा।" मैं तो उनकी खुशी देखकर ही खुश हो गई। आप भी फोटो में देखिए।
यह था रसेदार आलू गोभी की सब्जी और केसर वाले राइस। देखने में बहुत सुंदर! मिर्च का नामोनिशान नहीं था पर अच्छा बना था। वैसे वह अलग-अलग जगह में वहां का मेरे लिए तो अजीब नाम का, वेजीटेरियन खाना लाती थी जो तीखा नहीं होता था पर स्वाद होता था। उसे मैं खाते हुए, अपने किसी भारतीय खाने से मिलान करती। इस खाने को खाते हुए तो मैं सिर्फ भारत के आलू गोभी की सब्ज़ी के स्वाद से ही तुलना कर सकती हूं! उत्कर्षनी खुश है कि वह मेरे लिए भारतीय खाना ढूंढ लाई। उत्कर्षनी उत्साह से बोली, " थोड़ा पहले चले जाते तो हम दो पैकेट खरीद लेते, हमसे पहले किसी ने एक ले लिया।"




