जनवरी का महीना है ठंड है पर बीच पर इतनी नहीं है। धूप बहुत अच्छी लग रही है। यहां पर किनारे पर रेत ऊंची नीची है। कहीं-कहीं रेत के टीले भी हैं। उचित जगह देखकर हमने रेत पर चटाई बिछा ली। उस पर गीता दित्या के रेत में खेलने के खिलौने रख दिए और कुर्सियां लगा ली। हम जहां बैठे हैं, उसके बाद निचाई पर रेत कभी-कभी वहाँ पर भी हल्की सी लहर आ जाती जिससे नीचे गीला ही रहता है । उत्कर्षनी बोली, "LA में वेनिस बीच का कैरेक्टर कहीं और नहीं मिलेगा। समुद्र के पहले एक आर्टिस्टिक, मामूली सा हिप्पी, वेनीस का रफ, क्रिएटिव, फ्री-स्पिरिटेड माहौल शुरू होता है।" यहां मैंने चारों ओर नज़र घुमाई देखा। दूर 'पियर' (Pier) है। गीता तो स्विमर है, वह लहरों में खेलने दूर तक चली गई। राजीव जी उसके पीछे चल दिए। दित्या ने गीली रेत में एक गड्ढा बनाया और अपनी छोटी सी बाल्टी से समुद्र से पानी लाल के उसको भर्ती रही जो कभी भरना नहीं था। उत्कर्षनी दित्या का खेल देखती रही। और मैं ऐतिहासिक वेनिस पियर की ओर चल दी। खेत में चलना बहुत मुश्किल है मैं हाथ में चप्पल पकड़ कर चलती रही। और पहुंच गई। पियर की खासियत यह है कि ये 1300 फीट लंबा, समुद्र में अंदर तक जाता है।
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