माघ पूर्णिमा 1 फरवरी को काशी में जन्में संत रविदास की जयंती पर पवित्र नदी में स्नान करके उनके रचे पदों, दोहों को कीर्तन में गाया जाता है। उनका जीवन बताता है कि भक्ति के साथ सामाजिक, परिवारिक कर्त्तव्यों को भी निभाना चाहिए। उनका कहना था कि ’मन चंगा तो कठौती में गंगा’
ब्राह्मण मत पूजिए जो होवे गुणहीन
पूजिए चरण चंडाल के, जो होवे गुण प्रवीण
यह लेख प्रेरणा संस्थान से नोएडा से प्रकाशित प्रेरणा विचार पत्रिका के फरवरी अंक में प्रकाशित हुआ है।
इस समय अमेरिका में हूं, यहां वैलेंटाइन की तैयारी देखने को मिल रही है। मॉल में समान और घर के आगे भी सजावट।





