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Monday, 6 July 2026

सुंदरकांड पाठ श्रृंखला 1 के समापन पर हुआ सम्मान समारोह आयोजित Award ceremony held at the conclusion of the Sundarkand Recitation Series 1.

 


   बी.एस. फाउंडेशन द्वारा सुंदरकांड पाठ श्रृंखला एक का भव्य समापन एवं सम्मान समारोह एनईए भवन सेक्टर 6 नोएडा में आयोजित किया गया।

मुख्य अतिथि अंतर्राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं अध्यक्ष दिल्ली संत महामंडल महंत नारायण गिरी जी ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

डा. बबीता शर्मा बी.एस. फाउंडेशन की अध्यक्ष ने बताया कि हमने एक वर्ष पहले सुंदरकांड पाठ श्रृंखला 1 का कार्यक्रम शुरू किया था। जिसमें 12 सुंदरकांड पाठ, कुछ रामायण पाठ एवं मानस पाठ, कुछ हरि नाम संकीर्तन, कुछ भजन संध्याओं के साथ साथ तीन कथाओं का भी आयोजन किया था जिनके पूर्ण समापन पर आज हम सब इकट्ठा हुए हैं, जल्दी ही श्रंखला द्वितीय की घोषणा की जाएगी।

आज हमने धन्वंतरी दास, अशोक भारद्वाज, रसराज जी महाराज, जिवेन्दर कृष्ण शास्त्री,  वंशीधर दास (इस्कॉन), मानस मधुप, नवीन भाई ओझा, कृष्ण पंत अकिंचन, नवनीत मिश्रा, अभिषेक तिवारी, प्रवीण पांडे, सुनील शास्त्री, के.सी. गुप्ता, श्रीमति राधा शर्मा, अशोक मिश्रा, प्रवेश आचार्य, हिमांशु बाथम को सम्मानित किया।

इस आयोजन का सफल बनाने में एनईए अध्यक्ष विपिन मल्हन, सांसद प्रतिनिधि संजय बाली, उत्कर्ष शर्मा, ललित गुप्ता ललित एडवरटाइजिंग, मुकेश गुप्ता, उद्देश्य का विशेष योगदान रहा।

इस अवसर पर बी.एस. फाउंडेशन टीम सदस्य एवं नोएडा मीडिया क्लब के अध्यक्ष आलोक द्विवेदी, उत्तर प्रदेश महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष विमला बाथम, सेक्टर 27 आरडब्ल्यूए अध्यक्ष राजीव गर्ग, संकल्प इंडिया चैरिटेबल ट्रस्ट की अध्यक्ष रेखा शर्मा, सेक्टर 55 आरडब्ल्यूए अध्यक्ष सतयनारायण गोयल, उपदेश भारद्वाज, श्री शनि मंदिर सेवा समिति के अध्यक्ष मानसिंह चौहान, समाजसेवी त्रिलोक शर्मा, टी एन गोविल के साथ साथ शहर के विशिष्ट लोग उपस्थित रहे।

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Sunday, 5 July 2026

कैस्टेक लेक स्टेट रिक्रिएशन एरिया लॉस एंजेलिस Castaic Lake State Recreation Area, Los Angeles Migration to America Neelam Bhagi अमेरिका प्रवास नीलम भागी

 


गीता दित्या की ईस्टर की छुट्टियां थीं। उत्कर्षनी को अपना लेखन पूरा करना था। उत्कर्षनी अपनी पसंद की जगह बताती जो उसकी देखी हुई होती और बच्चों की भी पसंद की होती है। उसको पूरा यकीन होता कि मैं वहां जाकर बहुत खुश होउंगी। वह हमारी जाने की तैयारी कर देती। राजीव जी, मैं और गीता दित्या वहां चल देते। जैसे ही उत्कर्षनी का काम पूरा होता, वह फोन कर देती। हम बच्चों की मर्जी के हिसाब से लौटते। यहां प्रति गाड़ी 15 डॉलर एंट्री फीस है। पार्क में आते ही राजीव जी पार्किंग ऐसी ढूंढ रहे थे जो लेक के पास हो और पास में ही बच्चों का प्ले एरिया हो। ताकि वह कुछ देर झूलों पर भी बिता सके। दित्या छोटी है और उसको पार्किंग से ज्यादा दूर भी न चलना पड़े। इस कारण लगभग काफी हिस्सा पार्क का हमने गाड़ी में बैठे-बैठे देख लिया। आप भी दिए गए लिंक पर क्लिक करके देख सकते हैं। वहां के पार्कों की मुझे लिखने की याद, यहां मानसून देखकर आई। मुझे तो लगता है। वहां पर वर्षा का पानी वही समा जाता है। कैस्टेक लेक स्टेट रिक्रिएशन एरिया लॉस एंजेलिस से 1 घंटे, उत्तर में बसा LA काउंटी का सबसे बड़ा झील वाला पार्क है। यह वीकेंड पर कैंपिंग, बोटिंग, फिशिंग के लिए बेस्ट जगह है। जो 1976 में पानी की सप्लाई के लिए बना, फिर इसे पब्लिक रिक्रिएशन के लिए खोल दिया। कैस्टेक लेक स्टेट रिक्रिएशन एरिया में 1250 एकड़ पानी + 4000 एकड़ पहाड़ी। पूरे एरिया में दो अलग-अलग झीलें हैं। पिकनिक 150+ पिकनिक टेबल, BBQ ग्रिल हैं । यहां ग्रुप शेल्टर भी बुक होते हैं। बर्थडे पार्टी, फैमिली गेट-टुगेदर के लिए बेस्ट जगह है। अगर LA में रहते हो और समुद्र की भीड़ से बचना है तो कैस्टेक लेक बेस्ट ऑप्शन है। यहां पहाड़ कैंपिंग, पानी, पहाड़, कैंपिंग आदि सब एक जगह हैं। हम जिस दिन गए थे। उस दिन ईस्ट था। इसलिए खूब भीड़ थी। क्रमशः

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Friday, 3 July 2026

जल संचयन के लिए हम जागरूक हैं! We are aware of the need for water conservation! Neelam Bhagi नीलम भागी

 


जब तक हम खुद समझकर न अपनाएं, तब तक भूजल स्तर सुधरेगा नहीं। इस पर भाषण मत दो। आंकड़े और डर की बात कम होनी चाहिए , समाधान और फायदे की बात ज्यादा करो।तिरुवल्लूर में कलेक्टर के रूप में IAS प्रताप ने अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए एक बेहतरीन पहल की। उन्होंने जिले के 1200 से अधिक सूखे और बेकार पड़े बोरवेलों को वर्षा जल संचयन संरचनाओं (Rainwater Harvesting Structure) में बदल दिया। इस कदम से भूजल स्तर में भारी सुधार देखा गया। "चेन्नई में 2019 में टैंकर से पानी आया था। "प्यासी धरती देख मांगती तो क्या मेघो से पानी!" मेघ तो पानी देते हैं। पर धरती की प्यास बुझाने के लिए क्या हमने जल संचयन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए पूरी तैयारी कर ली है। वर्षा का जल यूं ही नदियों नालों में बह जाएगा। भविष्य का डर है, हो सकता है आपके शहर में 2030 तक भूजल 1000 फीट नीचे चला जाएगा।" जो लोग गाड़ी खड़ी करने के लिए अपने घर के आसपास जमीन पर कंक्रीट का फर्श बना देते हैं, वे भी भूजल स्तर को नीचे करने का पाप करते हैं।  

"भू जल स्तर बढ़ेगा  तो "टैंकर के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा। बोरवेल सूखेगा नहीं।" मानसून में पेड़ लगाए, जल संचयन करें।  

https://www.instagram.com/reel/DaWkpyoSvnI/?igsh=MTh2aThqdXQxNm1naw==

https://www.instagram.com/reel/DZfeXX2g3H_/?igsh=MWdwbzNlYmY3NWVseQ==

Thursday, 2 July 2026

क़ृषि, प्रकृति, पर्यावरण संरक्षण और लोक़ पर्वों का जुलाई July of agriculture, nature, environmental protection and folk festivals Neelam Bhagi

 

कहीं पढ़ा था कि पेड़ों के लिए काम करना, मां प्रकृति की पूजा करना है। आषाढ़ मास में वर्षा का आगमन होता है इसलिए इसे किसानों के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं तो वृक्षारोपण की शुरुवात करते हैं। इसलिए 1950 से जुलाई के पहले सप्ताह में सरकार देशभर में ’वन महोत्सव’(पेड़ों का त्योहार) का आयोजन करती है। इस दौरान स्कूलों कॉलेजों, प्राइवेट संस्थानों द्वारा पौधारोपण किया जाता है। जिससे लोगों में पेड़ों के प्रति जागरूकता पैदा होती है। वनों का महत्व सामान्य लोगों को समझाना मकसद होता है। बच्चों से 'वनों केे लाभ' पर निबंध लिखवाना या वाद विवाद प्रतियोगिता करवाना ही काफी नहीं है। उन्हें पेड़ों को बचाना, उनका संरक्षण करना भी सिखाना है। 

दश कूप सम वापी, दश वापी समोहृदः।
दशहृदसमः पुत्रो, दशपुत्रसमो द्रुमः।
दस कुओं के बराबर एक बावड़ी है, दस बावड़ियों के बराबर एक तालाब, दस तालाबों के बराबर एक पुत्र है और दस पुत्रों के बराबर एक वृक्ष है। मत्स्य पुराण का यह कथन हमें पेड़ लगाने और उनकी देखभाल करने के लिए प्रोत्साहित करता है। हमारे यहां किसी राजा की महानता का वर्णन करते हैं तो लिखते हैं कि उसने अपने शासन काल में सड़के बनवाईं थीं और उसके दोनो ओर घने छायादार वृक्ष लगवाए थे। हमारे यहां तो पेड़ों की पूजा की जाती हैं। अब हमें हरियाली बढ़ाने के लिए ग्रीन स्टेप्स लेने होंगे। सभी के थोड़े थोड़े योगदान से बहुत बड़ा परिवर्तन हो जायेगा। बच्चों को बचपन से ही पर्यावरण से जोड़ना होगा। द्री उत्सव (2से 5 जु.) अरुणाचल प्रदेश की अपातानी जनजाति का एक प्रमुख कृषि पर्व है, जो मुख्य रूप से ज़ीरो घाटी  में हर साल  मनाया जाता है। यह बेहतर फसल और समुदाय की भलाई के लिए देवताओं की पूजा (जैसे तामू, हरनियांग) के साथ मनाया जाता है। जैन धर्म में अष्टाह्निका महापर्व व्रत आषाढ़  मास में शुक्ल पक्ष की अष्टमी से पूर्णिमा (8 दिनों तक) तक मनाया जाता है। आषाढ़ अष्टाह्निका (नंदीश्वर): जुलाई  जिसका समापन 12 जुलाई 2026 (रविवार) को होगा।
चंपाकुलम नौका दौड़ ( 6 जु.) यह केरल की सबसे पुरानी और सबसे लोकप्रिय पारंपरिक नौका दौड़ है, जो अलाप्पुझा के चंपाकुलम नदी में आयोजित होती है। महाराष्ट्र की प्रसिद्ध पंढरपुर वारी (पालकी उत्सव)  8 जु. (आळंदी से) 8 जु. को संत ज्ञानेश्वर महाराज की पालकी का प्रस्थान होगा और 7 जु. (देहू से) को संत तुकाराम महाराज की पालकी का प्रस्थान होगा। यह लगभग 21 दिनों तक चलने वाला पैदल उत्सव है, जो 25 जुलाई 2026 को 'आषाढी एकादशी' के मुख्य दिन पंढरपुर में संपन्न होगा। इस उत्सव में  वारकरी संप्रदाय के लाखों श्रद्धालु पैदल चलकर आषाढी एकादशी के अवसर पर पंढरपुर पहुंचते हैं। इसी प्रकार बेहदी नखलम महोत्सव(11से 14जु.) 3 दिन तक चलने वाला स्थान, जोवाई  जयंतिया हिल्स  मेघालय का त्योहार है। फसल बोने के बाद भगवान से अच्छी वर्षा, समृद्ध फसल के लिए प्रार्थना की जाती है। भगवान को बुलाने के लिए पारंपरिक पोशाक में सांस्कृतिक कार्यक्रम किए जाते हैं। यह पनार (जयंतिया) जनजाति का सबसे महत्वपूर्ण रंग-बिरंगा त्योहार है, जो बीमारी और बुरी आत्माओं को दूर भगाने और अच्छी फसल की कामना के लिए मनाया जाता है। अंतिम दिन 14 जु. को फुटबॉल मैच खेला जाता है। ऐसा मानना है कि विजेताओं की समृद्ध फसल पैदा होगी। आदि अमावस्या (14 जु) दक्षिण भारतीय (विशेषकर तमिल) संस्कृति में पितरों के तर्पण और श्राद्ध के लिए यह दिन बेहद पवित्र माना जाता है। हरेला उत्सव 16 जु. उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों (जैसे शिमला और सिरमौर में हरियाली के रूप में) भी मनाया जाता है। जो मानसून और हरियाली के स्वागत के लिए मनाया जाएगा। यह त्योहार प्रकृति, कृषि और पर्यावरण संरक्षण को समर्पित है, जहाँ लोग समृद्धि के प्रतीक के रूप में पौधों को रोपते हैं और भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा करते हैं। त्योहार से 9-10 दिन पहले, घर के मुखिया द्वारा 5 या 7 प्रकार के बीजों (जैसे गेंहू, मक्का, जौ) को मिट्टी की टोकरियों या गमलों में बोया जाता है। अब हरेला एक बहुत बड़े पर्यावरण जागरूकता अभियान में बदल गया है, जिसमें राज्य भर में बड़े पैमाने पर पौधे लगाए जाते है। पुरी का 12 दिवसीय प्रधान पर्व होते हुए भी रथोत्सव पर्व भारत में लगभग सभी नगरों में श्रद्धा और प्रेम के साथ मनाया जाता है। जो श्रद्धालू पुरी नहीं जा पाते, वे अपने शहर की रथ यात्रा में जरुर शामिल होते हैं। आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन भगवान जगन्नाथ की यात्रा प्रारंभ होती है। रथ यात्रा (16 जु.) ये एक ऐसा पर्व है जिसमें भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों के बीच में आते हैं। भगवान जगन्नाथ की यात्रा में भगवान श्री कृष्ण, सुभद्रा और बलराम की पुष्य नक्षत्र में रथ यात्रा निकाली जाती है। रथयात्रा बहन सुभद्रा के भ्रमण की इच्छा पूर्ण करने के उद्देश्य से श्रीकृष्ण और बलराम ने अलग रथों में बैठ कर करवाई थी। सुभद्रा जी की नगर भ्रमण की याद में यह रथयात्रा पुरी में हर वर्ष होती है। भारत के सभी मंदिरों में भगवान गर्भ ग्रह में स्थापित रहते हैं पर हमारे जगन्नाथ जी मंदिर से बाहर गुढ़िंचा मंदिर, मासी माँ के यहाँ जाते हैं। वहाँ आठ दिन रहते हैं। दसवें दिन वापिस आते हैं जिसे बोहुडा यात्रा कहते हैं। ऐसा मानते हैं जैसे भगवान मथुरा से वृंदावन गए थे। भगवान तो सबके हैं लेकिन मंदिर में प्रवेश केवल हिन्दुओं को दिया जाता है। जिनके मन में भगवान के दर्शन करने की लालसा है। वे रथ यात्रा में जाकर मंदिर से बाहर भगवान के दर्शन कर सकते हैं। 
आषाढ़ में मानसून आ जाता है। तेलंगाना का राज्य लोक महोत्सव बोनालु(19 जु. से 9अगस्त) हैदराबाद, सिकंदराबाद, तेलंगाना के अलावा भारत के कई अन्य हिस्सों में आषाढ़ के एक महीने तक बहुत श्रद्धा से मनाया जाता है। इसमें आषाढ़ के प्रत्येक रविवार महाकाली के मंदिर से बाजे गाजे के साथ जलूस निकलता है। त्योहार के पहले और अंतिम दिन देवी येलम्मा के लिए विशेष पूजाएं की जाती हैं। मन्नत पूर्ति पर तो देवी को धन्यवाद के लिए बहुत जोर शोर से मनाया जाता है। 200 साल से बोनालू पारंपरिक लोक उत्सव की शुरुआत हुई थी। श्रद्धालुओं का मानना है कि एक बार प्लेग फैला था, जिसका कारण देवी का रुष्ट होना है। उसके बाद से बोनालू में देवी को अच्छी फसल के लिए धन्यवाद करते हैं। अच्छी वर्षा और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं। वर्षा के कारण होने वाले संक्रमण से बचाने की प्रार्थना करते हैं। बोनालू के दौरान महिलाएं महाकाली को चावल, दूध और गुड़ से बने विशेष पकवान (बोनाम) अर्पित करती हैं। 19जु.को गोलकुंडा, 26जु. को सिकंदराबाद जुलूस निकाला जाएगा। खारची पूजा अगरतला, त्रिपुरा
21 जुलाई से शुरू होकर (7 दिनों तक) मनाया जाने वाला राज्य का एक प्रमुख हिंदू उत्सव है, जिसमें त्रिपुरी समुदाय के 14 वंशवादी देवताओं की पूजा और धरती माता का सम्मान किया जाता है।
देवशयनी एकादशी, थोली एकादशी, हरिशयनी एकादशी 25 जुलाई को है। इस दिन से सभी प्रकार के मांगलिक कार्यक्रम, विवाह आदि नहीं किए जाते हैं। मान्यताओं के अनुसार इसी दिन से भगवान विष्णु 4 महीनों के लिए योग निद्रा में जाते हैं। चौमासा शुरु हो जाता है और देवी देवता विश्राम को चले जाते हैं। इस अवधि में अत्यधिक वर्षा के कारण संत समाज एक ही स्थान पर रूक कर व्रत, ध्यान और तप करते हैं। उनके ज्ञान का ही प्रभाव है कि स्थानीय लोग मानसून में मांसाहार, नहीं करते हैं। उनका मानना है कि ये जानवरों का ब्रीडिंग सीज़न है। बारिश ज्यादा होने से कटहल आदि सब्ज़ियाँ खूब होती हैं। वे इनसे काम चलाते हैं। यह पर्व दुनियाभर में रहने वाले तेलुगु भाषियों द्वारा धूमधाम से मनाया जाता है। यह एकादशी विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ यात्रा के बाद आती है। जो किसान समुदाय के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि वे इस दिन पहली बारिश के बाद बीज बोना शुरु करते हैं। इस दिन भव्य भोज का आयोजन किया जाता है। 26 जुलाई से हिमाचल के चंबा जिले में सावन की रिमझिम  फुहारों के बीच में मिंजर मेले का आयोजन किया जाता है। सात दिन तक चलने वाले इस मेले में लगता है, जैसे पुराने ज़माने में आ गए हों। महिलाएं पुरुष पारंपरिक पोशाकों में अपने लोक नृत्य करते हैं। फसल उत्सव है। गेहूँ, धान, मक्की और जौ की बालियों को स्थानीय भाषा में मिंजर कहते हैं। इस मेले में सबसे पहले भगवान लक्ष्मीनारायण को मिंजर अर्पित की जाती है। उसके बाद अखंड चंडी महल में भगवान रघुवीर को इसे चढ़ाया जाता है। ऐतिहासिक चौगान में ध्वज चढ़ाने के बाद मिंजर का आगाज होता है। आजकल जरी गोटे से मिंजर बना कर कमीज के बटन पर टांगते हैं। जिसे दो हफ्ते के बाद रावी नदी में प्रवाहित कर देते हैं। इस मेले में पूरे हिमाचल की बहुरंगी संस्कृति देखने को मिलती है।

   26 जुलाई को राष्ट्रीय आम दिवस(जुलाई में चौथा गुरुवार) के रूप में मनाया जाता है। केरल में कन्नूर जिले के कन्नपुरम को ’स्वदेशी मैंगो हेरिटेज एरिया’ घोषित किया गया है। इस पंचायत विस्तार में यहां आम की 200 से अधिक किस्में उगाई जाती हैं। जिनके बारे में तरह तरह की कहानियां भी प्रचलित हैं। आम तो हमारे लोकगीतों और धार्मिक समारोहों से अटूट रूप से जुड़ा है।कुछ समय मुम्बई में रही जब भी किसी धार्मिक आयोजन के लिए पूजा की सामग्री खरीदने के लिए गई तो वहीं आम की लकड़ी के साथ तोरण के लिए आम के पत्ते भी मिलें।

  विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस 28 जुलाई को मनाया जाता है। प्राकृतिक संसाधनों के बहुत अधिक दोहन के कारण पर्यावरण को बनाए रखने की जरुरत बहुत अधिक हो गई हैं। जिसके कारण दुनिया भर में अजीबोगरीब मौसम का बदलाव हो रहा हैं। इसलिए इसका उद्देश्य दुनिया को स्वस्थ रखने के लिए पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करने की आवश्यकता के बारे में जागरूकता पैदा करना है। 
गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई को भारत, नेपाल और भूटान में हिन्दूओं और बौद्धों द्वारा अपने गुरुओं को कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। यह आध्यात्मिक और अकादमिक गुरुजनों को समर्पित परम्परा है। आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को खास माना जाता है। इस दिन गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। जीवन में गुरू का बहुत महत्व है। तुलसीदास जी रामचरित मानस में लिखते हैं
गुरू बिन भवनिधि तरे न कोई,
जो बिरंचि संकर सम होई।।
अर्थात कोई स्वयं ब्रह्मा, विष्णु, शंकर के समान ही क्यों न बन जाए। बिना गुरू के उद्धार नहीं हो सकता। यही कारण है कि पूर्णावतार श्री राम, कृष्ण ने भी गुरू बनाए थे। अतः ऐसे गुरू की तलाश में रहना चाहिए जो हमारे अवगुणों को दूर करने में हमारी मदद करे। इस दिन अपने गुरू को यथासम्भव दक्षिणा देते हैं। सेवा आदि से उन्हें प्रसन्न करते हैं। इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं। गुरु वेदव्यास ने वेदों को लिखा, जिसे ब्रह्मा ने पढ़ा। उन्होंने पुराण भी लिखे। यह भी माना जाता है कि उन्होंने इस दिन ब्रह्म सूत्रों को पूरा किया। उनके जन्म दिन पर उसी दिन से एक दिन गुरुओं को समर्पित है। गुरु या शिक्षक वह होता है जो हमारे जीवन में मार्गदर्शक की तरह काम करता है। आध्यात्मिक गुरुओं और शिक्षकों को सम्मान देने का यह पवित्र दिन दक्षिण भारत के विभिन्न आश्रमों और मंदिरों में बहुत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।  जो इस दिन गुरु के पास नहीं जा सकते, वे अपने घर में ही गुरु की पूजा करते हैं। 30 जुलाई से श्रावण मास शुरू है। इसमें भगवान शंकर की पूजा का विशेष महत्व है। सावन में धरती हरियाली से ढक जाती है। नई बहू को पहले सावन में मैके भेज दिया जाता है। रिवाज़ है कि शादी के बाद, पहला सावन सास बहू इक्ट्ठे नहीं रहतीं हैं। दक्षिण भारत में पहला आषाढ़ सास बहू एक साथ नहीं रहतीं हैं। हमारे लोकगीतों में भी हरियाली, सावन के झूले, रिमझिम वर्षा की फुहारों में झूलती गाती सखियां होती हैं। पहले छोटी आयु में बेटियों की शादी हो जाती थी। वह पहला सावन पुरानी सखियों के साथ मना जातीं हैं।
 हमारे उत्सव हमें बताते हैं कि प्रकृति का महत्व हमारे जीवन के हर रंग में है। एक व्यक्ति एक पेड़ के संकल्प पर काम करना होगा। नष्ट हुए पेड़ की जगह दूसरा पेड़ लगाना है और उसका संरक्षण करना है। वर्षा का जल संचयन करने के लिए सबको युद्ध स्तर पर काम करना है क्योंकि जल ही जीवन है।
नीलम भागी ( पत्रकार, लेखिका,ब्लॉगर, ट्रैवलर )
 यह लेख प्रेरणा शोध संस्थान नोएडा द्वारा प्रकाशित प्रेरणा विचार पत्रिका के जुलाई अंक में प्रकाशित हुआ है।






Monday, 29 June 2026

रोज़मेरी मच्छर भगाएं Repel mosquitoes with rosemary. Neelam Bhagi नीलम भागी

 


ये सुई जैसी पत्तियों वाला 2-3 फुट की झाड़ी वाला खुशबूदार पौधा है। इसकी पत्ती मसलो तो हाथ महक जाएगा। इसके फूल हल्के नीले-बैंगनी, बहुत छोटे होते हैं। इन पर मधुमक्खी बहुत आती है।

आलू, चिकन, मटन, ब्रेड, फोकैचिया में 1 टहनी डाल दो, टेस्ट 10x बढ़ जाएगा। इटैलियन खाने की यह जान है

गमले में लगा दो तो मच्छर, मक्खी दूर रहते हैं। एंटी-बैक्टीरियल भी है।

यह ज्यादा देखभाल नहीं मांगता, बस पानी फालतू नहीं चाहिए। दिन की 6-8 घंटे तेज धूप चाहिए। इसके लिए बालकोनी और छत बेस्ट है। लॉस एंजेलिस में मैंने देखा यहां घरों के बाहर बाउंड्री नहीं होती लेकिन कई जगह रोज मेरी खूब लगी हुई है। उत्कर्षनी कई बार इसका गमला खरीद के लाई पर इसका पौधा नहीं चला। कारण इसको ज्यादा पानी नहीं देना, दित्या सब पौधों में पानी लगा देखकर, इसको ऊपर से सूखा देखकर, इसमें ज्यादा पानी दे देती। जब ऊपर की 1 इंच मिट्टी सूख जाए तभी पानी देते हैं। यह कटिंग से भी लगता है। उत्कर्षनी जैसे ही नया गमला खरीद कर लाई। मैंने उसमें से काट के नीचे के पत्ते उतार कर टहनी को पानी में रख दिया। 15 दिन बाद जड़ आ गई तो उन्हें दूसरे गमले में लगा दिया। मिट्टी 50% मिट्टी + 30% रेत + 20% गोबर खाद मिट्टी को भुरभुरी रखो। एक बार लगा लो तो 10-15 साल चलता है। किचन + मेडिसिन + गार्डन तीनों का राजा है। ऊपर से 4-5 इंच की टहनी काटते रहो। जितना काटोगे, उतना घना होगा।

Sunday, 28 June 2026

ऑटोमेटिक कार की धुलाई Automatic car wash Neelam Bhagi Migration to America नीलम भागी अमेरिका प्रवास

 


अमेरिका में धूल मिट्टी तो होती नहीं है इसलिए गाड़ी साफ़ रहती है। पर कभी-कभी धुलवाते हैं। हम Castaic Lake State Recreation Area लॉस एंजेलिस में गए। 15 डॉलर प्रति गाड़ी पार्किंग थी। पार्किंग एरिया में चारों ओर पेड़ भी थे । राजीव जी ने पेड़ के नीचे गाड़ी खड़ी की थी। शाम को जब गाड़ी में बैठे तो उसकी छत पर पक्षियों की बिठें सूख गई थी। अगले दिन दित्या को स्कूल छोड़ने के बाद गाड़ी वॉश के लिए  गए। उत्कर्षनी का फोन आया, " ब्रेकफास्ट तैयार है उसकी मीटिंग है हम खुद ले ले।" मैंने सोचा कि पता नहीं कितनी देर लगेगी। उसे बताया कार वॉश के लिए गए हैं। उसने जवाब दिया कि 10  मिनट में ऑटोमेटिक धुलाई होती है। सच में 10 मिनट लगे। कोई विशेष निशान होता है तब उस पर थोड़ा सा मैन्युअल काम कर देते हैं। रगड़ कर साफ कर लेते हैं। कुछ कमी रह गई हो तो आखिर में ऊपर कपड़ा मार दिया जाता है। मतलब आपको गाड़ी एकदम लक-दक करती मिलेगी। नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके आप भी देखिए।

https://www.instagram.com/reel/DaGYDptSttw/?igsh=MWNxazUwZ3ZxMXVxcA==

Friday, 26 June 2026

हरी घास पर चलना! Walking on green grass! Neelam Bhagi Migration to America नीलम भागी अमेरिका प्रवास

 


लॉस एंजेलिस में जहां भी खाली जगह देखी फुटपाथ आदि पर वहां कालीन की तरह घास देखने को मिलती है। मैंने उत्कर्षनी से कहा कि घास पर नंगे पांव चलने से आंखों की रोशनी अच्छी होती है और चश्मा भी उतर जाता है, ऐसा मैं बचपन से सुनती आई हूं। उसने जवाब दिया, " यहां किसी को अापने घास पर चलते हुए देखा है! नहीं न! यहां हरी भरी घास देखकर ही आंखों को सुकून मिलता है। हरियाली देखकर मन ताज़गी से भर जाता है। अमेरिका प्रवास में देखा वहां कोई भी घास पर नहीं चलता। अगर कहीं भी फुटपाथ के पास कुछ मिनट के लिए गाड़ी पार्क की है और किसी को सोसाइटी में जाना है तो फुटपाथ की घास के बीच में कंक्रीट या पत्थरों से जाने के लिए रास्ता बनाया होता है। जिस पर आपके कदम आएंगे और आसपास की घास पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। क्योंकि कोई भी घास को नहीं रोंधता। फुटपाथ पर जो पेड़ भी लगे हैं, उसके चारों ओर, कम से कम 1 मी का घेरा थोड़ा सा नीचे है बाकी घास तो है ही। लोगों को मैंने घास को रोंधते हुए, जाते नहीं देखा है। किसी को टोकने की जरूरत भी नहीं पड़ती है। बारिश आती है, यहीं पर पानी समा जाता है इसलिए जल भराव कहीं नहीं देखा। बरसात आने वाली है। देखो हमारा वर्षा का जल नालियों में व्यर्थ जाता है या भूजल स्तर पर प्रभाव डालता है।

https://www.instagram.com/reel/DaEhyjxy7Ud/?igsh=bnNuMDFpOTFvbnEz






Thursday, 25 June 2026

नए शरबत का ईजाद , पंजाबी विकास मंच द्वारा Invention of a new sherbet by the Punjabi Vikas Manch. Neelam Bhagi नीलम भागी

 

मेरे दिमाग में हमेशा एक प्रश्न उठ खड़ा होता था कि देश दुनिया में बहुत बड़े-बड़े आविष्कार हुए हैं। हमारे देश में भी कुछ कम नहीं हुए। हम भारतीयों ने अपनी प्रतिभा का उपयोग तरह-तरह की मिठाइयां, नमकीन और शरबत बनाने में किया है, जिसमें हम अव्वल हैं। जितने साल में दिन होते हैं, उतने ही हमारे यहां व्यंजन है। अब देखिए न पंजाबी विकास मंच द्वारा निर्जला एकादशी और गुरु अर्जन देव जी के शहीदी दिवस पर शरबत की छबील लगाई जाती है। मेंबर खूब सेवा देते हैं। ऐसे में सविता अरोड़ा जिस समय आती हैं, उनके हाथ में एक टैप डिस्पेंसर आम के पन्ने का भरा होता है, साथ में वह ढेर सारे नींबू और अपने हाथ से बनाया शिकंजी मसाला लेकर आती हैं। मीठे शरबत को पीने और बरताने से मेंबर अघाय होते हैं। भीषण गर्मी में जिस प्रकार राहगीरों को छबील से ठंडा मीठा शरबत पीकर आनंद मिलता है। उसी प्रकार सविता जी का बनाया आम का पना पीकर मेंबरों में और एनर्जी आ जाती है। यह पना जल्दी खत्म हो जाता है फिर सविता जी शिकंजी बनाना शुरू करती हैं। इस बार सामूहिक सलाह से एक नया पेय पदार्थ बन गया। पढ़ने के बाद पाठक इसका नाम रखें। संजीव पुरी ने नींबू निचोड़े, संजय खत्री ने चीनी घोली, सविता जी के निर्देशन में, उन्होंने शिकंजी मसाला मिलाया। जैसे ही सविता जी ने कहा, " शिकंजी तैयार है।" दीपक विज बोले, "इसमें शरबते रूह अफजा( कई तरह के शरबत थे जो जुबां पर चढ़ा वही बोला) मिलाओ। सविता जी दलीलें  दे रहीं कि  शिकंजी में कौन शरबत डालता है भला! असी ता कदि नई सुनिया। आज तक कदी नहीं पाया। लो करलो गल! कुछ महिलाएं हंस रही, कुछ कह नहीं डालो क्योंकि शिकंजी तो ऐसी ही बनती है। पंजाबी विकास मंच में सबको बोलने की छूट है। इस पर  फिर डिबेट चली। मैंने कहा" कुछ नया करने में क्या हर्ज है! करके देख लो। फिर दीपक जी के कहने पर संजीव पुरी ने शरबत की बोतल शिकंजी में पलट दी तो गुरिंदर बंसल जी ने घोल दिया। संजय खत्री ने मुझे स्वाद चखने को दिया। एक ही शरबत में मीठा, नमकीन, खट्टा गज़ब का बैलेंस था। इस प्रकार इस छबील में एक नए लाजवाब स्वाद का शरबत ईजाद हुआ। 😄

https://www.instagram.com/reel/DaAt1JeAUSS/?igsh=MXVvemdjaGV5bzM4Ng==

https://www.instagram.com/reel/DZ0CZEUAtvH/?igsh=MW5mdnI5cDh3N2FybA== 




Wednesday, 24 June 2026

हंटिंगटन जापानी गार्डन "The Huntington Japanese Garden San Marina California Neelam Bhagi Migration to America नीलम भागी अमेरिका प्रवास



चाइनीस गार्डन के रेस्टोरेंट में खाने का आर्डर दिया हुआ था। राजीव जी दिखाई नहीं दिए, थोड़ी देर में आए आते ही बोले, "अरे! जैपनीज गार्डन इतना खूबसूरत वहाँ उतनी ही लाजवाब खुशबू  है।" अब बैठकर खाने में समय खराब लगने लगा इसलिए ऑर्डर लिया। और हमने जापानी गार्डन में चलते चलते ही खाया और गीता दित्या को खिला रहे थे । पानी में रंग बिरंगी मछलियां देखते ही, दोनों  खाना भूल कर भाग गयीं। आप भी नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके देखें. उत्कर्षनी बोली, " दित्या को पकड़ो नहीं तो मछलियों के पीछे पानी में कूद जाएगी।" हंटिंगटन जापानी गार्डन, ये अमेरिका का सबसे खूबसूरत जापानी बगीचों में से एक है।

  यहां की खुशबू,  शांति/Zen वाइब!! सबसे शांत और zen एरिया माना जाता है। भीड़ भी कम रहती है।

तालाब + पुल, जापानी स्टाइल के ब्रिज, छोटी बिल्डिंग, तालाब देखने लायक हैं। फोटो के लिए बेस्ट जगह है।

बोनसाई कलेक्शन लाजवाब है।"Amazing world of Bonsai"  बोनसाई  का असाधारण कलेक्शन है। यहां सैकड़ों साल पुराने बोनसाई रखे हैं। ये "The Huntington Library, Art Museum and Botanical Gardens" Ginza Dr, San Marino, CA 91108, USA का हिस्सा है। Huntington 120 एकड़ में है जिसमें से  49 हेक्टेयर गार्डन हैं। इसमें Japanese Garden,  इसे Henry E. Huntington ने 1919 में बनवाया था। ये सिर्फ बगीचा नहीं, "collections-based research and educational institution" है। यहां जापानी कल्चर, बोनसाई की कला, साइंस दोनों दिखती है। शांति, बोनसाई, तालाब - एकदम क्योटो वाली फील।  यह Pasadena के पास है, पर तकनीकी रूप से San Marino शहर में पड़ता है।  

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Tuesday, 23 June 2026

' ब्लड' चुकंदर किचन गार्डन में शोपीस जैसा लगता है 'Blood beetroot looks like a showpiece in the kitchen garden. Neelam Bhagi Migration to America

ये गहरे लाल-बैंगनी रंग के पौधे ' ब्लड' (Blood) beetroot चुकन्दर नाम की एक पारंपरिक चुकंदर (Beetroot) की किस्म हैं। हम इसे 'लाल पत्ता चुकंदर' कहते हैं।  इसके गहरे लाल-बैंगनी रंग के पत्ते और डंठल होते हैं। यह पौधा सीधा बढ़ता है।

इसके पत्तों का उपयोग मुख्य रूप से सलाद में 'बेबी लीफ' या 'स्प्रिंग मिक्स' के तौर पर किया जाता है। ये पत्ते न केवल दिखने में आकर्षक होते हैं बल्कि खाने में भी स्वादिष्ट होते हैं। '' लाल पत्ता चुकंदर"  ठंडे मौसम में अपना सबसे बेहतरीन गहरा रंग प्रदर्शित करता है।

चुकंदर के ये पत्ते विटामिन A से भरपूर होते हैं, जो आँखों की सेहत और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक माने जाते हैं।

ये चुकंदर की सबसे डार्क, सबसे "शाही" वैरायटी है।

पत्ते भी गहरे लाल-जामुनी और सलाद में यूज होते हैं। पत्ता मीठा, कम मिट्टी वाला फ्लेवर, कच्चा खाने में बेस्ट  होता है। इसका साइज टेनिस की बाल जितना होता है।

उगाने का तरीका चुकंदर जैसा है। नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके देख सकते हैं। छोटा साइज होने के कारण 6 इंच के गमले में उग जाता है और माइक्रो ग्रीन 20 दिन में तैयार हो जाते हैं। इसे सैंडविच में डाल सकते हैं। बड़े पत्ते स्मूदी, जूस, सूप में डालने से गहरा लाल रंग आ जाता है। "Beetroot Latte" इसी से बनती है। विटामिन A, K  से भरपूर यह पौधा सितंबर अक्टूबर में  उगाना बेस्ट है क्योंकि यह सर्दी सह लेता है। कम जगह घेरने के कारण उत्कर्षनी ने गमले में लगा रखा है हरे पत्तों के बीच में लाल पत्ते बहुत सुंदर लगते हैं।

https://neelambhagi.blogspot.com/2020/11/beetroot-neelamm-bhagi.html

Monday, 22 June 2026

तारीफ़ तो होनी ही चाहिए न! It certainly deserves praise, doesn't it? पंजाबी विकास मंच नोएडा Neelam Bhagi

 


मैंने कई बार देखा है जब भी छबील लगाई जाती है तो कहीं-कहीं स्टील या प्लास्टिक के गिलास होते हैं। पिलाने वालों में बड़ा जोश होता है। वह सड़क पर लोगों को रोक कर शरबत पिलाते हैं और फुर्ती से शरबत से ही गिलास धो देते हैं और अगले व्यक्ति को पिलाते हैं, जिससे सड़क पर कीमती शरबत का अगर गड्ढा हो तो छोटा सा तालाब बन सकता है। पर गर्मी अधिक होने के कारण सड़क गीली ही रहती है। ऐसे में छबील के बाद गिलासों के ढेर तो नहीं नज़र आते पर शरबत बहुत बर्बाद होता है। पंजाबी विकास मंच द्वारा लगाई छबील के बाद कभी एक गिलास भी सड़क पर दिखाई नहीं देता है। कागज के गिलास होते हैं, जिन्हें अलग इकट्ठा किया जाता है। डस्टबिन के होते हुए भी कुछ लोग गिलास सड़क पर फेंकते हैं। जिन्हें बाद में इकट्ठा कर लिया जाता है। जो कूड़े वाले खुशी से रिसायकल के लिए ले जाते हैं। छबील बहुत व्यस्त जगह पर लगती है। किसी का समय खराब न हो इसलिए काउंटर बहुत बड़ा लगाया जाता है और पिलाने वाले भी पंजाबी विकास मंच के बहुत मेंबर होते हैं। जो लोग अपनी सवारी से नहीं उतरते हैं उन्हें वहां जाकर पिलाया जाता है। सबसे अच्छी बात मुझे यह लगी है कि आजकल ज्यादातर लोगों के पास पानी की बोतल रहती है , उन लोगों ने गिलास इस्तेमाल नहीं किया। अपनी बोतल में पिया और फिर बोतल भरवाली। बोतल भरने के लिए फनल कीप रखी हुई थी, जिससे शरबत गिरा नहीं और सबसे अच्छी बात मुझे यह लगी 20 लीटर के जार tap despenser रखे थे जिससे लोग लगातार शरबत से बोतल भर रहे थे।

 यहां सेवा कम करनी पड़ रही थी, बाल्टी से जार भरना होता था। जो शरबत बरताने की सेवा करते हुए थक जाते थे, वह थोड़ा रेस्ट करते और दूसरे लोग सेवा देते इसलिए लगातार सेवा चल रही थी किसी को इंतजार करना नहीं पड़ रहा था। 👍

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Sunday, 21 June 2026

बच्चों के हीरो कौन! Who are the heroes for children! Neelam Bhagi Migration to America नीलम भागी अमेरिका प्रवास

 


गीता स्विमिंग की प्रैक्टिस से आई और आते ही बोली, " पापा हमारी क्रिसमस की छुट्टियों से पहले स्विमिंग क्लास में पार्टी है। जिसमें पेरेंट्स का भी कंपटीशन होगा। मैंने आपका नाम लिखवा दिया है। उसने पापा से पूछने की तो जरूरत ही नहीं समझी! क्योंकि बच्चों के लिए उनके पापा हीरो होते हैं जो सब कुछ कर सकते हैं। बेटी की बात सुनते ही राजीव जी बोले, " गीता मैं स्विमिंग जानता हूं पर प्रतियोगिता वगैरा तो मैंने कभी की नहीं। जैसे और लोग जानते हैं वैसे मैं जानता हूं। अब बेटी ने कहा तो तैरना तो पड़ेगा।" गीता काँस्य पदक ले चुकी है अब सिल्वर मेडल की तैयारी के लिए शाम को 2 घंटा प्रेक्टिस करने जाती है। उस दिन प्रैक्टिस के बाद पेरेंट्स का मुकाबला होगा और पार्टी। उत्कर्षनी को स्विमिंग नहीं आती वो बच गई। सर्दी में ओपन पूल में शाम को गीता का प्रेक्टिस करना, मुझे ही पानी में उतरे बिना कपकपा देता है। पर हम जब गीता को लेने जाते हैं तो इतने तैराक बच्चों को आते जाते देखकर, मेरा मन शांत हो जाता है। यह सोचकर कि इसीलिए अमेरिका ओलंपियाड में सबसे ज्यादा मैडल लेता है। सर्दी में जब गीता प्रैक्टिस के बाद गाड़ी में बैठती है तो उसने गर्म गाउन पहना होता है और गाड़ी में हीटर चला दिया जाता है। लेकिन उस दिन अपनी स्विमिंग करके गीले स्विम सूट के ऊपर गर्म गाउन ही पहन कर बाल भी गीले, लॉस एंजेलिस में खूब हवा चलती है दिसंबर में तो और भी ठंडी। गीता और दित्या अपने पापा की लेन के सामने खड़ी हो गयीं। जैसे ही प्रतियोगिता शुरू हुई राजीव जी पानी में तेज तेज हाथ चला रहे थे। गीता दित्या उन्हें उत्साहित करने के लिए हाथ भी चल रही थी बाहर खड़ी और शोर भी मचा रही थीं। प्रतियोगिता खत्म होने पर चेंज करके राजीव जी आए। मैंने राजीव जी से पूछा, " पानी गर्म होता है? " वे बोले, " नहीं। पानी में उतर कर पता चला कि गीता ठंडे पानी में और ओपन पूल में प्रैक्टिस करती है।" बेटी ने कहा तो लॉस एंजेलिस में 12 महीने गर्म पानी से शॉवर लेने वाले पापा ने तुरंत उसकी बात मान ली और तैराकी प्रतियोगिता में उतर गए। हैप्पी फादर डे 😄   



Saturday, 20 June 2026

पंजाबी विकास मंच द्वारा निर्जला एकादशी और गुरू अर्जुन देव जी का शहीदी दिवस श्रद्धापूर्वक मनाया गया Nirjala Ekadashi and the Martyrdom Day of Guru Arjan Dev Ji were observed with reverence by the Punjabi Vikas Manch.

 


*'Unity, Strength and  Pawer * जय माता  दी।

सत श्री अकाल ।।

पंजाबी विकास मंच ने आज 20/06/2026 को  निर्जला एकादशी और गुरू अर्जुन देव जी का शहीदी दिवस श्रद्धापूर्वक मनाया।

   हिंदू धर्म में 24 एकादशियों का बहुत महत्व है। ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहते हैं। इसकी कथा में हिंदू धर्म की बहुत बड़ी विशेषता है कि वह सबको धारण ही नहीं करता है, सबके योग्य नियमों की लचीली व्यवस्था भी करता है। महर्षि वेदव्यास ने पाडंवों को एकादशी व्रत का संकल्प कराया तो भीम ने कहा,’’पितामह इसमें  प्रति पक्ष एक दिन के उपवास की बात कही है। पर मैं तो एक समय भी भोजन के बगैर नहीं रह सकता। मेरे पेट में ’वृक’ नाम की जो अग्नि है उसे शांत रखने के लिए मुझे कई लोगों के बराबर और कई बार भोजन करना पड़ता है। क्या अपनी उस भूख के कारण मैं एकादशी जैसे पुण्य व्रत से वंचित रह जाऊंगा?’’ यह सुनते ही महर्षि ने भीम का मनोबल बढ़ाते हुए कहा,’’आप ज्येष्ठ मास की निर्जला नाम की एकादशी का व्रत करो। तुम्हें वर्ष भर की एकादशियों का फल मिलेगा।’’ इस एकादशी पर ठंडे र्शबत की जगह जगह छबीलें लगाई जातीं हैं। जिसे पीकर भीषण गर्मी में राहगीरों को बड़ी राहत मिलती है। स्वयं निर्जल रह कर जरुरतमंद या ब्राह्मणों को दान दिया जाता है।

     सिख समुदाय में गुरु परंपरा के पाँचवें गुरु अर्जुन देव का शहीदी दिवस उनकी शहादत को याद करने के लिए मनाते हैं। गुरु अर्जुन देव जी सिख धर्म के पहले शहीद हैं। इन्होंने धर्म के लिए अपनी शहादत दी। इनके शहीदी दिवस पर जगह जगह ठंडे र्शबत की छबीलें लगाई जाती हैं। गुरु जी ने सिखों को अपनी कमाई का दसवां हिस्सा धार्मिक और सामाजिक कार्यों में लगाने के लिए प्रेरित किया।

  आज 20जून 2026, को निर्जला एकादशी और गुरू अर्जुन देव जी के शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में सेक्टर 55 की बाहरी मेन रोड पर, सेक्टर 22 नौएडा के सामने 11 बजे से दोपहर 2.30 तक पंजाबी विकास मंच द्वारा ठंडे शरबत की छबील का आयोजन किया गया। यह विशाल कार्यक्रम इकोफ्रैंडली था। कागज के गिलासों का उपयोग किया गया। डस्टबिन की व्यवस्था थी। छबील का उद्घाटन दीपकविग, जे॰एम॰ सेठ, एस पी कालरा,जी के बंसल, संजीव पूरी ओर हरीश सभरवाल ने रिबन काट कर किया।  इस पावन पर्व पर , दीपक विग,जी.के. बंसल, संजीव पुरी,जे ऐम सेठ,ओ पी गोयल,ऐस पी कालरा,अमरदीपशाह, हरीश सबरवाल,, सुनील वाधवा,वंदना बसंल, अलका सूद, सविता अरोड़ा, नीलम भागी, अंजना भागी, प्रभा जयरथ , ऋतु दुग्गल,एस॰एस॰सचदेवा , सरोज भाटिया,संजय खत्री,अजय साहनी, सुमीत कोहली,अमरजीत कौर , शरण चौहान,योगीराज,आर के भट्ट,लक्ष्मी नारायण मंदिर महिला मंडल की सदस्यों निर्मल हांडा, मंजू सेठ आदि ने बढ़चढ़ कर भाग लिया। इस कार्यक्रम में पंजाबी विकास मंच के समस्त सदस्यों का योगदान सराहनीय रहा।

प्रेषक.....

दीपक विग (चेयरमैन -  पंजाबी विकास मंच)8130365436

जीके बंसल (अध्यक्ष - पंजाबी विकास मंच)।                   जे ऐम सेठ ( सरंक्षक व मीडिया प्रभारी )

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Thursday, 18 June 2026

कंक्रीट के ऊंचे घेरे (tree guard) के अंदर लगा पेड़ A tree planted inside a tall concrete tree guard. Neelam Bhagi

 


एक पेड़ को, जिसे कंक्रीट के ऊंचे घेरे (tree guard) के अंदर लगाया गया है। यह सीमेंटेड ढांचा अक्सर फुटपाथों पर पेड़ों को सुरक्षा देने और मिट्टी को बहने से रोकने के लिए ऐसा बनाया जाता है।

घेरे के अंदर कूड़ा-कचरा जैसे प्लास्टिक के रैपर और बोतलें कुछ लोग डाल देते हैं। जोकि डस्टबिन में डालने चाहिए।

कंक्रीट का यह घेरा कई बार पेड़ के तने के काफी करीब होता है। अगर पेड़ के बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह न छोड़ी जाए, तो इससे उसकी जड़ों और विकास को नुकसान पहुँच सकता है। इस घेरे में अगर नाली बना दी जाए तो बरसात का पानी, इस घेरे में जाकर जमीन में समा जाएगा न कि उसके आसपास जमा होकर कीचड़ में तब्दील होगा।

https://www.instagram.com/reel/C5ynkasPv3U/?igsh=MWM2Ymo3b3c3OHYzZA==



Wednesday, 17 June 2026

अनोखे वर्टिकल गार्डन का आईडिया Unique vertical garden idea Neelam Bhagi Migration to America नीलम भागी अमेरिका प्रवास

 


लॉस एंजेलिस में एक स्टोर की बाउंड्री वॉल पर वर्टिकल गार्डन दिखा। जो देखने पर एकदम आकर्षित करता है लेकिन बनाने में बहुत सिंपल है पर बहुत सुंदर! बाउंड्री वाल की जो सीधी ग्रिल है, उसमें लकड़ी के फट्टों से बॉक्स बनाये हुए हैं। उनके अंदर पॉटिंग मिक्स भरा हुआ है। उसमें लगने वाली ऐसी जरूरी चीजे हैं, जिनकी सब्जियों, सॉस, सूप आदि में  जरूरत पड़ती है। देख कर मन खुश होता है और जिसके लिए एकदम बाजार नहीं जाना पड़ेगा। कई तरह की हर्ब्स हैं। मसलन तरह-तरह के मिंट पोदीना, रोजमेरी टमाटर, चेरी टोमाटो, शिमला मिर्च, सलाद पत्ता आदि। जो वहां के खाने में इस्तेमाल होती हैं। जिसने भी उसे बनाया है, बहुत सुंदर आईडिया दिया है। पौधों को सहारा देने के लिए सीधी सिंपल ग्रिल के रॉड है। मैंने तस्वीर ले ली है और आपके साथ शेयर कर रही हूं। जो भी वहां गाड़ी पार्क करता है, उसका वहां पर ध्यान जरूर जाता है। उसको देख कर उत्कर्षनी ने अपने घर में काफी हिस्से में वर्टिकल गार्डन कर लिया है। जबकि उसके घर में बाउंड्री वॉल नहीं है 😃 उसे भी आपके साथ शेयर करूंगी।