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Friday, 22 May 2026

सागर तट वेनिस बीच लॉस एंजेलिस Venice Beach, Los Angeles California Neelam Bhagi Migration to America नीलम भागी

 


उत्कर्षनी किनारे पर ही खड़ी होकर लहरों का आनंद उठा रही है क्योंकि दित्या पास में ही गीली रेत से  बैठी खेल रही है । अब मैं उसके पास लहरों को छुती हुई, किनारे किनारे गीली रेत पर चलती हुई जा रही हूं।  इस पर चलना आसान है । उसने मुझे कुछ सीपियाँ दी जो मैं लेकर, जाकर अपनी कुर्सी पर बैठ गई और सागर तट का आनंद उठाने लगी। वेनिस बीच लॉस एंजेलिस, कैलिफ़ोर्निया का सबसे रंगीन और अजीबोगरीब बीच है। इसे "LA का बोर्डवॉक सर्कस" भी कहते हैं। 2.5 मील लंबा पैदल रास्ता, जहाँ स्ट्रीट परफॉर्मर्स, टैटू आर्टिस्ट, वेंडर्स, स्केटर्स और अजीबो-गरीब कैरेक्टर्स हर वक्त मिलते हैं। म्यूजिशियन ड्रम बजाते हैं, पेंटर 10 मिनट में तुम्हारा पोर्ट्रेट बना देते हैं, और सूर्य स्नान के लिए  लोग रेत पर उल्टे लेटे रहते हैं। आउटडोर जिम जहाँ बॉडीबिल्डर्स वर्कआउट करते हैं। अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर 80s में यहाँ ट्रेनिंग करता था। अब भी यहाँ जिम इक्विपमेंट फ्री है और माहौल एकदम मोटिवेशनल रहता है। वेनिस कैनाल्स फोटो खींचने के लिए बेस्ट स्पॉट है ।

  बोर्डवॉक के ठीक किनारे पर फ्री स्केट पार्क है। प्रो स्केटर्स यहाँ ट्रिक्स करते हैं और देखने वालों की भीड़ लग जाती है। 

वेनिस बीच लॉस एंजेलिस का सबसे "अनफिल्टर्ड" हिस्सा है। हिप्पी कल्चर, आर्ट, फ्रीडम और थोड़ी अराजकता सब एक साथ देखने को मिलता है। सुबह शांत रहता है, दोपहर बाद से भीड़ और एनर्जी दोनों बढ़ जाती हैं। इतनी खूबसूरत जगह से गीता, दित्या को लाना बहुत मुश्किल काम है। सर्दी है तब भी  बच्चों को आइसक्रीम का लालच देकर, लेकर आए। सिर और कपड़ों में रेत भरी हुई है। उत्कर्षनी  उन्हें शॉवर कराने लेकर गई। मैं गाड़ी से कुछ दूर बैठकर लोगों को देखती रही, हम लौटने की तैयारी में हैं और लोग यहां आ रहे हैं। भीड़  बढ़ती ही जा रही है। राजीव जी ने सामान की पैकिंग कर ली। गीता दित्या के आने पर हम लोग चल पड़े।  https://www.instagram.com/reel/DYoXEL1xeGf/?igsh=MWd0Z2JpNWlrMjJkag==

https://www.instagram.com/reel/DYkT9xVgjsJ/?igsh=aGljN3ljNThlY2wy







Wednesday, 20 May 2026

वेनिस फिशिंग पियर, वेनीस बीच , लॉस एंजेलिस Venice Fishing Pier Venice Beach, L A, California Neelam Bhagi Migration to America नीलम भागी

 


मैं टहलती हुई पियर पर जा रही हूँ । किनारा पीछे छूटता जा रहा है और मैं समुद्र के अंदर तक इस पर चलती जा रही हूं। पुराना Venice Amusement Pier अब मौजूद नहीं है।1905 में एबट किनी ने "वेनिस ऑफ अमेरिका" बसाया। और एक बड़ा मनोरंजन पियर बनाया। 1946 में आग लगने से पुराना पियर नष्ट हो गया। 1964 में मौजूदा Venice Fishing Pier सिर्फ मछली पकड़ने के लिए बनाया गया। 1983-1997 तूफान से कई बार टूटा। 1983 में 'अल नीनो' तूफान के कारण इसे भारी नुकसान हुआ था और मरम्मत के बाद 1997 में इसे जनता के लिए फिर से खोला गया। पियर पूरी तरह से सुलभ (accessible) है, जिसमें व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के लिए विशेष स्थान, बेंच, रोशनी और मछली साफ करने वाले स्टेशन बने हुए हैं।

यह पियर पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए एक शांत स्थान है, जहाँ से समुद्र और पास के सर्फिंग स्पॉट्स के बेहतरीन नजारे दिखते हैं।

 ये सिर्फ फिशिंग, टहलने और फोटोग्राफी के लिए है। यहाँ लाइसेंस के बिना मछली पकड़ सकते हो।

यहां से सांता मोनिका पियर, मालीबू की पहाड़ियां और पूरा वेनीस बीच दिखता है। यह सनसेट के लिए बेस्ट पॉइंट है। कुछ दूरी पर ही एयरपोर्ट है इसलिए विमानो का आना जाना खूब दिखता है। रास्ते में कोई अपना छोटा सा माइक लगाकर गा रहा है। कोई वहां बैठा हुआ दिख रहे नज़ारों की पेंटिंग बना रहा है। यहाँ कुछ कुछ दूरी पर पीने के पानी के नल हैं। इसका अंत एक 'कीहोल' की तरह गोल है, जिसका व्यास 120 फीट है। यहां लोग मछली पकड़ने के लिए अपना समुद्र में कांटा सा डालें बैठे हैं। ये पियर प्रशांत महासागर में काफी अंदर तक जाता है, इसलिए यहां से 360° व्यू मिलता है - एक तरफ पूरा वेनीस बीच और सांता मोनिका, दूसरी तरफ खुला समुद्र। काफी समय मैं यहां बिता कर, ऊपर से लहरों को देखते हुए धीरे-धीरे पियर से लौटी। दूर से उत्कर्षनी ने मुझे देखकर हाथ हिलाया। 

https://www.instagram.com/reel/DYkT9xVgjsJ/?igsh=aGljN3ljNThlY2wy






Tuesday, 19 May 2026

वेनिस बीच लॉस एंजेलिस, कैलिफ़ोर्निया Venice Beach, Los Angeles, California Neelam Bhagi Migration to America नीलम भागी

 


जनवरी का महीना है ठंड है पर बीच पर इतनी नहीं है। धूप बहुत अच्छी लग रही है। यहां पर किनारे पर रेत ऊंची नीची है। कहीं-कहीं रेत के टीले भी हैं। उचित जगह देखकर हमने रेत पर चटाई बिछा ली। उस पर गीता दित्या के रेत में खेलने के खिलौने रख दिए और कुर्सियां लगा ली। हम जहां बैठे हैं, उसके बाद निचाई पर रेत कभी-कभी वहाँ पर भी हल्की सी लहर आ जाती जिससे नीचे गीला ही रहता है । उत्कर्षनी बोली, "LA में  वेनिस बीच का कैरेक्टर कहीं और नहीं मिलेगा। समुद्र के पहले एक आर्टिस्टिक, मामूली सा हिप्पी, वेनीस का रफ, क्रिएटिव, फ्री-स्पिरिटेड माहौल शुरू होता है।" यहां मैंने चारों ओर नज़र घुमाई देखा। दूर 'पियर' (Pier) है। गीता तो स्विमर है, वह लहरों में खेलने दूर तक चली गई। राजीव जी उसके पीछे चल दिए। दित्या ने गीली रेत में एक गड्ढा बनाया और अपनी छोटी सी बाल्टी से समुद्र से पानी लाल के उसको भर्ती रही जो कभी भरना नहीं था। उत्कर्षनी दित्या का खेल देखती रही। और मैं ऐतिहासिक वेनिस पियर की ओर चल दी। खेत में चलना बहुत मुश्किल है मैं हाथ में चप्पल पकड़ कर चलती रही। और पहुंच गई। पियर की खासियत यह है कि ये 1300 फीट लंबा, समुद्र में अंदर तक जाता है।

https://www.instagram.com/reel/DYh0NrUSSx9/?igsh=MWVuajQ0NnJidGpoeQ==

https://youtu.be/ZCysBj6Y4F8?si=DRk7Xr8PGTxKfYgN






Monday, 18 May 2026

दाल बाटी चूरमा, अप्पे पैन में बनाना! श्वेता का संडे स्पेशल Making Dal Baati Churma, in Appe pan! Shweta's Sunday Special

 


श्वेता कामकाजी महिला है फिर भी छुट्टी के दिन कुछ न कुछ स्पेशल बनाती हैं। बनाने के साधन भी अपने आप बदल लेती है। मसलन राजस्थानी दाल बाटी चूरमा। बाटी बनाने के लिए न उपले न कोयला। पर बहुत लज़ीज़ बनाया! मैं राजस्थानी थाली की मेकिंग देखती रही और वह बना रही थी। बाटी चूरमा बनाने में थोड़ी मेहनत लगती है पर टेस्ट कमाल का आता है।

बाटी

24 बाटी के लिए गेहूं का आटा 4 कप, सूजी 4 चम्मच

घी 8 चम्मच मोयन के लिए अजवाइन 1 चम्मच, नमक स्वादानुसार।

आटा, सूजी, नमक, अजवाइन और घी मिलाया । हाथ से मसला ताकि मोयन पूरे आटे में लग जाए। थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर सख्त आटा गूंथा और 15 मिनट ढककर रख दिया। फिर इस आटे के छोटे-छोटे गोले बाटी बनाये। बीच में हल्का गड्ढा बनाया ताकि अंदर तक सिके। अप्पे पैन को गैस पर रखा। इसमें अच्छी तरह घी लगाया और इसमें बाटी रख दी। पहले मीडियम फ्लेम पर इसमें बाटी रखी फिर फ्लेम को सिम कर दिया और बाटी पलट दी, इसमें थोड़ा-थोड़ा घी और डाल दिया। आंच बिल्कुल नहीं बढ़ानी , इससे बाटी अंदर तक सिक जाएगी और बहुत अच्छी तरह रोस्ट होगी। बाटी सिकने पर निकाली।


दाल

दाल बनाने के लिए चना दाल 1 कप, मूंग दाल 1/2 कप, उड़द दाल, 1/2 कप, 2 घंटा पहले भिगोकर रख दी थी। बाटी सिक रही थी। उसने तीनों दालें कुकर में, नमक हल्दी डालकर, कुकर बंद करके हाई फ्लेम पर रख दिया जैसे ही अच्छी तरह प्रेशर बना, फ्लेम सिम कर दी। 5 मिनट बाद गैस बंद कर दी और अपने आप कुकर की भाप खत्म होने पर उसे खोला। तड़के के लिए

टमाटर 2, हरी मिर्च 4, अदरक 1 इंच

जीरा 1 चम्मच, हींग चुटकी भर

हल्दी, धनिया पाउडर, लाल मिर्च, गरम मसाला, नमक

घी 3 चम्मच, हरा धनिया

घी गर्म करके जीरा, हींग डाला । बारीक कटा अदरक, हरी मिर्च, टमाटर डालकर भूना। तड़के ने घी छोड़ दिया तो इसमें धनिया पाउडर, लाल मिर्च और गरम मसाला डालकर मिला दिया और दाल में डाला । ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया डाल दिया।

चूरमा

चूरमा बनाने के लिए 6 बाटियां मिक्सर में डालकर दरदरा पीस लिया, बाटी पाउडर को कढ़ाई में डाला और चार-पांच चम्मच अपनी पसंद के अनुसार घी डालकर, लगभग 4 से 5 मिनट तक भूना फिर गैस बंद करके मेवा, इलायची पाउडर, एक कप पीसी चीनी डालकर अच्छी तरह मिला दिया।

पतले लोग गरम बाटी को बीच में तोड़कर ऊपर से घी डालकर खा सकते हैं😃

साथ में दाल, चूरमा, हरी चटनी और प्याज 👍




Sunday, 17 May 2026

वेनिस बीच लॉस एंजेलिस, कैलिफ़ोर्निया की ओर Venice Beach, Los Angeles, California Neelam Bhagi Migration to America नीलम भागी

 


 वीकेंड था इसलिए बहुत भीड़ थी। Venice Canals Historic District का साइन बोर्ड आता है। यहां नहरों के किनारे छोटे घर बने हैं, देखने लायक जगह है। बोर्डवॉक से 2 ब्लॉक अंदर 1905 में बने आर्टिफिशियल कैनाल्स हैं। छोटे पुल, बोट हाउसेस और शांत गलियाँ। ऐसा लगता है जैसे इटली के वेनिस का छोटा वर्जन LA में आ गया हो। ट्रैफिक धीमा होने लगता है। लोग बीच पर पार्किंग ढूंढ रहे होते हैं, तो गाड़ियां स्लो चलती हैं। इस रास्ते पर पैदल चलने वालों की काफी चहल-पहल रहती है। सड़क के दोनों और रेस्टोरेंट हैं और यहाँ फुटपाथ पर बैठने (sidewalk seating) की सुविधा भी है, जहाँ से आप बाहर का नज़ारा देख सकते हैं। यहाँ का माहौल काफी अनौपचारिक और आरामदायक (casual and cozy) है। साइकिल लेन साफ दिखती है। वेनीस में साइकिल और स्केटबोर्ड बहुत चलते हैं।

बाएं तरफ रिहायशी इलाके शुरू हो जाते हैं। रंगीन बंगले, पाम ट्री, और छोटे-छोटे कैफे, बुक स्टोर, आर्ट गैलरी। ये एरिया "Venice Canals" के पास है।

दाएं तरफ समुद्र की हल्की झलक मिलने लगती है। हवा में नमकीन गंध और सर्फ की आवाज आने लगती है।

सड़क पर स्केटर्स, साइकिलिस्ट, कुत्ते घुमाते लोग मिलते हैं। वेनीस का "bohemian" माहौल यहां से शुरू हो जाता है।

1 किमी पहले  समुद्र के पास के एक आर्टिस्टिक, थोड़े हिप्पी वाले माहौल में एंटर कर चुके होते हैं । हवा बदल जाती है, और बोर्डवॉक की आवाजें सुनाई देने लगती हैं।वेनीस का रफ, क्रिएटिव, फ्री-स्पिरिटेड माहौल शुरू होता है। वेनीस की सबसे फेमस शॉपिंग स्ट्रीट आती है। रुक रुक के गाड़ियां चल रही थीं। काफी देर में पार्किंग पर पहुंचे।

वीकेंड पर पार्किंग ढूंढने में हमें 10-15 मिनट लग गए और पार्किंग मिलने पर शुक्र किया। पार्किंग 20 से $40 है। गाड़ी पार्क करके राजीव जी ने फोल्डिंग कुर्सियां और सामान कार्ट में रखा। और हम पानी की ओर चल दिए। उत्कर्षनी ने मुझसे पूछा, "आपने यहां के सभी बीच देख लिए हैं, इस बीच के बारे में क्या कहती हो? "

क्रमशः

https://www.instagram.com/reel/DYcYS3tgD7r/?igsh=dGQyYmJ6dWVlanl3

https://www.instagram.com/reel/DYeMfxjx2Ad/?igsh=bnQ4NjNzNHdocWU=








Saturday, 16 May 2026

प्रकृति-पूजा और पर्यावरण संरक्षण का त्योहार वट सावित्री व्रत Vat Savitri Vrat, a festival of nature worship and environmental protection Neelam Bhagi नीलम भागी

 


आज कुछ लोगों को देखा जो बरगद के पेड़ से टहनियां तोड़कर घर लेकर जा रहे थे क्योंकि आज बट सावित्री का व्रत है। वे पेड़ की टहनी की पूजा कर लेंगे 😄 सौभाग्यवती महिलाएं वट सावित्री व्रत में बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं। बरगद को हिंदू धर्म में "अक्षय वट" कहा जाता है - यानी जो कभी न मरे। बरगद सैकड़ों साल तक जीवित रहता है। इसलिए पति की लंबी आयु की कामना के लिए इसी की पूजा की जाती है। बरगद के नीचे बैठकर कथा की जाती है। पेड़ के चारों ओर सूत लपेटकर 7 या 11 बार परिक्रमा करती हैं। यह संदेश देता है कि पेड़ को बांधो, काटो मत।


प्रकृति से रिश्ता निभाओ। वट सावित्री व्रत और पर्यावरण का संबंध बहुत गहरा है। ये सिर्फ पति की लंबी आयु का व्रत नहीं है , बल्कि  वट वृक्ष की पूजा  सीधे पर्यावरण से जुड़ाव है। पूजा से पेड़ को नुकसान नहीं होता, उल्टा उसका सम्मान बढ़ता है।

पहले हर गांव में बरगद का पेड़ होता था। वट सावित्री के दिन लोग नए बरगद लगाते थे और उसकी देखभाल का संकल्प लेते थे। आज भी कुछ नौकरी वाली महिलाओं को गमले में लगा बरगद का पौधा खरीदते देखा है। बट सावित्री के दिन वे उसकी पूजा करती हैं।


यह त्यौहार पर्यावरण दिवस से पहले एक परंपरागत वृक्षारोपण अभियान जैसा है। सावित्री की कथा में यमराज जंगल में आते हैं। जंगल, नदी, पेड़ सब साक्षी बनते हैं। यानि प्रकृति सिर्फ संसाधन नहीं, वो जीवन की रक्षक है। जैसे सावित्री ने प्रकृति की मदद से पति को बचाया, वैसे ही हम भी प्रकृति की रक्षा करके अपना भविष्य बचा सकते हैं। वट सावित्री धार्मिक व्रत के साथ एक पर्यावरणीय त्योहार भी है। ये हमें सिखाता है कि पेड़ काटने से पहले सोचो।  ये पेड़ हमारी पीढ़ियों की सांस है।

Friday, 15 May 2026

अमेरिकन एयरलाइंस का सराहनीय काम! Great work by American Airlines ! Neelam Bhagi नीलम भागी

 


प्लेन से बाहर आते ही अटेंडेंट अरुण ने मेरा पासपोर्ट और बोर्डिंग पास ले लिया। अब मुझे तो कुछ करना नहीं था। सब फॉर्मेलिटी वगैरहा वह करवाता रहा और हम इमीग्रेशन से बाहर आए। सब कुछ इतनी जल्दी हो गया कि लगेज बेल्ट पर हम सबसे पहले पहुंच गए। जब मेरा लगेज़ आया तो छोटा लगेज़ मेरा डैमेज़ था। जिसे देखकर मेरा मन खराब हो गया। मेरा मूड खराब देखकर और उसको कार्ट पर रखते हुए, वह बोला, "अरे आपका तो लगेज़ डैमेज हो गया। अा पने कंप्लेंट करनी है? मैंने जवाब दिया, "उससे क्या होगा?" मन में सोचने लगी बहुत यात्राएं करती हूँ। कई बार लगेज़ डैमेज हुआ है। उस समय जल्दी में उठा लेती, घर जाकर गुस्सा आता, कुछ समय बाद मेल करती, फोटो भी लगाती। जवाब आता इस तरह कि अब आप लेट हो गए हो। न जाने क्या-क्या याद भी नहीं है। यहां अरुण ने जवाब दिया,"आपको थोड़ी देर में दूसरा मिल जाएगा।" और मुझे शिकायत के काउंटर पर ले गया, वह जिसने अटेंड किया, मुझे नाम नहीं याद आ रहा है। उसने कहा, " 20 से 25 मिनट के बीच में, आपको दूसरा मिल जाएगा और उसने अपना काम शुरू कर दिया। मेरा पासपोर्ट वगैरह लिया, फॉर्म सा भरा। यहां दो-तीन लोग और आए उसने सबको रोक लिया। सबके लिए फॉर्म भरने लगा। कुछ देर में लगेज़ आ गए। हमें कुछ दूर ले जाकर, मुझे मेरे बैग के साइज का वैसा ही काले रंग का लगेज दिया, बस ब्रांड का फर्क था, मेरे में एक गोल्डन सुंदर सा सितारा लगा हुआ था जो इसमें नहीं था। उसने    कहा, " अपना सामान इसमें रखिए और डैमेज लगेज, हमें दीजिए।" मेरे लगेज पर न तो ताला था, न कोई ऐसा वैसा सामान था। अरुण ने ही मेरा बैग बदल दिया। अब मेरा मूड अच्छा हो गया। बाकी लोगों का भी चेहरा खिल गया। अमेरिकन एयरलाइंस की सुखद यात्रा की, अगर उनसे लगेज डैमेज हुआ तो उसी समय दूसरा मिल गया! बाहर अंकुर मेरा इंतजार कर रहा था। अरुण ने मुझे अंकुर को हैंडोवर किया और हम अपने घर चल दिए। 1 मई को रात 12:00 baj मैं अपने घर में थी.    

Thursday, 14 May 2026

न्यूयॉर्क से भारत वापिस Back to India from New York Neelam Bhagi नीलम भागी

 


JFK एयरपोर्ट को मैं हैरानी से देखते हुए और देश दुनिया के लोगों को देखती हुई, अपने बोर्डिंग गेट पर पहुंची। लॉस एंजेलिस से न्यूयॉर्क के समय में भी फर्क है। गेट पर यह देखकर बहुत अच्छा लगा कि लगभग 80% तो भारतीय हैं। अटेंडेंट ने मुझे समझा कर एक सीट पर बिठा दिया और पूछा की बोर्डिंग के समय वह आए। मैंने मना कर दिया। वह मुझे विश करके चला गया। अब मैंने वहां बैठे पैसेंजर पर नज़र डाली, लगभग भारत के सभी राज्यों के भारतीय मुझे लगे। सामने देखा इस तरह से सेटअप था, लोग उस पर बैठे हुए लैपटॉप खोलें, अपना काम कर रहे थे और फ्लाइट का इंतजार भी । केंद्र में बहुत लंबा सोफा जिसमें कोई हत्था नहीं था। किनारे गोल और उसके आसपास भी कुर्सियां रखी था जिस पर तीन महिलाएं सो रही थीं। बीच में इतनी जगह थी कि टांगे से मोड़कर मैं भी लेट सकती हूं और मैं जाकर लेट गई। मेरे सर के पीछे वाली लड़की ने थोड़ी अपनी टांगे मोड़ ली, जिससे मैं भी आराम से लेट गई। सोफे के आसपास भी खूब आरामदायक  कुर्सियां रखी थीं। क्योंकि अगली फ्लाइट बहुत लंबी है सेहत के अनुसार मुझे लेटे रहना चाहिए था। पर लेटे-लेटे सोच रही थी कि दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट पर आई हूं। थोड़ा सा घूम लूं। फिर आकर लेट जाऊंगी और मैं उठकर चल दी।  JFK एयरपोर्टअमेरिका के 35वें राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी के नाम पर जॉन एफ कैनेडी इंटरनेशनल एयरपोर्ट है । यह अमेरिका का सबसे व्यस्त इंटरनेशनल एयरपोर्ट और न्यूयॉर्क का मेन गेटवे है। Terminal 4 सबसे बड़ा इंटरनेशनल टर्मिनल है, यहां से मेरी फ्लाइट है। इंटरनेशनल हब है भारत से Air India, Delta, American Airlines, Emirates, Qatar Airways सीधी फ्लाइट चलाती हैं. मुंबई-दिल्ली से रोज फ्लाइट है। डोमेस्टिक + इंटरनेशनल अमेरिका के हर बड़े शहर और यूरोप, मिडिल ईस्ट, साउथ अमेरिका, एशिया से कनेक्ट है। मैंने इस बात का ध्यान रखा कि अपने बोर्डिंग गेट से ज्यादा दूर नहीं जाना है और कहीं मुड़ना नहीं है। ऐसे ही वापस आ जाना है क्योंकि अब अटेंडेंट नहीं है अगर मैं खो जाऊंगी तो फ्लाइट मिस हो जाएगी।Terminal 4 और 5 में सबसे अच्छा फूड कोर्ट और ड्यूटी फ्री शॉप है.

JFK बड़ा और थोड़ा भीड़भाड़ वाला एयरपोर्ट है, पर साइनबोर्ड अच्छे हैं। टर्मिनलों के बीच अगर फ्लाइट चेंज करनी है तो AirTrain फ्री है। अब मैं लेटने वाली जगह पर पहुंची तो उस पर कोई और लेटा था। कुछ देर में बोर्डिंग शुरू हो गई। इसमें मेरी 10 D सीट कॉर्नर की थी और बाजू वाली खाली थी। प्रीमियम इकोनॉमी में बस बीच का हत्या नहीं उठता वरना दोनों सीट एक हो जाती। पर फिर भी आरामदायक बैठना, टेढ़ा होना, टांगे इधर-उधर करना चलता रहा। यहां हर अनाउंसमेंट हिंदी में भी होती, ऐसा लग रहा था जैसे अमेरिकन एयरलाइंस ने भारतीयों को ध्यान में रखकर ऐसा किया है। खाना भी अच्छा, पहले और आखिरी, 2 मील में तो मैं जाग रही थी। सबा फिल्म देखी उसके बाद पता कौन सी हिंदी फिल्म देखते हुए सो गई। एकदम लाइटें जल गई, बीच के मील में एयर होस्टेस ने मुझसे पूछा आखिरी शब्द मुझे पास्ता सुना मैंने वही बोल दिया। पास्ता के साथ फ्रूट और आइसक्रीम भी आई। उनींदी सी थी इसलिए उसकी फोटो लेना मैं भूल गई। पूरे रास्ते रात ही रही। लैंड होने से 2 घंटा पहले, धूप रोशनी कुछ देर के लिए दिखे फिर अंधेरा और रात 9:30 हम दिल्ली लैंड कर गए।    क्रमशः https://www.instagram.com/reel/DYUOE39gVqE/?igsh=bHNybHd3cjNlMmcy

https://www.instagram.com/reel/DX8vM84R8XP/?igsh=djFuOTR4dDlleHZx







Wednesday, 13 May 2026

लॉस एंजेलिस से न्यूयॉर्क भारत वापिस Los Angeles to New York back to India Neelam Bhagi नीलम भागी

 




28 फरवरी को मेरी भारत लौटने की फ्लाइट थी, उसे कैंसिल करना पड़ा। अब मेरी फ्लाइट 30 अप्रैल को थी जो 10:28 से पहले 5:30 घंटे की लॉस एंजेलिस से न्यूयॉर्क की थी फिर 2 घंटे बाद न्यूयॉर्क से दिल्ली के लिए थी। दोनों फ्लाइट अमेरिकन एयरलाइंस से थी। उत्कर्षनी को दित्या को 8:00 बजे स्कूल छोड़ना था इसलिए राजीव जी मुझे एयरपोर्ट छोड़ने आए। यहां एयरपोर्ट के अंदर चेकिंग काउंटर तक गेस्ट जा सकते हैं। राजीव जी ने मेरी एंट्री करवा कर, मुझे बिठा दिया और स्वयं  लगेज चेक इन वगैरह सब करवाने गए। अटेंडेंट हाथ में टैबलेट पकड़े हुए आया। सबके आगे किया क्योंकि मेरे साथ दो-तीन और लोग भी बैठे थे। साथ में मेरा नाम बोल रहा था। मैंने टैबलेट पर अपना नाम पढ़ा और वह मेरे पास आकर मुझे फ्लाइट के लिए ले जाने लगा तो मैंने उसे बताया कि मेरा लगेज़ चैक इन हो रहा है। इतने में राजीव जी ने आकर मुझे लगेज की स्लिप दी और अटेंडेंट को मेरा बोर्डिंग पास दिया। और मुझे बाय करके, जल्दी फिर से आने को कह कर चले गए। वह मुझे सुरक्षा जांच के लिए ले गया। सुरक्षा जांच के बाद, अब मुझे मेरे गेट नंबर पर बिठाकर दूसरी अटेंडेंट को मेरा बोर्डिंग पास दिखा कर, मुझसे पूछ कर कि फ्लाइट में मैं चली जाऊंगी या वह मुझे सीट पर बिठाने आए। मेरे मना करने पर वह चला गया। फ्लाइट में मेरी कॉर्नर की सीट थी। मैं संकोच के मारे किसी को  डिस्टर्ब न करूँ और वॉशरूम भी न जाऊं इसलिए उत्कर्षनी कोशिश करती है कि मेरी कॉर्नर की सीट हो। पूरी रात अच्छे से सो कर आई थी तो नींद आने का तो सवाल ही नहीं था इसलिए मैंने लापता लेडीज़ और चक दे इंडिया दो फिल्में देखी। जूस, कॉफी स्नैक्स खाते हुए, मैंने बीच में ब्रेक लिया। एक बार वॉशरूम गई। जब लौटी तो मेरे साथ का भला आदमी भी, इतनी देर में वह भी फ़ारिग होके उसी वक्त आया। यानी जरा भी मुझे डिस्टरबेंस नहीं हुई। तब तक न्यूयॉर्क भी आ गया और लैंड करने की घोषणा हो गई। यहां मैंने जरा भी बाहर नहीं देखा क्योंकि पानी के ऊपर ही जहाज लग रहा था😃। लैंड करते ही अटेंडेंट मुझे लेने आ गया। मेरा बोर्डिंग पास, वहां लगे फ्लाइट चार्ट से, अच्छी तरह मिलाया और मुझे अगली फ्लाइट, न्यूयॉर्क से दिल्ली के लिए, लेकर चल दिया। और मैं आंखें फाड़ फाड़ के इतने बड़े एयरपोर्ट में देश दुनिया के लोगों को देखती हुई, अपने बोर्डिंग गेट की ओर जा रही हूँ।  क्रमशः

https://www.instagram.com/reel/DX8vM84R8XP/?igsh=djFuOTR4dDlleHZx

Tuesday, 12 May 2026

सुविधा अनुसार जन्मदिन! Birthday as per convenience! Neelam Bhagi, Migration to America अमेरिका प्रवास, नीलम भागी

 




आउटडोर प्रोग्राम के लिए लॉस एंजेलिस का मौसम बहुत अच्छा है। यहां धूप तीखी होती है और हवा ठंडी चलती है इसलिए यहां की गर्मी में भी आप धूप में रह सकते हैं। सबसे अच्छी बात मुझे यहां यह लगी कि कोई भी पार्टी मसलन दित्या का जन्मदिन 4 जून को परिवार में  मना लिया। लेकिन मित्रों संबंधियों के साथ संडे या सैटरडे मनाया जाएगा। एक महीने पहले सबको इनविटेशन दे दी। उन्होंने अपनी स्वीकृति दे दे। भारत में मेरे पास गीता दित्या के जन्मदिन की तस्वीर आती थी। कभी रेस्टोरेंट, कभी पूल साइड में मनाते हुए। अब चौथे जन्मदिन पर मैं साथ में हूं।  दित्या के प्ले स्कूल के उसकी एक्टिविटी क्लास के और जान पहचान वालों के बच्चों को निमंत्रण था। राजीव जी ने हॉलीवुड पार्क में पिकनिक जॉन रिजर्वेड करा लिया था 11:00 से 3:00 बजे तक। पिकनिक जॉन बहुत बड़े घास से ढके मैदान से सटा है।  राजीव जी गीता के साथ, सामान लेकर पहले पहुंच गए थे। उत्कर्षनी मुझे दित्या को लेकर पूरे 11:00 बजे पहुंची । मुझे यह जगह बहुत ही पसंद आई। हमारी रिजर्वेशन का बोर्ड लगा हुआ था। रेत में बिल्डअप फर्नीचर साथ में पेड़, चाहे धूप में बैठो, चाहे पेड़ के नीचे बाजू में बहुत खूबसूरत गेटेड पार्क है। भारतीय बच्चा कोई नहीं था अलग-अलग देशों के दित्या के दोस्त बच्चे आए। बच्चों को व्यस्त रखने के लिए खिलौने और बबल बनाने वाले और कुछ कारपेट भी रखे। जिसने लेटना है या घास पर बैठना है, वह बैठ सकता है या वैसे ही बैठ सकता है। यहां सब काम खुद करने के कारण बच्चों को भी बहुत अच्छी आदत है। अपने पसंद का कोई भी पैकेट उठाते हैं,  स्नेक्स ड्रिंक लिए कहीं भी घूमते, खेलते, झूलते लेकिन खाली रैपर और बोतल डस्टबिन में ही डालते हैं। वहां रखा डस्टबिन मैंने एक बार भी ऊपर तक भरता, कचरा बाहर गिरते नहीं देखा, पूरा भरने से पहले ही खाली कर दिया जाता। एक जगह  आइसक्रीम का पार्लर गीता ने लगाया, आते ही उसकी सहेलियां भी मदद करने लगी। आइसक्रीम पर टॉपिंग बच्चे अपनी पसंद की अपने आप करते थे। खत्म होने पर ही दूसरी आइसक्रीम ब्रिक, आइस बॉक्स से निकालते थे। बड़े अपने ग्रुप में बातें करते। सेल्फ सर्विस थी, कहीं भीड़ नहीं लग रही थी। मर्जी से अपने ग्रुप में सुविधा अनुसार बैठे, खड़े या वॉक कर रहे थे। गीता और उसकी सहेली खिलौने की दुकान भी लगा कर बैठे थे जो डॉलर के बदले नहीं, किसी एक्टिविटी करने पर मिलता था। यहां बच्चा खोने का तो सवाल ही नहीं होता और न कोई किसी का सामान उठाता। खूब खाने पीने का सामान जगह-जगह रखा था, कोई फालतू बंदा नहीं आता, न ही कोई कुत्ता। 3:00 बजे से कुछ पहले पेरेंट्स अपने बच्चों को झूलों से या खेलते हुए को लेकर, बाय करने आए। उत्कर्षनी राजीव जी रिटर्न गिफ्ट देते हुए उन्हें फिर से कुछ खाने का आग्रह करते थे। जवाब हंसते हुए होता 'आई एम फुल' बड़ी खुशी से वे एक दूसरे को धन्यवाद करते हुए जाते। सबके जाने के बाद हमने अपना सामान पैक किया। दोनों ने अपनी अपनी गाड़ी में रखा। हंसी खुशी जन्मदिन मना कर घर पहुंचे। दोनों थकी हुई लड़कियां, गाड़ी में बेसुध सोई हुई थीं। बाकी बच्चों का भी खेल खेल के यही हाल होगा क्योंकि 4 घंटे में कोई भी बच्चा अपने पेरेंट्स के पास नहीं आया था जिस पेरेंट्स को लगता कि उसके बच्चे ने नहीं खाया खेल में मस्त है, वह प्लेट लगाकर वहीं दे आता था। बच्चे अपने आप खाने को उठाते, प्लेट लगाते खाते , गरम खाना नहीं लेते क्योंकि उसको खाने में टाइम लगता है और झूलने, खेलने भाग जाते। सबसे अच्छी बात मुझे यहां यह लगी लोग आपस में लगातार बतिया रहे थे।   

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