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Sunday, 4 January 2026

यात्रा का पहला दिन और बच्चों का क्लेश! First day of the trip and the kids fight! 😃 अमेरिका प्रवास Migration to America Neelam Bhagi नीलम भागी Part 10

 


डिनर के बाद, राजीव जी के साथ दित्त्या गीता घर चले गए, मैं उत्कर्षनी के साथ घर की ओर। रास्ते में उत्कर्षनी यात्रा के बारे में बताती गई कि दिन में दर्शनीय स्थल देखते, घूमते हुए, अगले शहर जाएंगे। ज्यादा से ज्यादा शाम 5:00 से रात को रूकना है। ब्रेकफास्ट वाले होटल बुक हैं। सुबह आराम से उठाना है, नाश्ता करके, तैयार होकर निकलना है। तीन दिन बाद होटल की लॉन्ड्रिंग में कपड़े धुलेंगे। इस हिसाब से सामान लेना। सर्दी हर जगह होगी। कहीं-कहीं माइंस में टेंपरेचर होगा। मैं तो वैसे ही बहुत कम समान में सफर करती हूं क्योंकि अकेली होती हूं, मुझे समान खुद उठाना पड़ता है। फोटो में अलग-अलग पोशाक आए, अलग दिखूं, इस कारण से ढेरों कपड़े नहीं उठाती। थर्मल वगैरा का ध्यान रखा और बहुत कम कपड़ों में तैयारी कर ली क्योंकि सब की सर्दियों की जैकेट वगैरह बहुत हो जानी है। राजीव अपने ऑफिस में काम में लग गए, उन्हें तो कल ड्राइविंग भी करनी है । मैं और बच्चे सो गए। रात को जितनी बार भी मैं बाहर आई, उत्कर्षनी ड्राइंग रूम में, अधलेटी सी, लैपटॉप पर काम करती नज़र आई। मैं देख कर चुपचाप चली जाती, एक बार भी नहीं कहा, " बेटी सो जा। " क्योंकि मैं जानती हूं कि वह कमिटमेंट की बहुत पक्की है, मानेगी तो है नहीं। सुबह मैं उठी, कुछ देर बाद उत्कर्षनी ने लैपटॉप बंद करके, मुझे कहा, "अब मैं बिल्कुल फ्री हूं।" वेकेशन के मूड में आ गई और फटाफट तैयारियां करने लगी। मुझे एक बैग दिया और बोली , "आप अपना सामान इसमें रखो और तैयार हो जाओ।" मुझे करना ही क्या था, सामान कवर्ड  से उठाकर, उसी में रखा और तैयार होने चल दी। यहां बचपन से बच्चे आत्मनिर्भर है, अपने काम खुद करते हैं इसलिए बच्चों की पैकिंग माँ नहीं करती, गीता भी अपनी पैकिंग खुद कर रही थी। पर उत्कर्षनी मां है इसलिए उसकी पैकिंग पर नज़र पूरी रख रही थी कि कुछ छूट न जाए। लगेज से अलग, गीता ने अपने छोटे से बैकपैक में, उसके घुंघराले बाल और ना उलझे इसलिए साटिन कैप, आई मास्क दोनों रात को सोते समय इस्तेमाल करती है , इयरफोन, टैबलेट, ऊन क्रोशिया, रेगिस्तान पर किताब आदि रखा। साथ ही स्टफ एक किस्म का खिलौने की तरह हाथ में तकिया भी लिया।






 दित्या तो छोटी है, उसकी तैयारी तो माँ ही करेंगी। 5 घंटे में खाना पीना नहाना घर को व्यवस्थित करना और यात्रा की पूरी तैयारी करके, अपनी अपनी पानी की बोतल लेकर, हम लोग volks wagon गाड़ी में बैठ गए। उत्कर्षनी राजीव जी ने समान व्यवस्थित किया। पीछे की सीट पर सबकी जैकेट और एक छोटा ब्लांकेट के साथ गीता, उसमें चाहे सोए या बैठे। बीच की सीट पर कार सीट पर दित्या को बिठाया। वह उल्टा धूप का चश्मा पहन कर, घड़ी लगाकर बैठी टाइम से देखना नहीं आता😃 





यहां का नियम है बच्चा कार सीट पर ही बैठेगा। और साथ में दो सीटों पर मैं। पालती मार कर बैठना मुझे मना है और यात्रा में, मैं आंखें बाहर ही गढ़ाए रखती हूं इसलिए मुझे लेटना नहीं होता है। राजीव जी की आदत है, जब भी गाड़ी स्टार्ट करते हैं 'ओम नमः शिवाय' बोलते हैं, सब उनके पीछे बोलते हैं और गाड़ी चलती है। और हम चल दिए हैं। राजीव जी, उत्कर्षनी मुझे लॉस एंजेलिस के मशहूर जगहों के बारे में रास्ते में बताते जा रहे थे। पिछले अमेरिका प्रवास में, यह सब जगह है मैंने देखी थी, फोटो भी ली थीं अभी भी हैं पर किसी कारणवश मैं लिख नहीं पाई थी। इस यात्रा के बाद फोटो वीडियो हैं, उन्हें भी लिखूंगी। इतने में दित्या ने गर्दन घूमा कर पीछे देखा। गीता के हाथ में स्टफ देखते ही उसने मांग कर दी कि उसे नींद आ रही है और गोदी में स्टफ रखकर, उस पर सर रखकर सोएंगी। गीता अभी तो कुल 10 साल की है। उसने भी जीद पकड़ ली कि वह लेकर आई है अपने लिए उसे अभी नींद आ रही है। वह उस पर सर रखकर सोएगी। बच्चों के कमरे में तीन स्टिफ़ थे, किसी के दिमाग में ही नहीं आया कि इस पर बच्चे क्लेश करेंगे। गीता को समझाया कि तू जैकेट कंबल, शाल आदि रखे हैं, इन पर सर रख कर सो जा। नहीं! अब वह वह बड़ी दीदी बन गई और बहुत उचित तर्क दिया, " मैं लाई हूं इसलिए मैं ही इस पर सर रख कर सोऊंगी। यह छोटी है, इसकी हर बात मानोगे तो यह बिगड़ जाएगी।" अब बच्चे का तो एक ही अस्त्र होता है रोना! जिसे वह शस्त्र की तरह इस्तेमाल करता है, वही दित्या ने किया, रोना शुरू कर दिया। सड़क पर हैं पर, यहां ऐसे नहीं है कि गाड़ी कहीं भी मोड़ दी और किसी दुकान से खरीद लिया। हाईवे है 75 मील की स्पीड है। उत्कर्षनी ने कहा, " कोई भी स्टोर आते ही, या पेट्रोल पंप के स्टोर पर, वह दूसरा खरीद देगी। दित्या को दे दो वह छोटी है।" गीता ने उसे दे दिया और सुबकती हुई सो गई। दित्या ने उसको ऐसे पकड़ के रखा हुआ था, जैसे उसे दुनिया का सबसे बड़ा खजाना मिल गया और सो गई। स्टफ़ वहीं पड़ा, लुढ़कता रहा। मैंने उठा कर पीछे गीता की सीट पर रख दिया। वह गहरी नींद सो रही थी अब उसे भी इसकी जरूरत नहीं थी।😃 क्रमशः

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