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Sunday, 31 May 2026

मोरक्कन पुदीना /Moroccan Mint Migration to America Neelam Bhagi अमेरिका प्रवास नीलम भागी

 


उत्कर्षनी ने कंटेनर में कई तरह की हर्बस उगा रखी हैं।  जो गमले में देखने में भी सुंदर लगती है और किसी भी व्यंजन में बहुत कम मात्रा में इस्तेमाल होती हैं। घर में उगाने से जब जरूरत होती है तो ताज़ी मिल जाती है। ताजी पत्तियां होने से स्वाद भी बहुत बढ़ जाता है। इसे "Nana Mint" या "Spearmint की स्पेशल नस्ल" भी कहते हैं। मोरक्को की ट्रेडिशनल चाय इसी से बनती है। खुशबू नॉर्मल पुदीने से ज्यादा मीठी और ठंडी होती है। एक गमले में पुदीने से कुछ मिलते जुलते पत्ते देखे। तो उत्कर्षनी से उसकी जानकारी ली। यह मोरक्कन पुदीना कहलाता है। इसके पत्ते नॉर्मल पुदीने से लंबे, पतले और चमकदार होते हैं। डंठल सीधा ऊपर जाता है। स्वाद में कम कड़वा, ज्यादा स्वाद होता है।  मोरक्कन चाय की  खास महक इसी से आती है। इसके उगाने का तरीका भी नॉर्मल पुदीने जैसा है। मैं लिंक लगा दूंगी। आप क्लिक करके देख लेना।

https://neelambhagi.blogspot.com/2018/04/blog-post.html

सालभर उगता है, पर सर्दी-बारिश बेस्ट है। 15°C से 30°C तक आराम से चलता है। दिल्ली में अक्टूबर-मार्च बेस्ट है । लगाना भी बहुत आसान है।

नर्सरी से पौधा ले आओ या बाजार के पुदीने का तना पानी में रख दो। 7 से 14 दिन में जड़ आ जाएगी। इसे शाम को गमले में लगा दो।

50% मिट्टी + 30% गोबर खाद + 20% रेत। मिट्टी नम रहे पर पानी रुकना नहीं चाहिए। 8-10 इंच का चौड़ा गमला। गहरा कम, फैलाव ज्यादा चाहिए क्योंकि जड़ें साइड में भागती हैं। उसमें यह मिट्टी भर दो।

रोज 4-6 घंटे हल्की धूप चाहिए। दोपहर की तेज धूप से पत्ते जल जाते हैं। सेमी-शेड बेस्ट है ।

गर्मी में रोज, सर्दी में 1 दिन छोड़कर पानी देना है। मिट्टी हमेशा हल्की नम रखो।

जब पौधा 6 इंच का हो जाए, ऊपर से 2 इंच काट दो।  कटिंग जरूरी है। काटने से नीचे से झाड़ीदार हो जाएगा। नहीं काटोगे तो सिर्फ लंबा होगा।

इसे अकेले गमले में लगाओ क्योंकि इसकी जड़ फैलती हैं वरना जड़ें दूसरी सब्जी की जड़ें दबा देंगी।

महीने में 1 बार चाय की पत्ती की खाद या वर्मी कम्पोस्ट देनी है। बहुत खाद से खुशबू कम हो जाती है।

45-60 दिन में तोड़ने लायक। ऊपर से पत्ते तोड़ो, जड़ छोड़ दो। 3 महीने तक एक पौधा चलता है।

उपयोग मसलन मोरक्कन मिंट टी, लेमन मिंट ड्रिंक, तबूलेह सलाद, रायता, लस्सी, चटनी में डालो। मटन/चिकन के साथ बहुत बढ़िया लगता है। फ्रूट सलाद, आइसक्रीम, कोल्ड कॉफी के ऊपर गार्निश की जाती है।सांस की बदबू में 2-3 पत्ती चबाने से मुंह फ्रेश हो जाता है। गैस, अपच, एसिडिटी में तुरंत आराम मिलता है। खाने के बाद चबा लो। ज्यादा मात्रा नुकसान भी कर सकती है। 



Saturday, 30 May 2026

मनमोहक! Kenneth Hahn State Park in Los Angeles Migration to America Neelam Bhagi अमेरिका प्रवास नीलम भागी

 


केनेथ हान स्टेट पार्क लॉस एंजेलिस में पिकनिक और BBQ के लिए 100+ पिकनिक टेबल, बारबेक्यू के चूल्हे हैं। वीकेंड पर परिवारों की पार्टी होती है। एक ही पार्क में बच्चों के लिए तीन पार्क है, जिसमें झूले बहुत ग़ज़ब हैं।दित्या झूलों में मस्त हो गई और मैं उसकी नजरों के सामने आसपास घूमने लगी ताकि वह अकेलापन न महसूस करे। यहाँ बाज, कोयोट, खरगोश दिखते हैं। बारिश के बाद फरवरी-अप्रैल में जंगली फूल खिलते हैं और पहाड़ियां हरी हो जाती हैं। तो सिर्फ पहाड़, आसमान और सुकून में समय गुजारिये।  

रविवार को ढोल वाले ग्रुप, योगा क्लास, फैमिली गेट-टुगेदर होती रहती है।

बारिश के बाद पार्क आयरलैंड जैसा हरा-भरा दिखता है। फोटो के लिए बेस्ट टाइम फरवरी से अप्रैल है। हमें कुछ ही समय में एक नया अनुभव हुआ गर्मी थी। हम गर्मी के कपड़ों में यहां आए। दित्या झूले और रेत में खेलने लगी। मैं आसपास घूमने लगी यहां पर बच्चा खोने का तो डर ही नहीं है इसलिए मैं शौक़ से आसपास के न्यूज़ देख रही थी। LA में खूब अच्छी हवा चलती है  जो यहां भी चल रही थी। इतने में बादल आ गए। पिकनिक एरिया में शेड्स होते ही हैं इसलिए भीगने का डर नहीं था। बादल आते ही यहां पर ठंड हो गई। मैं डर गई कि दित्या बीमार हो जाएगी और मैं भी ठंड से कांपने लगे। देखा राजीव जी जैकेट पहने चले आ रहे हैं और एक मेरे लिए जैकेट थी और दित्या के लिए। आते ही वह कहने लगे कि हमारी गाड़ियों में हमेशा जैकेट रहती है क्योंकि यह LA का मौसम है और यह तो वैसे ही पार्क पहाड़ पर है। तो मैंने तो इस पार्क में गर्मी में सर्दी भी देख ली। शाम होने लगी राजीव जी बोले, "आप उस तरफ जाइए, वहां से सनसेट का व्यू बहुत सुंदर है। मैं गाड़ी लेकर आता हूं।" मैं दित्या को लेकर सेल्फी बनाने लगी। दित्या घर  लौटना नहीं चाह रही थी इसलिए इधर-उधर भाग रही थी। उधर  कुछ लड़के खेल रहे थे। उनमें से एक आकर बोला  आप इसे पकड़िए मैं फोटो लेता हूं। और वह हमारी फोटो लेकर चला गया। कुछ देर में राजीव जी भी आ गए। उत्कर्षनी का भी फोन आ गया कि वह गीता को लेकर घर पहुंच गई है। हम लोग घर की ओर चल पड़े। नीचे आते ही जैकट उतारी।

https://www.instagram.com/reel/DM_K1MoBs_W/?igsh=bnBrOWhhYWU1a3k=

https://www.instagram.com/reel/DY7qVXUSCZ4/?igsh=NnVzanh2aWZ1YzVu

https://www.instagram.com/reel/DY9J7RQxygX/?igsh=MXdqamZ1cmFnZWQ0Yg==








Thursday, 28 May 2026

स्थानीय लोगों की पसंद केनेथ हान स्टेट पार्क लॉस एंजेलिस Migration to America Neelam Bhagi अमेरिका प्रवास नीलम भागी part 2

 


खूबसूरत केनेथ हान स्टेट पार्क लॉस एंजेलिस,  401 एकड़ में फैला हुआ है इसलिए पहले सड़क पर गाड़ी से भ्रमण कर रहें हैं और राजीव जी पार्क की विस्तृत जानकारी दे रहे हैं। यहाँ पैदल चलने, हाइकिंग के 7+ मील के रास्ते हैं । आसान घुमावदार रास्तों से लेकर खड़ी चढ़ाई तक हैं। और बाल्डविन हिल्स सीनिक ओवरलुक की 282 सीढ़ियां वर्कआउट के लिए मशहूर हैं।

यहां से सनसेट का व्यू कमाल का है। पूरा LA बेसिन, LAX पर उतरते हवाई जहाज और प्रशांत महासागर दिखता है।








पिकनिक और BBQ के लिए 100+ पिकनिक टेबल, बारबेक्यू के चूल्हे हैं। वीकेंड पर परिवारों की पार्टी होती है।

डोरोथी ग्रीन पार्क के हिस्से में बतखों वाला तालाब और कमल के फूल हैं।

मछली पकड़ने के लिए छोटे तालाब में कैटफिश डाली जाती है। 16 साल से ऊपर वालों को CA फिशिंग लाइसेंस चाहिए।

यहां जापानी गार्डन  शांत बगीचा जिसमें कोइ मछली वाला तालाब, पुल और झरना है। $5 दान सुझाया जाता है।

डॉग पार्क बड़े और छोटे कुत्तों के लिए अलग जगह है । यहां कुत्तों को पट्टे के बिना छोड़ सकते हैं।

एंट्री फीस वीकेंड/छुट्टी पर प्रति गाड़ी के $6, बाकी दिन फ्री। पैदल या साइकिल वालों के लिए  हमेशा फ्री है ।

क्रमशः

 https://youtu.be/SlC9amoFsPk?si=I9HJ_H8MyJ_GimMZ

https://www.instagram.com/reel/DY112V3ASYA/?igsh=MWx0aGdyZ2kzcXc0NA==

Wednesday, 27 May 2026

केनेथ हान स्टेट पार्क "LA का फेफड़ा" Kenneth Hahn State Park — "The Lungs of LA" Migration to America Neelam Bhagi अमेरिका प्रवास नीलम भागी part 1

 


पहली बार मैं अमेरिका आई थी तो उत्कर्षनी ने एयरपोर्ट से घर जाते हुए, रास्ते में दिखाया था कि ये बहुत सुंदर पार्क है। यहां हम आपको लेकर आएंगे।

केनेथ हान स्टेट पार्क 401 एकड़ में फैला हुआ है।

लॉस एंजेलिस के बीचों-बीच बसा एक हरा-भरा पहाड़ी पार्क है। यह भीड़-भाड़ से दूर, सुकून और नज़ारों के लिए मशहूर है। जो कल्वर सिटी और साउथ LA के बीच में है।

यह पार्क 1984 में बना और इसका नाम केनेथ हान के नाम पर रखा गया। वे 40 साल तक LA काउंटी सुपरवाइजर रहे और गरीब इलाकों में पार्क बनवाने के लिए लड़े। इसमें बच्चों के लिए 3 खेल के मैदान हैं। कुछ दिन पहले हम आए थे। उस दिन पार्क बंद था। शायद सोमवार को बंद रहता है। इसमें 5 मुख्य पार्किंग हैं। ऊपर वाली पार्किंग वीकेंड पर सुबह 10 बजे तक भर जाती है। आज वीकेंड भी नहीं है। हम ऊपर वाली पार्किंग पर जा रहे हैं, आसपास के नजारे और पार्क को देखते हुए। शाम के 4:00 बजे हैं। यहां से पूरे LA का 360° नज़ारा मिलता है। साफ दिन में डाउनटाउन, समुद्र, हॉलीवुड साइन और कटालिना आइलैंड तक दिखता है और दिन भी साफ है। क्रमशः

https://www.instagram.com/reel/DY112V3ASYA/?igsh=MWx0aGdyZ2kzcXc0NA==








Tuesday, 26 May 2026

स्वाद की तुलना Taste comparison Neelam Bhagi Migration to America अमेरिका प्रवास नीलम भागी

  


     हमारी सात राज्यों की सड़क यात्रा में, सुबह हम होटल से नाश्ता करके निकलते और कोशिश करते थे कि शाम के 5:00 बजे तक अगले शहर में पहुंचे। सर्दी के कारण 3:00 बजे तो शाम हो जाती, 4:00 बजे रात हो जाती थी। 6:00 बजे ही बुक किए गए, होटल में पहुंचते और रात रुकते। दिन भर में हमें शहर घूमना होता,  वहां के दर्शनीय स्थल देखने होते। नई जगह भी जाना है। कुछ जगह ऐसी आती थी, जहां पर वेजीटेरियन का कॉन्सेप्ट उन्हें समझ नहीं आता था इसलिए उत्कर्षनी राजीव जी का समय मेरे लिए लंच खोजने में लग जाता, समय बचाने के लिए ज्यादातर खाना हम लोग पैक करवा लेते थे। एक जगह उत्कर्षनी बड़ी खुशी से आ रही थी। हाथ में उसके पैकेट था। उसने मुझे पकड़ाया और बोली, " आप खुश हो जाओगी, आपका खाना देखकर। हमेशा आपका खाना लाते हुए, मैं सोचती पता नहीं आपको यहां के खाने का स्वाद आएगा कि नहीं आएगा।"  मैं तो उनकी खुशी देखकर ही खुश हो गई। आप भी फोटो में देखिए।




   

यह था रसेदार आलू गोभी की सब्जी और केसर वाले राइस। देखने में बहुत सुंदर! मिर्च का नामोनिशान नहीं था पर अच्छा बना था। वैसे वह अलग-अलग जगह में वहां का मेरे लिए तो अजीब नाम का, वेजीटेरियन खाना लाती थी जो तीखा नहीं होता था पर स्वाद होता था। उसे मैं खाते हुए, अपने किसी भारतीय खाने से मिलान करती। इस खाने को खाते हुए तो मैं सिर्फ भारत के आलू गोभी की सब्ज़ी के स्वाद से ही तुलना कर सकती हूं!  उत्कर्षनी  खुश है कि वह मेरे लिए भारतीय खाना ढूंढ लाई। उत्कर्षनी उत्साह से बोली, " थोड़ा पहले चले जाते  तो हम दो पैकेट खरीद लेते, हमसे पहले किसी ने एक ले लिया।"    

Monday, 25 May 2026

फ्लैट लीफ इटालियन पार्सली उगाना और लगातार मिलती रहे! Growing flat leaf Italian parsley and getting consistent! Neelam Bhagi नीलम भागी

 



उत्कर्षनी ने पार्सली और धनिया दोनों गमले में उगा रखी है। मुझे दोनों एक से लगते हैं। मैं धनिया की जगह पार्सली काट लाती। मेरा कंफ्यूजन दूर करने के लिए उसने दोनों कंटेनर बराबर रख दिए हैं। ध्यान से देखने पर मुझे फर्क पता चल गया है। अब मैं गलती नहीं करती। पार्सली उगाना आसान है, गमले में भी लग जाती है। जिससे घर की रसोई के लिए ताजी पार्सली हमेशा मिलती है। फ्लैट लीफ इटालियन पार्सली खाना बनाने के लिए बेहतर है। सर्दी का पौधा है। अक्टूबर से फरवरी इसे उगाने का बेस्ट टाइम है।

  लगाने का तरीका

8-10 इंच गहरा गमला लो जिसमें नीचे छेद होना चाहिए।

50% गार्डन मिट्टी + 30% गोबर की खाद + 20% रेत। मिट्टी भुरभुरी हो।

पार्सली के बीज सख्त होते हैं, उगने में 3-4 हफ्ते लगाते हैं। बीज को रातभर पानी में भिगो दो। जल्दी उगेंगे।

    बीज 1/4 इंच गहरा दबाओ। ज्यादा गहरा नहीं।

मिट्टी नम रखो पर दलदल नहीं बने। स्प्रे बोतल से पानी दो ताकि बीज हिले नहीं। अगर जमीन पर बोना है तो

6-8 इंच की दूरी पर कतार में लगाओ। पार्सली बहुत धीरे उगती है। उगने में 10 से 20 दिन लगते हैं और  बीज से पत्ते आने में 70-90 दिन लगते हैं।

इसे रोज 4-6 घंटे धूप चाहिए। गर्मी में दोपहर की तेज धूप से बचाओ। गर्मियों में पत्ते किनारे से पीले पढ़कर खत्म होने लगता है इसलिए गर्मी में छाया में रखो।

ऊपर की 1 इंच मिट्टी सूखे तब पानी दो। गर्मी में रोज, सर्दी में 2-3 दिन में।

खाद 15 दिन में एक बार लिक्विड गोबर खाद या वर्मी कम्पोस्ट दो।

8-10 इंच का होने पर बाहरी पत्ते पहले काटो। बीच से नई पत्तियां आती रहेंगी।

गर्मी बढ़ते ही फूल आ जाते हैं, फिर पत्ते कड़वे हो जाते हैं। फूल आते ही तोड़ दो।

एफिड्स लगे तो नीम ऑयल स्प्रे कर दो।

हर 3-4 हफ्ते में नए बीज लगा दो। एक खत्म हो तो दूसरा तैयार रहे।

कैंची से बाहर वाली बड़ी पत्तियां काट लो। पार्सली को ठंड, हल्की धूप और नम मिट्टी पसंद है। बीज भिगोकर लगाओगे तो सक्सेस रेट बढ़ जाएगा।

पार्सले सिर्फ गार्निश नहीं है। ये एक पावरफुल हर्ब है जो खाने का स्वाद और सेहत दोनों बढ़ाती है।

सूप, पास्ता, सलाद, बिरयानी के ऊपर डालो। रंग और फ्रेशनेस आती है।

धनिया-पुदीना की तरह पार्सले की चटनी बनती है। लहसुन, नींबू, जैतून तेल के साथ पीस लो।

मिडिल ईस्टर्न सलाद का मेन इंग्रीडिएंट है। पार्सले + टमाटर + बुल्गुर + नींबू।

पिघले बटर में बारीक कटी पार्सले मिलाकर गार्लिक ब्रेड पर लगाओ।

विटामिन K, C, A बहुत ज्यादाहोता है। 



Sunday, 24 May 2026

बंदरों आओ, कूड़ा फैलाओ!! Come on monkeys, spread garbage!! Neelam Bhagi नीलम भागी

 


हमारे कॉर्नर के घर के बाहर सहजन, अमरूद, करौंदा और कई पेड़ लगे हुए हैं। पूरा घर पेड़ों से गिरा हुआ है कभी-कभी बंदर आते हैं, फल फूल खाते हैं, खूब उधम मचा कर टहनियां पत्तियां तोड़ तोड़ के फेंक कर चले जाते हैं। उनके जाने के बाद मैं, झाड़ू लगाकर साफ कर देती हूं। कुछ महीनों से बंदर आ नहीं रहे थे। चैन की सांस ली। लेकिन अब फिर आने लग गए, जो जाते ही नहीं हैं। सुबह 8 और 9 के बीच में आ जाते हैं। शाम को 5:00 बजे के बाद जाते हैं। इतने समय हम घर के अंदर बैठे रहते हैं। कहीं जरूरी जाना हो तो गार्ड दिलावर को फोन करते हैं। वह डंडा लेकर आता है। एक डंडा हम अपने हाथ में रखते हैं। अब बंदर हमें खों खों करके झपटते हैं।   डंडा चलाते हुए हम जाते हैं और डंडे को जाते हुए गार्ड के पास रख जाते हैं क्योंकि आते हुए भी जरूरत पड़ेगी। पर अब समस्या गंभीर हो गई है। बंदरों ने डस्टबिनों के ढक्कन तोड़ दिए, दूसरे लगाए। अब सारा कूड़ा फैला जाते हैं। जिससे सूखा, गीला सभी कूड़ा मिक्स हो जाता है। खरबूज, तरबूज के छिलके लेकर सीढ़ियों पर  बैठकर खाते हैं और फेकते हैं।  उनके जाने के बाद झाड़ू से साफ  करती हूं। लेकिन अब कूड़े की गाड़ी सामने से गाती बजाती निकलती है 'चमक चमक चम चम चमके नोएडा' हम अंदर से आवाज लगाते हैं। जिसमें हमारी आवाज भी गाड़ी पर नहीं पहुंचती है और हमारा कूड़ा क्योंकि फैला हुआ है शायद वह इसलिए नहीं उठाया जाता। या वह भी घर को बंदरों से घिरा देखकर छोड़ जाते हैं। शाम को इस मिक्स कूड़े को मैं अलग नहीं कर सकती, वैसे ही डस्टबिन में भर देती हूं। मुझे डॉक्टर ने नीचे बैठने को मना किया है। अगले दिन मैं डरती हूं कि गाड़ी आने से पहले, बंदरों ने फिर कूड़ा फैला दिया और कूड़ा गाड़ी फिर मेरा कूड़ा नहीं लेकर गई तो?  क्या हमने बंदरों को बुलाया है कि वह आए और हमारा कूड़ा फैलाएं? हमारा कष्ट देखकर चलते-फिरते लोग हमें कह जाते हैं कि आपने पेड़ बहुत लगा रखे हैं न, इन्हें यहां ठंडा लगता है न। इन बंदरों के कारण पेड़ तो नहीं कटवा सकती न, हां इनके नीचे शेड में उगने वाले पौधे जरूर लगाऊंगी।   

https://neelambhagi.blogspot.com/2024/02/1.html








Saturday, 23 May 2026

वंदे मातरम राष्ट्र के प्रति समर्पण और निष्ठा से भर देता है : भारती दीक्षित Vande Mataram fills one with devotion and loyalty towards the nation:



 


इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती एवं दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी के संयुक्त तत्वावधान में वंदे मातरम की 150वीं जयंती पर शनिवार को दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी, चांदनी चौक में ‘वंदे मातरम गाथा’ विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।

वंदे मातरम की गाथा अपनी जुबानी में सुप्रसिद्ध किस्सागो और चित्रकार भारती दीक्षित ने ओजपूर्ण भाव के साथ सुनाया। ‘वंदे मातरम’ गीत बंकिमचंद्र चटर्जी ने 1875 में लिखा। 1882 में जब ‘आनंद मठ’ उपन्यास उन्होंने लिखा, इस गीत को उपन्यास में स्थान दिया गया। उपन्यास में संन्यासी भवानंद इस गीत को भाव में डूबकर गाता है। बाद में यह गीत संन्यासियों को राष्ट्र के प्रति समर्पण और निष्ठा से भर देता है।

भारती दीक्षित ने इसके लिखे जाने से लेकर बाद में वंदे मातरम से संबंधित जो भी महत्वपूर्ण घटनाएं घटीं– उन सबको समाहित कर किस्सागो रूप में प्रस्तुत किया। कैसे 1896 में कांग्रेस के वार्षिक अधिवेशन में युवा कवि रवींद्रनाथ ठाकुर के सुमधुर कंठ के गान ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवि रवींद्रनाथ ठाकुर द्वारा फिर से 1906 के कांग्रेस के वार्षिक अधिवेशन में गाया गया और इसे राष्ट्रीय प्रसिद्धि मिली। बंगाल विभाजन के विरुद्ध यह जनता को एकीकृत करने का निमित्त बन गया। बंगाल से होते हुए 1907 में नागपुर और फिर 1907 में ही जर्मनी, फिर ब्रिटेन। अंग्रेज जितना ही इसे रोकने की कोशिश करते रहे, इस पर प्रतिबंध लगाते रहे, यह उतना ही प्रसिद्ध होता गया।

भारती दीक्षित ने वंदे मातरम के स्वतंत्रता संग्राम में महत्व से लेकर अब तक के इसके सफर को ओजपूर्ण भाव के साथ प्रस्तुत किया। दर्शक-श्रोता भाव में डूबे हुए सुनते रहे, समय का जैसे लोप हो गया था। 50 मिनट की प्रस्तुति ने लोगों को अपने में बांधे रखा।

कार्यक्रम के प्रारंभ में अपने स्वागत वक्तव्य में इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के अध्यक्ष विनोद बब्बर ने वंदे मातरम की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि रावण पर विजय के पश्चात् जब विभीषण ने भगवान श्रीरामचंद्र से श्रीलंका में ही कुछ दिन रुकने का आग्रह किया तब उन्होंने कहा, 'जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है और मुझे अपनी जन्मभूमि की याद आ रही है इसलिए मुझे जाना होगा। उन्होंने इस बात को भी रेखांकित किया कि भले ही वंदे मातरम गीत बंकिमचंद्र चटर्जी ने लिखा है, लेकिन वंदे मातरम का भाव अथर्ववेद में  "माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः" के रूप में सदियों से हमारी संस्कृति में विद्यमान है।

मंच का संचालन इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के उपाध्यक्ष मनोज शर्मा ने किया। परिषद् गीत सुनीता बुग्गा ने प्रस्तुत किया। आरके पुरम विभाग अध्यक्ष मलखान सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के अ.भा. राष्ट्रीय मंत्री नीलम राठी, केंद्रीय कार्यालय मंत्री संजीव सिन्हा, साहित्य परिक्रमा प्रबंधक रजनी मान, इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के संयुक्त महामंत्री बृजेश गर्ग, कोषाध्यक्ष, अक्षय अग्रवाल, दक्षिणी विभाग अध्यक्ष सारिका कालरा, जयसिंह आर्य, जगदीश सिंह, नीलम भागी, नवीन नीरज, मुन्ना रजक, प्रशांत सिंह सहित अनेक साहित्यकारों एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

मनोज शर्मा 'मन' (इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के उपाध्यक्ष)

https://www.instagram.com/reel/DYsHGFiSyz3/?igsh=MTR4a2pnMnlxM3hleQ==








Friday, 22 May 2026

सागर तट वेनिस बीच लॉस एंजेलिस Venice Beach, Los Angeles California Neelam Bhagi Migration to America नीलम भागी

 


उत्कर्षनी किनारे पर ही खड़ी होकर लहरों का आनंद उठा रही है क्योंकि दित्या पास में ही गीली रेत से  बैठी खेल रही है । अब मैं उसके पास लहरों को छुती हुई, किनारे किनारे गीली रेत पर चलती हुई जा रही हूं।  इस पर चलना आसान है । उसने मुझे कुछ सीपियाँ दी जो मैं लेकर, जाकर अपनी कुर्सी पर बैठ गई और सागर तट का आनंद उठाने लगी। वेनिस बीच लॉस एंजेलिस, कैलिफ़ोर्निया का सबसे रंगीन और अजीबोगरीब बीच है। इसे "LA का बोर्डवॉक सर्कस" भी कहते हैं। 2.5 मील लंबा पैदल रास्ता, जहाँ स्ट्रीट परफॉर्मर्स, टैटू आर्टिस्ट, वेंडर्स, स्केटर्स और अजीबो-गरीब कैरेक्टर्स हर वक्त मिलते हैं। म्यूजिशियन ड्रम बजाते हैं, पेंटर 10 मिनट में तुम्हारा पोर्ट्रेट बना देते हैं, और सूर्य स्नान के लिए  लोग रेत पर उल्टे लेटे रहते हैं। आउटडोर जिम जहाँ बॉडीबिल्डर्स वर्कआउट करते हैं। अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर 80s में यहाँ ट्रेनिंग करता था। अब भी यहाँ जिम इक्विपमेंट फ्री है और माहौल एकदम मोटिवेशनल रहता है। वेनिस कैनाल्स फोटो खींचने के लिए बेस्ट स्पॉट है ।

  बोर्डवॉक के ठीक किनारे पर फ्री स्केट पार्क है। प्रो स्केटर्स यहाँ ट्रिक्स करते हैं और देखने वालों की भीड़ लग जाती है। 

वेनिस बीच लॉस एंजेलिस का सबसे "अनफिल्टर्ड" हिस्सा है। हिप्पी कल्चर, आर्ट, फ्रीडम और थोड़ी अराजकता सब एक साथ देखने को मिलता है। सुबह शांत रहता है, दोपहर बाद से भीड़ और एनर्जी दोनों बढ़ जाती हैं। इतनी खूबसूरत जगह से गीता, दित्या को लाना बहुत मुश्किल काम है। सर्दी है तब भी  बच्चों को आइसक्रीम का लालच देकर, लेकर आए। सिर और कपड़ों में रेत भरी हुई है। उत्कर्षनी  उन्हें शॉवर कराने लेकर गई। मैं गाड़ी से कुछ दूर बैठकर लोगों को देखती रही, हम लौटने की तैयारी में हैं और लोग यहां आ रहे हैं। भीड़  बढ़ती ही जा रही है। राजीव जी ने सामान की पैकिंग कर ली। गीता दित्या के आने पर हम लोग चल पड़े।  https://www.instagram.com/reel/DYoXEL1xeGf/?igsh=MWd0Z2JpNWlrMjJkag==

https://www.instagram.com/reel/DYkT9xVgjsJ/?igsh=aGljN3ljNThlY2wy