उत्कर्षनी का कहना है 'खुद के लगाये पौधों को देखना सकून देता है।' लॉस एंजेलिस में उसका घर ग्राउंड फ्लोर पर है लेकिन नीचे पार्किंग के लिए बेसमेंट है। काफी जगह है जिसमें दित्या साइकिल चला लेती है। लेकिन गार्डनिंग कंटेनर में करनी पड़ती है। उसने ड्राइंग रूम और बेडरूम के आगे वर्टिकल गार्डनिंग (मतलब दीवार पर या खड़ी संरचना पर पौधे उगाना) की है। जगह कम हो तो ये सबसे बेस्ट तरीका है। लेकिन यहां जगह खूब बचा रखी है क्यूंकि गीता दित्या खूब खेलती हैं। अंदर बैठकर ऐसा लगता है जैसे बगीचे में बैठे हों। लेखन करते हुए, बीच में रुकने पर उसकी निगाहें पौधों पर ही टिकी रहती हैं। इतनी व्यस्त दिनचर्या में भी अपने पौधों के लिए समय निकालती है। बागवानी स्ट्रेस जो कम करती है। हम लोग जब 15 दिन की यात्रा पर गए थे। वह लॉस एंजेलस का मौसम देखती रहती थी। सर्दी की बरसात ने भी पूरा साथ दिया। जब हम लौटते तो कोई भी पौधा सूखा नहीं था।





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