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Saturday, 3 October 2026

महिलाओं की भजनों की डायरी! और भजन-कीर्तन A Diary of Devotional Songs for Women! And *Bhajan-Kirtan*Neelam Bhagi नीलम भागी

 



ज्यादातर होम मेकर महिलाओं की भजनों की डायरी शारदीय नवरात्र, चैत्र नवरात्र और अब 10 दिवसीय गणपति उत्सव में निकलती है। उसमें इन दिनों  कई भजनों का इज़ाफ़ा भी हो जाता है। भजनों की डायरी देखते ही मुझे अपनी अम्मा बहुत याद आती है। 96वें की उम्र तक वह अपनी डायरी संभाल के रखती। रात में कभी-कभी डायरी निकाल के भजन गुनगुनाती। लिंक पर क्लिक करके देखें https://www.facebook.com/share/v/1RRPdECyta/

उनके बाजू में मैं सोती और अगर मैं उनकी डायरी उठाकर कोई भजन गुनगुनाती तो मेरा भजन खत्म होने तक वह मुझे देखती रहतीं, 90 साल के बाद में  ऊंचा सुनने लगीं थीं और मैं धीरे गाती थी जैसे मेरा मुंह बंद होता, तुरंत अम्मा मेरे हाथ से झट से, अपनी डायरी लेकर पर्स में रखती। अम्मा के भजनों की डायरी बहुत कीमती दस्तावेज! था जिसे उन्होंने कह रखा था कि आशा को देना। वह मेरे साथ बहुत सुंदर गवाती है। उनके स्वर्गवास होने पर आशा जी को उनकी डायरी दी इसके कई पेज निकले हुए थे पुरानी जो बहुत थी। 😃 आशा भाभी जी ने भी बड़े सम्मान से ली।

आजकल तो ज्यादातर महिलाएं मोबाइल में देखकर भजन गाती हैं। 95वें साल में मैं भी अम्मा को मोबाइल में, मोहम्मद रफी के गाए भजन निकाल देती थी, अम्मा पढ़ के साथ-साथ स्वर मिला कर गाती थी। लिंक पर क्लिक करके सुने https://www.instagram.com/reel/DGEEC_FTqAF/?stkn=OGg2b3NmamoxeGFw

अब हमारे सेक्टर में छाया आर्य जी के घर में 10 दिवसीय गणपति उत्सव मनाया गया है। जिसमें आमंत्रित श्रद्धालु महिलाओं द्वारा प्रतिदिन शाम को 4:00 से 7:00 बजे तक भजन कीर्तन होता था। मेरे घुटने में दर्द था, इलाज चल रहा है। छाया जी का घर मेरे घर के पास है। धीरे-धीरे किसी तरह चली जाती। भाव प्रधान भजन होते, ढोलक मंजीरे के साथ सब मिलकर कीर्तन करते। घुटने का दर्द याद भी नहीं रहता था। पता नहीं क्यों मुझे महिलाओं की भजन की डायरियां देखना, बहुत अच्छा लगता है। जिसे भजन गाने के तुरंत बाद, वे अपने बैग में रख लेती हैं। इस भजन कीर्तन में बहुत श्रद्धा भाव होता और जमकर भक्ति नृत्य भी होता। एक दिन कीर्तन में भजन गाने का मुझे भी जोश आ गया। मैंने अपने पास में बैठी एक भाभी से कहा, " अपनी जरा डायरी दिखा दो, शायद इसमें मेरी पसंद का कोई भजन मिल जाए जिसकी धुन मैं ठीक से गा सकूं।" वह भाभी स्कूली छात्रा की तरह मेरे मोबाइल की तरफ इशारा करके बोली, "अपने मोबाइल से ढूंढ कर गाओ ना।" और डायरी तुरंत बैग में डालकर बैग का मुंह बंद कर दिया। मुझे उनकी इस हरकत पर बहुत मज़ा आया। भोजन प्रसाद के समय मैं हंसते हुए दूसरी भाभियों से उनकी शिकायत करने लगी, "देखो मैंने इनसे डायरी मांगी थी, कोई पीएचडी की थीसिस थोड़ी मांगी, इन्होंने मुझे नहीं दिखाई।" वह मुझे कहें, "तुम अब ले लो।" और डायरी दे रहीं  पर मुझे तो मज़ाक सूझ  रहा था। मैं बोली, "इनकी वजह से मेरा भजन गाना शुरू नहीं हुआ।"  कीर्तन से आने के बाद थोड़ा पढ़ने लिखने के बाद मैं सो जाती। और दर्द सहने लायक लगता। पर उस दिन आकर मैंने भगवान कृष्ण को कौन किस-किस नाम से पुकारता था, लिखकर एक भजन बनाया और अगले दिन ताज़ा ताज़ा गा भी दिया। इस प्रकार हंसते, बतियाते, गणपति उत्सव में शाम के कीर्तन में श्रद्धा भक्ति से गाए सुने, सामान्य भजनों ने मन में प्रसन्नता के साथ सकारात्मक ऊर्जा भी फैलाई। मोबाइल के समय में अम्मा के समय से चली आ रही डायरियां भी नजर आई।💐🙏😃

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