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Wednesday, 31 December 2025

ग्रैंड कैन्यन नेशनल पार्क, Brahma, Vishnu, Rama Grand Canyon National Park Neelam Bhagi नीलम भागी अमेरिका प्रवास

 

लॉस एंजेलिस से 15 दिन के लिए यात्रा पर निकले हैं। क्रम छोड़ कर, आज 12वें दिन की यात्रा लिखने लग गई हूं। साधारण महिला हूं जियोलॉजिस्ट तो नहीं हूँ। 3 बजे से मौसम बरसात दिखा रहा था और यहां पर 4 बजे से अंधेरा होना शुरू हो जाता है। धूप आज वैसे ही नहीं निकली थी। ठंड भी बहुत थी। जहां भी कुछ लिखा हुआ दिखा, मैंने फोटो ले ली कि होटल में जाकर पढ़ूंगी। फोटो ले रही थी, गीता बुलाने आई। राजीव उत्कर्षनी ने धरती की परतों के नामो की ओर इशारा कर दिया, वे ख़ुश थे और मैंने फोटो ली। अब तस्वीर देखते हुए, ब्रह्मा, राम और विष्णु तीन नाम पढ़कर लिखने बैठ गई। ग्रैंड कैन्यन नेशनल पार्क अमेरिका के एरिजोना राज्य में स्थित एक विश्व प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान है, जो अपने विशाल और गहरे कैन्यन के लिए प्रसिद्ध है। यह उद्यान कोलोराडो नदी द्वारा बनाया गया है, जो लाखों वर्षों से इस क्षेत्र में बह रही है और एक अद्वितीय भूगर्भिक संरचना का निर्माण किया है।

विशाल कैन्यन  ग्रैंड कैन्यन दुनिया के सबसे बड़े और सबसे गहरे कैन्यनों में से एक है, जो 277 मील लंबा, 18 मील चौड़ा और एक मील गहरा है।

कोलोराडो नदी ने लाखों वर्षों में इस कैन्यन का निर्माण किया है और अब भी इसमें बह रही है।

अद्वितीय भूगर्भिक संरचना ग्रैंड कैन्यन की दीवारें विभिन्न भूगर्भिक परतों को प्रदर्शित करती हैं, जो इसकी अद्वितीयता को दर्शाती हैं।

इसमें यवापाई जियोलॉजी म्यूजियम है। यह म्यूजियम पार्क के दक्षिणी रिम पर स्थित है और ग्रैंड कैन्यन के भूगर्भिक इतिहास को प्रदर्शित करता है। म्यूजियम में ग्रैंड कैन्यन के भूगर्भिक इतिहास को प्रदर्शित करने वाले प्रदर्शन हैं, जिनमें चट्टानों की परतें, भूगर्भिक मॉडल और इंटरैक्टिव प्रदर्शन शामिल हैं। म्यूजियम के पास ट्रेल ऑफ टाइम है, जो एक आउटडोर जियोलॉजी प्रदर्शन है जो ग्रैंड कैन्यन के 2 अरब वर्षों के इतिहास को प्रदर्शित करता है। इसमें granite Gorge metamorphic suite 1752- 1680 million-years-old

Vishnu Schist

Rama Schist

Brahma Schist

पढ़कर विस्मय विमुग्ध हो गई। परत कितनी पुरानी है ब्रह्मा, विष्णु, राम जी के समय की।  क्रमशः






https://www.instagram.com/reel/DS89UTMgGBL/?igsh=cTJhOHZvYWw0anVn



कैंटर का रेस्टोरेंट, लॉस एंजेलिस, कैलिफोर्निया Canter's restaurant Los Angeles, California Neelam Bhagi नीलम भागी Part 10

 


यहां हमारी पांच लोगों के लिए वेटिंग थी। इंतजार करते हुए राजीव जी  इसके बारे में बताने लगे।

कैंटर का रेस्टोरेंट लॉस एंजेलिस में एक प्रसिद्ध यहूदी डेलि है, जो अपने पारंपरिक व्यंजनों और विशिष्ट वातावरण के लिए जाना जाता है। यहाँ कुछ विशेषताएं हैं:

पास्टरामी सैंडविच कैंटर का सबसे प्रसिद्ध व्यंजन, जो अपने अनोखे स्वाद और बड़ी मात्रा के लिए जाना जाता है।

मैट्जो बॉल सूप एक पारंपरिक यहूदी व्यंजन, जो अपने स्वादिष्ट सूप और मैट्जो बॉल्स के लिए प्रसिद्ध है।

कैंटर का एक और प्रसिद्ध व्यंजन, चिकन सूप जो अपने लाजबाब  स्वाद के लिए जाना जाता है।

कैंटर की बेकरी अपने ताजे और स्वादिष्ट पेस्ट्रीज़ के लिए प्रसिद्ध है, जिनमें चीज़केक, आटे की रोटी, और अन्य शामिल हैं।

हमारा नंबर आ गया। मेरे लिए आर्डर हमेशा उत्कर्षनी करती है क्योंकि मेरा वेजीटेरियन होता है। जब तक हमारा आर्डर आ रहा था, राजीव जी ने मुझे रेस्टोरेंट घुमा दिया।

कैंटर का स्टाफ अपने मित्रवत और  सेवा के लिए जाना जाता है।

कैंटर का रेस्टोरेंट लॉस एंजेलिस में एक अवश्य देखे जाने वाला स्थान है, जो अपने स्वादिष्ट व्यंजनों और पारंपरिक वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। क्रमशः 






Tuesday, 30 December 2025

दा ग्रोव फार्मर्स मार्केट लॉस एंजेलिस, कैलिफोर्निया The Grove Farmers Market Los Angeles, California Neelam Bhagi नीलम भागी


डिनर के लिए हमें बाहर जाना था। राजीव उत्कर्षनी के अति व्यस्त होने के कारण उनके सब काम समय बद्ध थे। गीता को जैकेट लेनी थी पर लेनी राजीव जी की पसंद की थी क्योंकि उनकी पसंद बहुत अच्छी  है।  राजीव जी गीता की यात्रा की शॉपिंग के गए। उत्कर्षनी  मुझे और दित्या को दा ग्रोव फार्मर्स मार्केट में क्रिसमस की लाइट दिखाने ले गई।  लॉस एंजेलिस, कैलिफोर्निया में यह एक लोकप्रिय स्थल है, जो एक ऐतिहासिक फार्मर्स मार्केट और एक आधुनिक आउटडोर शॉपिंग मॉल को मिलाकर बनता है।

- यह ऐतिहासिक मार्केट 1934 से संचालित हो रहा है और इसमें 100 से अधिक विक्रेता हैं जो ताजे फल, मांस, डेयरी उत्पाद और विभिन्न प्रकार के भोजन बेचते हैं।

- यहाँ आप विभिन्न प्रकार के अंतरराष्ट्रीय व्यंजन पा सकते हैं, जिनमें मैक्सिकन, एशियाई, ब्राज़ीलियाई और इतालवी भोजन शामिल हैं।

कुछ लोकप्रिय खाद्य विक्रेताओं में पैट्सी डी'अमोरे की पिज़्ज़ेरिया, पामेला केम्पनाडास और लोटेरिया ग्रिल शामिल हैं।

द ग्रोव

यह आउटडोर शॉपिंग मॉल ओरिजिनल फार्मर्स मार्केट से जुड़ा हुआ है और इसमें उच्च-स्तरीय और किफायती स्टोर शामिल हैं, जिनमें नॉर्डस्ट्रॉम, माइकल कोर्स और गैप शामिल हैं।

द ग्रोव में विभिन्न प्रकार के भोजन विकल्प भी हैं, जिनमें द चीज़केक फैक्टरी, ला पियाज़ा और पिकनिक सोसाइटी बाय ग्वेन शामिल हैं।

द ग्रोव का फव्वारा शो एक आकर्षक स्थल है। गर्मियों में जब मैं यहां आई थी तब भी यहां घूमना बहुत अच्छा लगा। अब क्रिसमस और नए साल के लिए बहुत सुंदर सजाया गया है। बहुत बड़ा वास्तविक क्रिसमस ट्री लगाया गया है जिसकी सजावट देखते बनती है। गीता की शॉपिंग हो गई थी। वह अपने पापा के साथ, मैं और दित्या उत्कर्षनी के साथ डिनर के लिए Canter's पहुंचे।

क्रमशः

https://www.instagram.com/reel/DPLCAOQEeCx/?igsh=MTU3aDdqN2t6ZzF2ZQ==

https://www.instagram.com/reel/DPIMXHhEvfR/?igsh=MXRucmN1NWhnZHZheg==

https://www.instagram.com/reel/DPDLJLHEUmP/?igsh=bDhoZnVsa3ZzY3po

https://www.instagram.com/reel/DPBKkrnEdcp/?igsh=N2R4N2l4aGV5dzZj









Sunday, 28 December 2025

पौधों की चिंता! Worry about the plants! Migration to America अमेरिका प्रवास Neelam Bhagi

 


वेकेशन पर जाने से पहले उत्कर्षनी को पौधों की बहुत चिंता थी। उसने ड्रॉप सिस्टम से पानी देने के लिए बोतलों पर लगाने के लिए क्लिप भी खरीद लिए। हालांकि सर्दी में पानी की ज्यादा जरूरत नहीं होती फिर भी वह 15 दिन का रिस्क नहीं ले सकती थी। पौधों का उसको बहुत शौक है। इसने कंटेनर गार्डनिंग की हुई है। मुझे तो शौक है ही। राजीव जी और उत्कर्षनी अपने कामों को पूरा करने में व्यस्त थे। मैं पौधों की देखरेख और व्यवस्था में लग गई। उनकी कटाई छटाई कर दी ताकि कम पानी में मरे नहीं। क्रमशः 





Saturday, 27 December 2025

यहाँ बच्चे स्कूल खुशी से जाते हैं!Here children go to school happily!!! Migration to America अमेरिका प्रवास Neelam Bhagi

 


शुक्रवार को मेरे उठने से पहले ही गीता स्कूल जा चुकी थी। दित्या के स्कूल जाने के लिए आज राजीव जी के साथ उत्कर्षनी भी तैयार थी। दित्या ने बहुत सुंदर सी फ्रॉक पहनी, उनकी स्कूल में यूनिफार्म नहीं है। बालों में बटरफ्लाई क्लिप लगाकर तैयार थी। उनके  स्कूल में शुक्रवार को सुबह छोटे बच्चे किसी एक क्लास के म्यूजिक की परफॉर्मेंस देते हैं। आज स्कूल का आखिरी दिन था इसलिए सभी कक्षाओं  के छोटे बच्चे थे।  हमेशा छोटे-छोटे बच्चों को ही पढ़ाया है पर यहां मैं बहुत ही प्रभावित थी। जिस  क्लास का परफॉर्मेंस होता, वो स्टेज पर आते थे म्यूजिक पर परफॉर्मेंस देते थे। बाकी बच्चे सामने बैठकर सुनते और उनकी टीचर भी बच्चों के बीच में ही नीचे बैठी हुई। कोई बच्चा टीचर की गोद में भी बैठा होता। सामने एक टीचर बच्चों के सामने और पेरेंट्स के बीच  टेडी बियर लेकर गाने के साथ टैडी से मूवमेंट देती।बच्चे पूरी मस्ती में गाते, पेरेंट्स ग्रैंडपेरेंट्स सब बच्चों की परफॉर्मेंस का आनंद उठा रहे थे। इससे मुझे नहीं लगता किसी बच्चे में स्टेज फीयर बचता होगा। कल जब मैं दित्या के स्कूल में आई थी तो राजीव जी ने मुझे एक जगह इशारा करके बताया कि यहां बच्चे जो सामान छोड़ जाते हैं, उसे रख दिया जाता है। पेरेंट्स आकर ले जाते हैं या बच्चे खुद ही अगले दिन उठा लेते हैं। आज यहां पर  स्टैंड पर बच्चों की जैकेट वगैरा हैंगर से टंगी हुई थीं और दूसरा सामान भी। पेरेंट्स इसमें से अपना सामान ढूंढ रहे थे। आज जो नहीं ले जाएंगे तो यह सब कुछ डोनेशन में चला जाएगा। म्यूजिक परफॉर्मेंस देखने के बाद पेरेंट्स घर जा रहे थे। किसी बच्चे ने उनके साथ घर जाने की जिद नहीं की।  खुशी से हंसते हुए अपनी टीचर के साथ क्लास में जा रहे थे। मैं तो यहां की हर बात से प्रभावित हूं और आज तो नर्सरी किंडर गार्डन देखकर   और ज्यादा प्रभावित हो गई। कल से छुट्टियां है। क्रमशः 







क्रिसमस नया साल की छुट्टियों से पहलेBefore the Christmas New Year holidays Migration to America अमेरिका प्रवास Neelam Bhagi

 


शाम को गीता के स्विमिंग क्लास में पार्टी थी, जिसमें पेरेंट्स भी भाग ले रहे थे। सभी को कुछ न कुछ ले जाना था, जो पहले से निश्चित था। उत्कर्षनी को स्विमिंग नहीं आती। राजीव जी बहुत अच्छे तैराक हैं इसलिए गीता बहुत खुश थी कि उसके पापा प्रतियोगिता में भाग लेंगे। दित्या की सॉकर की क्लास थी। मैं राजीव जी के साथ उसे स्कूल से लेकर उसकी सौकर की क्लास में गई जो तीसरी मंजिल पर ओपन में थी । यहां की यह बात मुझे बहुत पसंद है, जिस बच्चे की जो भी क्लास होती है, सामने पेरेंट्स के बैठने की व्यवस्था होती है। हम अपने बच्चों की हर एक्टिविटी देख सकते हैं। राजीव जी वहाँ से चले गए थे। लेकिन आज दित्या ने कसम खाली कि नहीं खेलना है और बिल्कुल भी नहीं खेली। दित्या क्लास से बाहर आकर मुझे जो भी शैतानियां करके दिखा सकती थी, करने लगी। फिर कहने लगी, लिफ्ट से नीचे चलते हैं। मैं तो यहां कुछ भी नहीं जानती। आज यहां मेरा दूसरा दिन था। मैंने मना कर दिया। उसके दिमाग में था कि वह नानी के साथ में कुछ भी कर सकती हैं। मेरे मना करते ही, अब वह गुस्से में आ गई। क्लास के बाद कोच ने सब बच्चों के गले में मैडल डालें, फोटो खींचे। दित्या को खूब बुलाया, वह नहीं गई। कोच ने बाहर आकर, इसके भी गले में मैडल डाला। मैंने राजीव जी को कॉल किया। वह तुरंत आ गए। उन्होंने बताया कि उत्कर्षनी मुझे लेने आ रही है। वहीं पर वे दित्या को चाइल्ड एक्टिविटी रूम में ले गए। उन्होंने आकर मुझे बताया कि आपके कारण ऐसा कर रही थी अब उसे लगा कि आप चली गई हो, वह खिलौनो से खेल रही है। मैं फिर भी उसे देखने गई। उसकी मेरी तरफ पीठ थी वह मस्त खेल रही थी। इतने में उत्कर्षनी मुझे लेने आ गई। हम लोग  स्विमिंग स्कूल में गए। राजीव भी दित्या को लेकर आ गए। गीता की स्विमिंग की क्लास खत्म हो चुकी थी। वह बहुत खुश थी कि उसके पापा पार्टिसिपेट करेंगे।  पार्टी भी चल रही थी। बहुत ही अनुशासन पहले स्टूडेंट ले रहे थे, बाद में पेरेंट्स। जब पेरेंट्स पूल में उतरे, उनके बच्चों ने इतना शोर मचा के उनको उत्साहित किया, जिसे देखकर आनंद आ रहा था। गीता दित्त्या का तो चिल्ला चिल्ला कर गला बैठ गया था। ओपन स्विमिंग पूल 4:30 बजे सूरज डूब जाता है 8:00 बजे प्रतियोगिता थी। अब एहसास हो रहा था कि ठंडे पानी में गीता की स्विमिंग की प्रैक्टिस करना। यहां बच्चों को बबुआ बना कर नहीं पालते हैं। पूल साइड पार्टी में भी कहीं भी एक टुकड़ा कचरा नहीं! कल के बाद 15 दिन की छुट्टियां हैं।

क्रमशः

https://www.instagram.com/reel/DSvAD7oAOvd/?igsh=MW00Y29qZXoyeGtnYw==





Thursday, 25 December 2025

यहां की दिनचर्या The daily routine here Migration to America अमेरिका प्रवास Neelam Bhagi

 


सुबह मेरी आंख खुलने से पहले ही गीता को उत्कर्षनी, उसकी स्कूल बस में छोड़ आई थी। गीता का स्कूल काफी दूर है। घर से 10 मिनट की दूरी पर बस का स्टॉप है, अगर स्कूल बस मिस हो जाए तो एक घंटा ड्राइव करके जाना पड़ता है। वह घर से बहुत जल्दी निकलती है वैसे तो उसे राजीव जी छोड़ने जाते हैं। लेखन का काम पूरा करने के कारण आजकल वह सुबह 4:00 बजे उठती है इसलिए वह छोड़ आती है। दित्या का स्कूल 8:00 बजे से है, इसे राजीव  छोड़ने जा रहे हैं और दित्या मुझे लेकर जा रही है। उसे मुझे अपना स्कूल जो दिखाना है। गाड़ी से उतरते ही उसने मेरी  उंगली पकड़ ली।




 स्कूल में ले जाकर, अपनी क्लास,  म्यूजिक रूम आदि दिखाया जो भी टीचर मिली उसे बताया,  'मेरी नानी'। मैंने देखा दित्त्या की तरह बच्चे स्कूल में बहुत खुशी आ रहे थे किसी भी बच्चे के चेहरे पर, स्कूल जाने की वजह से उदासी नहीं थी। शाम को उत्कर्षनी के साथ मैं  गीता को स्कूल बस से लेने गई और वहीं से वह उसे स्विमिंग की क्लास में ले गई। गीता अपनी कैटेगरी में काँस्य पदक  ले चुकी हैं। राजीव जी  दित्या को लेने गए। गीता के स्विमिंग के समय हम दोनों बाहर वॉक करते रहे और आसपास के घरों में क्रिसमस की सजावट का भी आनंद उठाते रहे। हमारे घर आने पर, दित्त्या मेरा इंतजार कर रही थी। गीता तो आते ही अपने होमवर्क में व्यस्त हो गई। उत्कर्षनी ने डिनर बनाया , शनिवार सुबह हमें 15 दिन की यात्रा में निकलना है। राजीव जी इसकी भी व्यवस्था देख रहे हैं। यहां बाई कलचर नहीं होता इसलिए सब काम मिलजुल कर खुद ही करते हैं। 8:00 बजे डिनर हो गया और 9:00 बजे गीता सो गई। दित्त्या को देर से जाना है इसलिए उसने मेरे साथ खूब मस्ती की उसका कोई होमवर्क नहीं मिलता,  खूब ज्ञानी है, खेल-खेल में सिखाते हैं और वह मेरे गले में बाहें डालकर सोई। क्रमशः

https://www.instagram.com/reel/DSqAmpdEbfI/?igsh=c21pd3JvcGIyMHRm

Wednesday, 24 December 2025

दित्त्या नमस्ते पहले जैसे ही करती है Ditya says Namaste as before. Migration to America अमेरिका प्रवास Neelam Bhagi ,

 

जब मैं लॉस एंजेलिस  पहुंची थी तो 4:00 बजे शाम हो चुकी थी और 4:30 बजे अंधेरा हो गया। 17 दिसंबर को सिर्फ एक ही जैकेट में घूम रही थी। 2 महीने पहले जब मैं यहां से लौटी थी तो 8:00 बजे रात रोशनी रहती थी। राजीव जी बोले, "दित्त्या को सरप्राइज देते हैं, पहले उसे स्कूल से लेने जाते हैं।" इतने में उत्कर्षनी का फोन आ गया कि मम्मी को ले लिया है? हाँ सुनते ही उत्कर्षनी ने और गीता ने बात की। गीता स्विमिंग क्लास में जाने के लिए आना कानी करने लगी। फिर मेरे समझाने पर जाने को राजी हो गई। दित्या स्कूल में मुझे देखते ही बहुत खुश हुई। उसमें बहुत बदलाव आ गया। प्ले से, नर्सरी किंडर गार्डन में चली गई। अब बात इंग्लिश में ही करती है। हिंदी समझती है, थोड़ा बोलती भी है पहले की तरह नहीं कि मुझसे तो हिंदी में ही बात करनी है। बस उसमें एक बात नहीं बदली, नमस्ते वह दोनों हाथ जोड़कर ही करती है। अगर उसके हाथ में कोई सामान भी हो तो उसको रखेगी, पर नमस्ते हाथ जोड़कर ही करेगी। उसके पूरे स्कूल में दो ही भारतीय बच्चे हैं। थोड़ी बहुत स्पेनिश भी बोल लेती है।  हम घर पहुंचे कुछ देर बाद उत्कर्षनी  गीता भी आ गए। गीता के मेरे गले लगते ही, दित्या नाराज होकर दूर बैठ गई क्योंकि नानी सिर्फ उसकी है।

 


रात को उत्कर्षनी ने बताया कि 18 से बच्चों की क्रिसमस और न्यू ईयर की छुट्टियां हो रही हैं। वह लोग ऑन रोड घूमने के लिए निकल रहे हैं। वह लगातार लेखन में व्यस्त है क्योंकि वह कमिटमेंट की पक्की है । तब तक वह भी अपना लेखन पूरा कर लेगी। हम बच्चों के साथ ब्रेक ले रहे हैं। राजीव जी साथ-साथ यात्रा की तैयारी में व्यस्त हैं। क्रमशः  

Tuesday, 23 December 2025

लंदन से लॉस एंजेलिस, अमेरिका प्रवास London to Los Angeles, नीलम भागी

 


अमेरिकन एयरलाइंस में भी मेरी दो वाली रो में विंडो के साथ साइड सीट थी। उत्कर्षनी को ऐसा लगता है कि  मैं किसी को डिस्टर्ब नहीं करूंगी। चलने फिरने में वॉशरूम जाने में मुझे दिक्कत नहीं होगी। मेरे संकोची स्वभाव के कारण अगर मैं, मेरी विंडो सीट में होगी तो अपने साथी यात्री को परेशान न करने के कारण, मैं बैठी न रहूं। मेरे साथ की विंडो सीट में एक अत्याधुनिक सुंदरी विदेशी महिला आकर बैठी। जिसे देखकर मैं सोचने लगी कि ऊपर तो इसने हुडी वाला जैकेट पहना है, नीचे छोटी सी स्कर्ट! क्या सर्दी भी लगने में शरीर का भेदभाव करती है। उस महिला का स्वभाव बहुत अच्छा था। उसने मुझसे पूछ कर, सबसे पहले मेरा लगेज़ उठाकर ऊपर रखा। फिर अपनी चारों दिशाओं में डिसइनफेक्ट स्प्रे (Disinfectant sprey) किया! उसके बाद टिशू पेपर पर सैनिटाइजर लगाकर सीट को खूब रगड़ रगड़ कर पोछा। अपने आगे की सीट की पीठ सैनिटाइजर से  पोछी। थोड़ी-थोड़ी देर बाद हाथों पर सैनिटाइजर लगाती। इस फ्लाइट का माहौल, ब्रिटिश एयरवेज से बिल्कुल अलग था। टेक ऑफ होते ही, साइड बटन दबाकर मैंने अपनी सीट पीछे कर ली और टांगों के लिए सपोर्ट लगा लिया। मील सर्व होने लगा, तो साइड बटन दबाया, मेरे आगे फोल्डिंग मेज की तरह ट्रे लग गई। उसने अपनी ट्रे को खूब सेनीटाइज किया। उसका नॉनवेज खाना था। मुझे खाना देने से पहले एयर होस्टेस बोली, "आपका स्पेशल खाना!"  खाना देखकर मुझे बहुत हंसी आई। तीन स्क्वायर प्लेट, एक में सलाद, , दूसरी में कटे हुए फल, तीसरी प्लेट में तीन लाइनों में पहली लाइन में उबली गाजर, गोभी, बींस, दूसरी लाइन में चावल, तीसरी लाइन में शाही पनीर, एक शीशी में सीजनिंग, नमक और काली मिर्च का पाउडर, और न जाने क्या-क्या। मेरी स्वर्गीय अम्मा इस खाने को देखकर कहती, "चावल तो आधी कटोरी भी नहीं हैं।"  इन सब के कवर उतारते ढेर लग गया। इसमें उसमें कुछ न कुछ मिलाते हुए, स्वाद खाते हुए, मुझे ध्यान आया कि मुझे तस्वीर लेनी चाहिए थी। फोटो ले तो अभी भी सकती थी। पर पर्स मेरा पैरों के पास रखा था, उसमें मोबाइल था। उसको उठाने के लिए आगे से इतना खाने का सामान हटाना! सुंदरी को परेशानी न हो इसलिए रूक गई। लैंड  करने से पहले जो मुझे वेजीटेरियन मील सर्व हुआ उसकी फोटो ले ली। ये पहले वाले से कम था।


कुछ समय बाद सुंदरी भी नॉर्मल हो गई। तीन बार वॉशरूम गई, बिना सैनिटाइजर के 😃। लैंड करते ही उत्कर्षनी को फोन किया। उसने कहा, " आपको लेने राजीव आ रहे हैं। वह गीता को स्कूल से लेकर, स्विमिंग के लिए ले जाएगी।" सुंदरी ने बिना कहे मेरा ऊपर से लगे ज़ उतार दिया। प्लेन से बाहर आते ही, असिस्टेंट ने मुझे ले लिया और इमीग्रेशन के लिए ले गई। बाहर आई, राजीव जी ने पिकअप कर लिया। क्रमशः

Monday, 22 December 2025

व्हीलचेयर असिस्टेंट कितना जरूरी है! अमेरिका की ओर How important is a wheelchair assistant! Towards Americaनीलम भागी Neelam Bhagi

 


फ्लाइट के समय असिस्टेंट आ गया था, मैंने कहा, " मैं प्लेन में चली जाऊंगी।" मेरे बाद भी जालंधर की महिला उसके साथ आई थी। वह पहली बार लंदन जा रही थी। बहुत घबराई हुई थी, प्लेन में भी पहली बार बैठ रही थी । असिस्टेंट  उसका  सामान लेकर  उसे प्लेन में पहुंचाने चला गया। 10 घंटे की फ्लाइट थी, उसका माहौल बिल्कुल भारतीय था। एयर होस्टेस भी हिंदी, पंजाबी और इंग्लिश बोल रही थीं। मेनू भी दिया था शायद वाइन की ब्रांड पूछने के लिए, मेरा तो वेजीटेरियन  था और पानी, चाय जूस।


ब्रिटिश एयरवेज में लैंड करने से पहले अनाउंसमेंट हुई। अगर किसी ने कॉन्टैक्ट लेंस लगा रखें हैं तो अपनी आंखें बंद कर ले, नाखून में न जाने क्या करवाया हो तो, मुझे याद नहीं आ रहा है तो अपने नाखून भी 30 सेकंड के लिए ढक लें। और एक स्प्रे पता नहीं कहां से चारों दिशाओं से आया। कुछ लोगों को तो हल्की खांसी आने लगी।

प्लेन 7:45  लैंड किया।  सोने के कारण, मैं रात भर उठी नहीं इसलिए मुझसे खड़ा नहीं हुआ जा रहा था, पर समय था। मैंने सोच लिया कि मैं लास्ट में निकलूंगी तब तक मेरे कदम तकलीफ से चलने लगे। वैसा नहीं था जैसा कभी-कभी एकदम घुटना जाम हो जाता हैं। प्लेन से बाहर आते ही असिस्टेंट ने मेरा अगली फ्लाइट का बोर्डिंग पास देखा और मुझे टर्मिनल 3 की बस में बिठा दिया। बस के रुकते ही, मुझे दूसरा असिस्टेंट सुरक्षा जांच के लिए ले गया। मैंने उसे कह दिया कि अभी मैं चल पा रही हूं क्योंकि व्हील चेयर पर बैठना, मेरा बहुत मजबूरी में होता है। उसने दूसरे यात्री को ले लिया मेरा लगेज़ उसकी व्हीलचेयर में रख दिया। मैं धीरे-धीरे उसके साथ चलती रही। वह रूक रुक कर मेरा इंतजार करता।

अगली फ्लाइट में मुझे 11 घंटे बैठना था।  अब मेरी लंदन हीथ्रो से 11:50 की अमेरिकन एयरलाइंस की फ्लाइट थी। सुरक्षा जांच के बाद अस्सिटेंट ने मुझे कैब में बिठा दिया। जो मुझे एक हॉल  में ले गया और मेरा बोर्डिंग पास वहां बैठे कर्मचारियों को दे दिया। उन्होंने मुझे बैठने को कहा, वहीं पास में ही वाशरूम और पीने का पानी था। हॉल में टीवी, फास्ट चार्जर और बैठने की अच्छी व्यवस्था थी। कुछ देर बैठने के बाद, एयरपोर्ट का मैंने थोड़ा चक्कर लगा लिया। वॉशरूम गई एकदम साफ सुथरे, एक नल खराब था, उस पर बोर्ड लगा था।

अब मैं इस हाल में आकर बैठ गई। यात्रियों पर नजर डाली, सभी असिस्टेंट व्हीलचेयर वाले थे। कर्मचारी, कंप्यूटर में देखकर, महिला को बताता, महिला जोर से यात्री का नाम बोलकर और फ्लाइट नंबर और जिस देश की होती आवाज लगाती। जो बिल्कुल नहीं चल पाता, उसके लिए व्हील चेयर आती जो चल पाता और अपना बोर्डिंग पास पढ़  पाता, उसे वह बाहर कुर्सियों पर बिठा देती। कैब वाला आता और उन्हें उनके गेट नंबर पर इसी तरह प्रायोरिटी लिखी कुर्सियों पर बिठा आता। यहां देश दुनिया के लोग बैठे हुए थे। कुछ तो सिर्फ अपने देश की भाषा जानते थे। फ्लाइट के समय अगर वह यात्री अपना नाम सुनकर नहीं उठा तो असिस्टेंट मोबाइल पर सिर्फ उसका नाम बड़ा करके एक एक सवारी के आगे करती और नाम बोलती जाती। यह प्रक्रिया बोर्डिंग टाइम से पहले हो जाती ताकि कोई वॉशरूम गया है तो तब तक आ जाता यानी फ्लाइट न छूटने की गारंटी। यहां बैठने पर यात्री के चेहरे पर कोई बेचैनी नहीं क्योंकि सारी जिम्मेवारी तो असिस्टेंट ने अपने पर ले रखी है। फ्लाइट में भी बिठा देते हैं और उतरने पर भी ले लेते हैं। और आपको, आपके परिवार के सदस्य को दे देते हैं। अगर यह सुविधा न हो तो मेरे जैसे लोग घुटनों की परेशानी के डर से और विदेश में इतने बड़े-बड़े हवाई अड्डों पर भटक जाएंगे या फ्लाइट मिस होगी और अनुभव भी अच्छा नहीं होगा। मन मसोस कर जाने से रह जाएंगे। अपने परिवार के सदस्यों में भी नहीं जा पाएंगे। विदेश में रहने वालों परिवारों की भी अपनी बहुत जायज़ समस्याएं होती हैं। इस सुविधा के कारण जरूरत के अनुसार आना-जाना दोनों ओर बुजुर्गों का चलता रहता है। 88 साल तक की उम्र में, मेरी अम्मा बिना व्हीलचेयर असिस्टेंट के दिल्ली मुंबई आती जाती थीं। अकेली विदेश यात्रा में मुझे असिस्टेंट की जरूरत है। यात्राएं करती हूं अपने देश में कहीं भी घुटना जाम होता है, किसी की भी तरफ़ हाथ बढ़ा देता हूं। वह मुझे साइड में बैठा देता है किसी दुकान के आगे होते हैं, वह कुर्सी, स्टूल दे देता है। राह चलते दो-चार इलाज भी बता देते हैं। ठीक होते ही मैं फिर चल पड़ती हूं। अजय पिक्चर देखने के बाद, जब मैं उठी, मेरे घुटने का फिर कोई स्क्रु खराब हो गया था। मेरी साथिने बड़ी मुश्किल से मुझे घर लाई 😄।  मुझे भी फ्लाइट के समय असिस्टेंट लेने आ गया। ढाई घंटे वहां बैठकर मैंने अस्सिस्टेंट व्हील चेयर की सेवा की उपयोगिता पर ध्यान दिया और मैं सेवा के लिए साधुवाद देती हूं। क्रमशः     

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Wednesday, 17 December 2025

दिल्ली से लंदन की फ्लाइट The best airport Part

 


इस बार मेरी फ्लाइट लंदन से होकर लॉस एंजेल की थी। पहली बार अमेरिका जाने पर जो लंबी फ्लाइट के कारण घबराहट थी, वह इस बार बिल्कुल नहीं थी। इसका कारण था, गीता दित्या का मोह। दित्या तो उंगली पर गिनती, कब मैं आऊंगी लेकिन उसकी उंगली बदलती नहीं थी, एक ही रहती थी। 10वें दिन तक मेरा पहुंचना, गिनती उसकी दस उंगलियों पर थी इसलिए वही ऊंगली मेरे पहुंचने तक थी। प्रीमियम क्लास थी, इसमें मैं 44 किलो सामान ले जा सकती, एक बड़े बैग में सामान रखा और एक हाथ का बैग लिया। रात 10:00 बजे हमें फ्लाइट के लिए निकलना था। अंकुर कहता रहा, जल्दी घर आ जाना। मैं  कुछ न कुछ काम में  उलझी रही। लेकिन खुश थी कि अपने समय से देने वाले आर्टिकल पूरे कर लिए। 7:30 बजे अंकुर का फोन आया मैं कैब भेज रहा हूं, पैकिंग तो मैंने कर ही रखी थी। कैब आ गई और मैं उसके घर चली गई। उसका वर्क फ्रॉम होम था। श्वेता मेरी फिर से पैकिंग करने लगी और मेरे बड़े लगेज़ का कुछ सामान निकाला क्योंकि उसमें 22 किलो से अधिक नहीं होना चाहिए था यानी दो लगेज, एक एक 22 किलो का। वह अपने आप एडजस्ट करती रही। इन हैंड वाले को भी चेकिंग का किया। एक बैग मैं वैसे ही ले गई थी कि फालतू सामान इसमें छोड़ दूंगी. वह मेरे इन हैंड का बैग बना। पिछली अमेरिका यात्रा से पहले यात्रा में मेरी सेहत के हिसाब से श्वेता अंकुर समझाते रहे। लंबी फ्लाइट में कैसे कुछ-कुछ समय के बाद उठना है। इस बार हंस रहे थे। इतनी जल्दी दूसरी बार अमेरिका जा रही हो, अब तो आपको सब कुछ याद है। एयरपोर्ट पर पहुंचते ही असिस्टेंट को श्वेता ले आई। अंकुर मेरे साथ गाड़ी में ही रहा. अस्सिटेंट मुझे चेकिंग के लिए अमेरिकन एयरलाइंस में ले गया। उन्होंने कहा कि आपका लंदन तक की फ्लाइट  ब्रिटिश एयरवेज में है। असिस्टेंट अमेरिकन एयरवेज की फ्लाइट के साथ का था। उसने मुझे वहीं पर छोड़कर पल्ला नहीं झाड़ा। मुझे ब्रिटिश एयरवेज के काउंटर पर छोड़ और दूसरे असिस्टेंट को बुलाकर लाया।  मुझे उसे हैंडोवर किया। बस सुरक्षा जांच में ऐसा लग रहा था, मानो पंजाब में पहुंच गए हो। मेरी ट्रे में मेरा मोबाइल और पर्स था, दूसरी ट्रे में हैंडबैग जैकेट शॉल। आफ़ती  मानसिकता  के एक आदमी ने आफत के मारे ने, अपनी ट्रे को इस तरीके से धक्का दिया,  शायद मशीन  जल्दी-जल्दी ट्रे लेने लगेगी। मेरे मोबाइल वाली ट्रे गिर गई मोबाइल जाकर दूर पड़ा। मैं सकते में! आजकल के समय में विदेश जाते समय मोबाइल खराब हो जाए तो क्या हालत होती है! पर अंदर से एक पुलिस वाले ने उठाकर, मुझे दिया। मोबाइल ठीक था फिर मैंने उस व्यक्ति से कहा कि आपकी इस घटिया हरकत में मुझे कितनी परेशानी में डाल देना था! सब काम सिस्टम से हो रहा है। आपको आफत क्या है? फ्लाइट अपने समय से ही जाएगी। भारत से बाहर जा रहे हो सब काम लाइन से और तमीज से करने की आदत डालिये। सुरक्षा जाँच के बाद अस्सिटेंट मुझे बोर्डिंग गेट पर छोड़ गया और बोलकर गया कि फ्लाइट के समय आ जाएगा।  मैंने उसे मना किया कि प्लेन में, मैं चली जाऊंगी क्योंकि मेरा इन हैंड सामान तो 2 किलो भी नहीं था लेकिन वह बोर्डिंग के समय आया। क्रमशः

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Thursday, 11 December 2025

दिल्ली से रीवा की ओर Delhi to Rewa नीलम भागी Neelam Bhagi

 


दिल्ली से रीवा की ओर 17 वां अखिल भारतीय साहित्य परिषद का राष्ट्रीय अधिवेशन 7,8,9 नवंबर को रीवा में था। सीधी गाड़ी रीवा एक्सप्रेस एक ही है, जो  आनंद विहार से रात 10:00 चलती है, और अगले दिन 11:00 बजे रीवा पहुंचती है। मैंने 5 नवंबर की सीट रिजर्व करवा ली. मुझे गाड़ी में नींद कम ही आती है इसलिए छ की रात को आराम से सोकर, 7 से तो कार्यक्रम शुरू हैं। स्टेशन पर प्रोफेसर नीलम राठी ( राष्ट्रीय मंत्री साहित्य परिषद अधिवेशन से पहले हैं 😄), प्रो. ममता वालिया, प्रो. रजनी मान भी मिल गई। रजनी मान बहुत खुश थी क्योंकि वह 18 साल बाद गाड़ी में बैठ रही थीं। यह तीनों जिस भी प्रोग्राम में जाती हैं, फ्लाइट से ही जाती हैं। मुझे तो वैसे ही रेल यात्रा पसंद है। हम गाड़ी के इंतज़ार में बैठकर बतिया रहे थे और प्लेटफार्म पर भीड़ बढ़ती ही जा रही थी। प्रो. नीलम राठी तो बड़े  दायित्व के कारण हमेशा व्यस्त रहती हैं, अभी वह काम में मस्त थी। मैं भीड़ देख कर  बताती जा रही थी कि इनमें से कौन-कौन अधिवेशन में जा रहा है। मसलन 'वह टोपी वाली महिला, जैसे ही मुझ पर नजर पड़ेगी, मेरे पास आएगी, और वह देखते ही आ गई, रेखा खत्री ने फोटो खिंचवाते समय टोपी उतार दी। गाड़ी आते ही सब अपने डिब्बो में, अपनी अपनी सीट पर पहुँच गए। मेरे सामने की सीट पर महिला, उसके ऊपर वाली सीट पर एक बेहूदा दामाद जो बड़ा सा तिलक लगवा कर, लगेज के साथ कपड़े से बंधा हुआ एक टोकारा, जिसमें मठरी, लड्डू की खुशबू आ रही थी, विदाई में लाया था। मेरे ऊपर की सीट पर महिला का पति,  टू ऐसी डब्बा था। गाड़ी चलते ही पर्दा लगाते ही पति-पत्नी ने अपना खाना लगाया और खाने लगे, बेहूदे बबुआ दामाद  उनके सिर पर खड़ा! उसको  लगातार फोन आ रहे थे कि वह ठीक है? आसपास सब ठीक है? कोई परेशानी तो नहीं है? और वह सड़ा सा मुंह बनाकर, चिल्ला चिल्ला कर, जवाब दे रहा था। खाना खाने वालों के मुंह पर  बीच-बीच में झाड़ झाड़ कर, चादर, कंबल बिस्तर बिछा रहा था इसलिए मैंने तो अपना खाना नहीं खोला। जब वह ऊपर जाकर लेट गया तब मैंने खाना निकाल कर खाना शुरू किया। और पति पत्नी अपना खाकर चुपचाप बैठे रहे, जैसे ही मेरा खाना खत्म हुआ, उन्होंने अपना बिस्तर लगाया। सुबह नींद खुली, बेहूदा दामाद जा चुका था। अब हमारी यात्री गोष्टी  शुरू हो गई. महिला के एडवोकेट पति किसी केस के सिलसिले में रीवा जा रहे थे, साइड लोअर सीट खाली थी। मैं वहां  जाकर बैठ गई। अपर साइड  सीट का बंटी  मेरी सीट पर बैठ गया, वह श्रोता था और अपने लैपटॉप पर काम भी कर रहा था। लेखको, किताबों के बाद हमारी चर्चा फिल्मों पर और हाल ही की देखी फ़िल्म 'जौली एलएलबी 3' पर चर्चा शुरू हो गई। मानिकपुर स्टेशन आने पर एक आदमी हॉट बोतल में चाय, तीन कुल्लड़ और बिस्किट का पैकेट लेकर बंटी के पास आया और बोला, " गुल्लू भैया ने भेजा है।" बंटी ने हम तीनों को  चाय देकर और बिस्किट रखकर उस आदमी के साथ चला गया। मैं समझी अपने लिए कुल्लड़  लेने गया है। चाय का घूंट भरते ही मैंने कहा, " चाय तो बहुत ही स्वाद है। " महिला ने जवाब दिया, " मानिकपुर की चाय बहुत मशहूर है।" गाड़ी चलने पर वह आया। मैंने पूछा, " आपकी चाय!" वह बोला, " मैं कॉफी पीता हूं चाय नहीं।" 9 तारीख को समापन होते ही हमारे लौटने की गाड़ी थी। सतना पर बंटी को उतरना था। उसने बताया कि उसकी दादी की असाधारण व्यक्तित्व की महिला, उन्होंने यहां पर 52 साल पहले आउटलेट शुरू किए थे।  हम जब भी घूमने के लिए सतना से गुजरे, उनका रिजॉर्ट तैयार हो रहा है। वहां जरूर आए और फोन नंबर देकर कर , सतना पर उतर गया। हमारा बतियाना चलता ही रहा। रीवा स्टेशन पर हमें पिकअप के लिए गाड़ियां आई थीं और हम हरे भरे  रीवा से परिचय करते हुए अतिथि गृह पहुंच गए। क्रमशः

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