JFK एयरपोर्ट को मैं हैरानी से देखते हुए और देश दुनिया के लोगों को देखती हुई, अपने बोर्डिंग गेट पर पहुंची। लॉस एंजेलिस से न्यूयॉर्क के समय में भी फर्क है। गेट पर यह देखकर बहुत अच्छा लगा कि लगभग 80% तो भारतीय हैं। अटेंडेंट ने मुझे समझा कर एक सीट पर बिठा दिया और पूछा की बोर्डिंग के समय वह आए। मैंने मना कर दिया। वह मुझे विश करके चला गया। अब मैंने वहां बैठे पैसेंजर पर नज़र डाली, लगभग भारत के सभी राज्यों के भारतीय मुझे लगे। सामने देखा इस तरह से सेटअप था, लोग उस पर बैठे हुए लैपटॉप खोलें, अपना काम कर रहे थे और फ्लाइट का इंतजार भी । केंद्र में बहुत लंबा सोफा जिसमें कोई हत्था नहीं था। किनारे गोल और उसके आसपास भी कुर्सियां रखी था जिस पर तीन महिलाएं सो रही थीं। बीच में इतनी जगह थी कि टांगे से मोड़कर मैं भी लेट सकती हूं और मैं जाकर लेट गई। मेरे सर के पीछे वाली लड़की ने थोड़ी अपनी टांगे मोड़ ली, जिससे मैं भी आराम से लेट गई। सोफे के आसपास भी खूब आरामदायक कुर्सियां रखी थीं। क्योंकि अगली फ्लाइट बहुत लंबी है सेहत के अनुसार मुझे लेटे रहना चाहिए था। पर लेटे-लेटे सोच रही थी कि दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट पर आई हूं। थोड़ा सा घूम लूं। फिर आकर लेट जाऊंगी और मैं उठकर चल दी। JFK एयरपोर्टअमेरिका के 35वें राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी के नाम पर जॉन एफ कैनेडी इंटरनेशनल एयरपोर्ट है । यह अमेरिका का सबसे व्यस्त इंटरनेशनल एयरपोर्ट और न्यूयॉर्क का मेन गेटवे है। Terminal 4 सबसे बड़ा इंटरनेशनल टर्मिनल है, यहां से मेरी फ्लाइट है। इंटरनेशनल हब है भारत से Air India, Delta, American Airlines, Emirates, Qatar Airways सीधी फ्लाइट चलाती हैं. मुंबई-दिल्ली से रोज फ्लाइट है। डोमेस्टिक + इंटरनेशनल अमेरिका के हर बड़े शहर और यूरोप, मिडिल ईस्ट, साउथ अमेरिका, एशिया से कनेक्ट है। मैंने इस बात का ध्यान रखा कि अपने बोर्डिंग गेट से ज्यादा दूर नहीं जाना है और कहीं मुड़ना नहीं है। ऐसे ही वापस आ जाना है क्योंकि अब अटेंडेंट नहीं है अगर मैं खो जाऊंगी तो फ्लाइट मिस हो जाएगी।Terminal 4 और 5 में सबसे अच्छा फूड कोर्ट और ड्यूटी फ्री शॉप है.
JFK बड़ा और थोड़ा भीड़भाड़ वाला एयरपोर्ट है, पर साइनबोर्ड अच्छे हैं। टर्मिनलों के बीच अगर फ्लाइट चेंज करनी है तो AirTrain फ्री है। अब मैं लेटने वाली जगह पर पहुंची तो उस पर कोई और लेटा था। कुछ देर में बोर्डिंग शुरू हो गई। इसमें मेरी 10 D सीट कॉर्नर की थी और बाजू वाली खाली थी। प्रीमियम इकोनॉमी में बस बीच का हत्या नहीं उठता वरना दोनों सीट एक हो जाती। पर फिर भी आरामदायक बैठना, टेढ़ा होना, टांगे इधर-उधर करना चलता रहा। यहां हर अनाउंसमेंट हिंदी में भी होती, ऐसा लग रहा था जैसे अमेरिकन एयरलाइंस ने भारतीयों को ध्यान में रखकर ऐसा किया है। खाना भी अच्छा, पहले और आखिरी, 2 मील में तो मैं जाग रही थी। सबा फिल्म देखी उसके बाद पता कौन सी हिंदी फिल्म देखते हुए सो गई। एकदम लाइटें जल गई, बीच के मील में एयर होस्टेस ने मुझसे पूछा आखिरी शब्द मुझे पास्ता सुना मैंने वही बोल दिया। पास्ता के साथ फ्रूट और आइसक्रीम भी आई। उनींदी सी थी इसलिए उसकी फोटो लेना मैं भूल गई। पूरे रास्ते रात ही रही। लैंड होने से 2 घंटा पहले, धूप रोशनी कुछ देर के लिए दिखे फिर अंधेरा और रात 9:30 हम दिल्ली लैंड कर गए। क्रमशः https://www.instagram.com/reel/DYUOE39gVqE/?igsh=bHNybHd3cjNlMmcy
https://www.instagram.com/reel/DX8vM84R8XP/?igsh=djFuOTR4dDlleHZx






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