आउटडोर प्रोग्राम के लिए लॉस एंजेलिस का मौसम बहुत अच्छा है। यहां धूप तीखी होती है और हवा ठंडी चलती है इसलिए यहां की गर्मी में भी आप धूप में रह सकते हैं। सबसे अच्छी बात मुझे यहां यह लगी कि कोई भी पार्टी मसलन दित्या का जन्मदिन 4 जून को परिवार में मना लिया। लेकिन मित्रों संबंधियों के साथ संडे या सैटरडे मनाया जाएगा। एक महीने पहले सबको इनविटेशन दे दी। उन्होंने अपनी स्वीकृति दे दे। भारत में मेरे पास गीता दित्या के जन्मदिन की तस्वीर आती थी। कभी रेस्टोरेंट, कभी पूल साइड में मनाते हुए। अब चौथे जन्मदिन पर मैं साथ में हूं। दित्या के प्ले स्कूल के उसकी एक्टिविटी क्लास के और जान पहचान वालों के बच्चों को निमंत्रण था। राजीव जी ने हॉलीवुड पार्क में पिकनिक जॉन रिजर्वेड करा लिया था 11:00 से 3:00 बजे तक। पिकनिक जॉन बहुत बड़े घास से ढके मैदान से सटा है। राजीव जी गीता के साथ, सामान लेकर पहले पहुंच गए थे। उत्कर्षनी मुझे दित्या को लेकर पूरे 11:00 बजे पहुंची । मुझे यह जगह बहुत ही पसंद आई। हमारी रिजर्वेशन का बोर्ड लगा हुआ था। रेत में बिल्डअप फर्नीचर साथ में पेड़, चाहे धूप में बैठो, चाहे पेड़ के नीचे बाजू में बहुत खूबसूरत गेटेड पार्क है। भारतीय बच्चा कोई नहीं था अलग-अलग देशों के दित्या के दोस्त बच्चे आए। बच्चों को व्यस्त रखने के लिए खिलौने और बबल बनाने वाले और कुछ कारपेट भी रखे। जिसने लेटना है या घास पर बैठना है, वह बैठ सकता है या वैसे ही बैठ सकता है। यहां सब काम खुद करने के कारण बच्चों को भी बहुत अच्छी आदत है। अपने पसंद का कोई भी पैकेट उठाते हैं, स्नेक्स ड्रिंक लिए कहीं भी घूमते, खेलते, झूलते लेकिन खाली रैपर और बोतल डस्टबिन में ही डालते हैं। वहां रखा डस्टबिन मैंने एक बार भी ऊपर तक भरता, कचरा बाहर गिरते नहीं देखा, पूरा भरने से पहले ही खाली कर दिया जाता। एक जगह आइसक्रीम का पार्लर गीता ने लगाया, आते ही उसकी सहेलियां भी मदद करने लगी। आइसक्रीम पर टॉपिंग बच्चे अपनी पसंद की अपने आप करते थे। खत्म होने पर ही दूसरी आइसक्रीम ब्रिक, आइस बॉक्स से निकालते थे। बड़े अपने ग्रुप में बातें करते। सेल्फ सर्विस थी, कहीं भीड़ नहीं लग रही थी। मर्जी से अपने ग्रुप में सुविधा अनुसार बैठे, खड़े या वॉक कर रहे थे। गीता और उसकी सहेली खिलौने की दुकान भी लगा कर बैठे थे जो डॉलर के बदले नहीं, किसी एक्टिविटी करने पर मिलता था। यहां बच्चा खोने का तो सवाल ही नहीं होता और न कोई किसी का सामान उठाता। खूब खाने पीने का सामान जगह-जगह रखा था, कोई फालतू बंदा नहीं आता, न ही कोई कुत्ता। 3:00 बजे से कुछ पहले पेरेंट्स अपने बच्चों को झूलों से या खेलते हुए को लेकर, बाय करने आए। उत्कर्षनी राजीव जी रिटर्न गिफ्ट देते हुए उन्हें फिर से कुछ खाने का आग्रह करते थे। जवाब हंसते हुए होता 'आई एम फुल' बड़ी खुशी से वे एक दूसरे को धन्यवाद करते हुए जाते। सबके जाने के बाद हमने अपना सामान पैक किया। दोनों ने अपनी अपनी गाड़ी में रखा। हंसी खुशी जन्मदिन मना कर घर पहुंचे। दोनों थकी हुई लड़कियां, गाड़ी में बेसुध सोई हुई थीं। बाकी बच्चों का भी खेल खेल के यही हाल होगा क्योंकि 4 घंटे में कोई भी बच्चा अपने पेरेंट्स के पास नहीं आया था जिस पेरेंट्स को लगता कि उसके बच्चे ने नहीं खाया खेल में मस्त है, वह प्लेट लगाकर वहीं दे आता था। बच्चे अपने आप खाने को उठाते, प्लेट लगाते खाते , गरम खाना नहीं लेते क्योंकि उसको खाने में टाइम लगता है और झूलने, खेलने भाग जाते। सबसे अच्छी बात मुझे यहां यह लगी लोग आपस में लगातार बतिया रहे थे।
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