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Sunday, 14 June 2026

नोएडा लोकमंच की नई स्वास्थ्य पहल: मात्र 30 रुपये में नेत्र जांच एवं 100 रुपये में दंत उपचार की सुविधाNoida Lokmanch's New Health Initiative: Eye Check-ups for Just ₹30 and Dental Treatment for ₹100

 




नोएडा शहर के सेक्टर-12 स्थित निःशुल्क दवा बैंक एवं चिकित्सा केंद्र एक नई उम्मीद की किरण बनकर उभरा है। जहां बढ़ते स्वास्थ्य व्यय आमजन की चिंता का विषय बने हुए हैं, वहीं नोएडा लोकमंच के स्वास्थ्य प्रकल्प ने एक अनूठी पहल करते हुए मात्र 30 रुपये में नेत्र जांच तथा मात्र 100 रुपये में दांत भरवाने अथवा निकलवाने की सुविधा प्रारंभ की है। यह सेवा केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व का जीवंत उदाहरण है।

इस सेवा का शुभारंभ पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं गौतमबुद्ध नगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा तथा भाजपा नोएडा महानगर अध्यक्ष महेश चौहान ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सच्ची सेवा वही है, जो जरूरतमंद व्यक्ति तक न्यूनतम लागत पर पहुंचे। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि नोएडा लोकमंच पिछले तीन दशकों से गरीब, मजदूर एवं मध्यम वर्गीय परिवारों की सेवा में निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि संस्था का लक्ष्य केवल उपचार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि भविष्य में एक चैरिटेबल अस्पताल की स्थापना करना है, ताकि कोई भी व्यक्ति आर्थिक अभाव के कारण इलाज से वंचित न रहे।

स्वास्थ्य प्रकल्प के इस योजना के CSR पार्टनर सक्षम चेंज मेकर एवं इन्फोसिस फाउंडेशन के अध्यक्ष ऋषि प्रताप सिंह ने नेत्र चिकित्सा एवं दंत चिकित्सा के इस शुरुआत को शहर के जरूरतमंदों के लिए बहुत लाभकारी बताया l उन्होंने कहा कि उनकी संस्था सदैव नोएडा लोकमंच के सहयोगी के रूप में साथ है और भविष्य में स्वास्थ्य क्षेत्र में कुछ और बड़े सामाजिक कार्य की पहल होगी l उन्होंने सभी से Noida,I Care मुहिम से जुड़ने का आह्वान किया l 

नोएडा लोकमंच के महासचिव महेश सक्सेना ने बताया कि संस्था शीघ्र ही नोएडा के विभिन्न सेक्टरों एवं गांवों में चिकित्सकों की दो घंटे की सेवा प्रारंभ करने जा रही है। उन्होंने कहा कि यह पहल जनसेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत है और आने वाले समय में इसे और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा।

इस सेवा परियोजना के पीछे अनेक समर्पित एवं अनुभवी व्यक्तित्वों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इनमें प्रभात कुमार (पूर्व राज्यपाल, झारखंड एवं अध्यक्ष, नोएडा लोकमंच), डॉ. योगेंद्र नारायण (पूर्व रक्षा सचिव, भारत सरकार एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष, नोएडा लोकमंच), जे.पी. शर्मा (पूर्व स्वास्थ्य सचिव, उत्तर प्रदेश सरकार एवं चेयरमैन, स्वास्थ्य प्रकल्प), डॉ. प्रभात कुमार (प्रदेश आयुक्त, स्काउट एंड गाइड तथा उपाध्यक्ष, स्वास्थ्य प्रकल्प), ऋषि प्रताप सिंह (डी.सी. इन्फोसिस), पंकज राठी (सीईओ, तिरुपति आई ट्रस्ट), डॉ. मोहिता शर्मा (चेयरपर्सन, तिरुपति आई सेंटर), डॉ. केशव नथानी (डायरेक्टर, मैक्स हॉस्पिटल), हेमंत गोयल (कुलपति, झारखंड विश्वविद्यालय), डॉ. एच.के. नाथ (वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक), जमील अहमद, मुकुल  बाजपेयी, पी.एस. जैन (अध्यक्ष, CONRWA), इंद्रा चौधरी, लीका सक्सेना, विभा बंसल (कोषाध्यक्ष, नोएडा लोकमंच), डॉ. सी.बी. झा, राम शरण गौर, राजेश श्रीवास्तव, वी.के. जैन, एडवोकेट विनीत गर्ग,मोहम्मद परवेज़, नोएडा लोकमंच के अन्य पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं तथा सक्षम चेंजमेकर ट्रस्ट के वालंटियर मौजूद रहे l का उल्लेखनीय सहयोग रहा। कार्यक्रम का सफल संचालन देश के सुप्रसिद्ध हास्य कवि एवं साहित्यकार विनोद पांडेय ने किया। इस आयोजन में इंफोसिस फाउंडेशन एवं सक्षम चेंजमेकर ट्रस्ट के सहयोग से दवा बैंक में कॉर्निया प्रोजेक्ट की शुरवात की गई एवं दवा बैंक के इंफ्रा को बेहतर करने में सहयोग किया गया  

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि जब सेवा का भाव सच्चा हो और उद्देश्य जनकल्याण का हो, तब कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रहता। नोएडा लोकमंच की यह पहल समाज के उन वर्गों के लिए आशा की नई किरण है, जिन्हें सुलभ एवं किफायती स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता है। यह प्रयास हमें याद दिलाता है कि वास्तविक सफलता केवल स्वयं के लिए उपलब्धियां अर्जित करने में नहीं, बल्कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में है।

नोएडा लोकमंच की यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को आमजन तक पहुंचाने का कार्य कर रही है, बल्कि समाज में सेवा, सहयोग और संवेदनशीलता की भावना को भी मजबूत कर रही है। यदि ऐसे प्रयास निरंतर जारी रहे, तो निश्चित रूप से नोएडा एक स्वस्थ, जागरूक और संवेदनशील समाज के रूप में नई पहचान स्थापित करेगा।


Regards,

Mukul Bajpai,

Media Prabhari,

Noida Lok Manch,

9811026419,

8383954010

Wednesday, 10 June 2026

वॉशिंग मशीन में कपड़ों पर पाउडर क्यों चिपक जाता है?Why does powder stick to clothes in the washing machine? Neelam Bhagi नीलम भागी

 


कई बार वाशिंग मशीन में धूले कपड़ों को निकालते हैं तो उनमें से कुछ कपड़ों पर वाशिंग पाउडर लगा होता है।जिसके कारण कुछ कपड़े ऐसे लगते हैं कि जैसे उनकी धुलाई ही नहीं हुई क्योंकि जिस पाउडर ने पूरे पानी में घुल कर घूमना था वह तो कुछ कपड़ों में ही चिपक कर रह गया।

ऐसा हमारी गलती की वजह से होता है। मशीन खराब नहीं होती है।

मुख्य कारण है मशीन के अंदर कपड़े ज्यादा भरना ज्यादा कपड़े होने से कपड़े मशीन में घूमते नहीं है इसलिए पाउडर जिन कपड़ों पर पड़ता है गीला होने से वही चिपक जाता है। इसलिए मशीन की क्षमता का 75% ही कपड़ा डालो। 5kg मशीन में 3.5kg से कुछ ज्यादा पर 4 किलो से कम कपड़े डालो। कई बार हम सोचते हैं कि कपड़े ज्यादा मैले हैं तो उसमें ज्यादा पाउडर डाल देते हैं इसलिए भी पूरा पाउडर घुल नहीं पाता है।

नल पूरा खोलो। मशीन के पीछे वाली जाली/फिल्टर साफ करो - वहां कचरा जमा हो जाता है तो पानी ठीक से मशीन के अंदर नहीं जाता, प्रेशर कम होने से भी ऐसा होता है।

पाउडर को एयरटाइट डिब्बे में रखो। गांठ वाला पाउडर इस्तेमाल से पहले गांठे तोड़कर पाउडर बना लो।

लिक्विड सोप से भी धो सकते हैं।



Tuesday, 9 June 2026

नया पेड़ लगाया है तो मल्चिंग करना जरूरी है। It is essential to mulch after planting a new tree. Neelam Bhagi Migration to America

 


मैंने उत्कर्षनी  से कहा कि यहां पर पेड़ विशाल और सीधे तने और बड़े स्वस्थ हैं। उसने जवाब दिया कि यहां पर पेड़ लगाने के बाद उसका बहुत ध्यान रखा जाता है। आप देख रही हो न पेड़ के तने की 3 इंच दूरी से मल्चिंग की गई है। मतलब पेड़ के नीचे सूखी पत्ती, घास, लकड़ी का बुरादा बिछा दिया जाता है। ऐसा पेड़ को गर्मी-सर्दी से बचाने के लिए किया जाता है। पेड़ के तने से 3 इंच दूर से लेकर पूरे घेरे में 2-4 इंच मोटी परत सूखी पत्ती, घास, भूसा, नारियल की जटा, लकड़ी का बुरादा, लकड़ी के छोटे-छोटे टुकड़े  बिछा देते हैं । पेड़ के लिए मलचिंग के बड़े फायदे हैं।

इससे पानी बचता है क्योंकि मिट्टी से वाष्पन नहीं होता।धूप सीधी मिट्टी पर नहीं पड़ती जिससे वाष्प बनकर पानी नहीं उड़ता है। और 50% तक पानी बचता है। गर्मी में भी पेड़ प्यासा नहीं मरता।  मल्चिंग  घास-खरपतवार रोकता है। धूप जमीन तक नहीं पहुंचती तो जंगली घास नहीं उगती। गुड़ाई-निराई का भी झंझट खत्म हो जाता है।

मल्चिंग  मिट्टी ठंडी रखती है। 45°C की धूप में भी जड़ें 25-30°C पर आराम से सांस लेती हैं। जड़ जलती नहीं है। सूखी पत्ती धीरे-धीरे सड़कर केंचुआ खाद बन जाती है। पेड़ को ऑर्गेनिक और फ्री में खाना मिलता है।

बारिश में मिट्टी कटकर नहीं बहती। जड़ें मजबूत रहती हैं। बड़ा होने तक पेड़ों की बहुत देखभाल की जाती है और जो भी बारिश होती है उसका पानी भी यही समा जाता है। फुटपाथ पर ढाल ऐसी दी जाती है कि पानी पेड़ के चारों ओर बने स्क्वायर में ही जाता है। इसलिए यहां पर हरा-भरा नज़र आता है। नया पेड़ लगाया है तो ये करना सबसे जरूरी है। वरना धूप में 15 दिन में पेड़ सूख जाएगा।

https://www.instagram.com/reel/DZXbdadgat3/?igsh=MWxmbms4M3pidGtybQ==








Monday, 8 June 2026

सांता मोनिका बीच लॉस एंजेलिस Santa Monica Beach LA Neelam Bhagi Migration to America नीलम भागी अमेरिका प्रवास

 


    हम सांता मोनिका बीच पर 7 जुलाई को गए। समुद्र के किनारे रेत पर लकड़ी का कोयला देखकर उत्कर्षनी ने बताया कि 7 जनवरी 2025 मंगलवार सुबह लॉस एंजिल्स काउंटी की पहाड़ियों में, आग Pacific Palisades Drive के पास शुरू हुई फिर तेज हवाओं के साथ मालिबू, टोपांगा तक फैल गई और

31 जनवरी 2025 को, 25 दिन बाद बुझी। ये कैलिफोर्निया के इतिहास की तीसरी सबसे विनाशकारी और LA शहर की सबसे विनाशकारी आग बनी। ये जनवरी 2025 की सबसे बड़ी त्रासदी थी। इसे "Palisades Fire" कहते हैं। इतने महीने बाद भी बरसात आने पर पानी द्वारा उसका कोयला समुद्र में  आया है, जिसे सागर की लहरें बाहर फेंक देती हैं।  कहीं पर यह कोयला इकठ्ठा है। कहीं रेत में छोटे-छोटे टुकड़े दिख जाते हैं। इन कोयलों को देखकर उत्कर्षनी बोली, " आग प्रभावित क्षेत्रों से जब घर खाली करवाए गए तो उसमें दित्या के प्ले स्कूल की टीचर भी थी। वह जल्दी में सिर्फ अपने घर की चाबी उठा कर आई। पता चला कि  पूरा क्षेत्र ही जल गया है। घर की निशानी के रूप में उसके पास सिर्फ चाबी है।    

https://www.instagram.com/reel/DZUHxSpxi7A/?igsh=MW15MXlraWhkcmE5MA==

https://www.instagram.com/reel/DLy39DYuygp/?igsh=em4zaHdpZmU5MWdz







Sunday, 7 June 2026

थिंक ग्लोबल, ग्रो लोकल Think Global, Grow Local Neelam Bhagi Migration to America नीलम भागी अमेरिका प्रवास

 


लॉस एंजेलिस में मेरा घर से बाहर जाना बहुत होता था। सड़क के किनारे जो घर हैं, उनका लॉन बहुत ही खूबसूरत होता है। जिसमें हमेशा मैंने घर के मालिक को ही काम करते देखा है। वह अपने काम में इतने मस्त होते हैं कि सड़क की तरफ तो उनका कभी ध्यान ही नहीं होता है। जितनी मेहनत करेंगे, उतना ही खूबसूरत लॉन होगा। यहां कोई बाउंड्री वॉल नहीं होती है। अगर कहीं है भी तो वह झाड़ से है। सड़कों पर आवारा पशु नहीं है न ही बंदर घूम रहे होते हैं। राजीव जी को होम डिपो से कुछ सामान लेना था। वे अपना सामान देखने लगे और मेरा सबसे पसंद का काम होता है, वहां की नर्सरी में समय बिताना। उत्कर्षनी को गार्डनिंग का बहुत शौक है। बहुत ज्यादा व्यस्त रहती है, उसके लिए कम देखभाल का, गमले में लगने वाला पौधा भी देख लेती हूं। यहां पेड़ पौधों से संबंधित हर चीज, एक ही छत के नीचे मिलती है। जहां पौधे रखे होते हैं, वहां की छत ट्रांसपेरेंट है। हर चीज के नीचे नाम लिखा हुआ है और कीमत भी। कोई आपको सामान नहीं दिखाएगा, सब सेल्फ सर्विस है, बिल भी खुद बना सकते हैं। मैंने वीडियो बनाया है। नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके होम डिपो की नर्सरी को आप देख सकते हैं। ऐसी कोई चीज नहीं है जो उसमें न हो। एक घर के आगे छोटा सा पौधों में बोर्ड लगा था जिस पर लिखा था थिंक ग्लोबल ग्रो लोकल   Think Global, Grow Local

https://www.instagram.com/reel/DZQSkmuSrVl/?igsh=YndxamMydnY4NGJ1






Saturday, 6 June 2026

"बातें और चिंता कम, एक्शन ज्यादा" विश्व पर्यावरण दिवस "Less talk and worry, more action" – World Environment Day Neelam Bhagi नीलम भागी

 


चूरू राजस्थान से आई लेखिका स्नेहलता जी और उनकी भाभी अनुसूया जी के साथ, मैंने हरिद्वार में रूम शेयर किया था। परिचय के बाद दोनों आपस में कहने लगी कि पानी का स्वाद मुंह में नहीं चढ़ रहा है। गर्मी थी जो वह पानी अपने घर से लाई थीं, वह बीकानेर तक खत्म हो गया था। मुझे सुनकर बड़ा अजीब लगा। बाद में पता चला कि वे बारिश का पानी स्टोर करते हैं, बड़े-बड़े टैंक बना रखे हैं और एक बूंद भी बरसात का पानी उनके घर का व्यर्थ नहीं जाता, सीधा टैंक में जाता है जो खराब नहीं होता है, पूरा साल चलता है। सुनकर बहुत अच्छा लगा। जितने भी मेरे दिमाग में इस सिलसिले में प्रश्न उठ खड़े हुए थे। सभी का जवाब बहुत संतोषजनक मिला। अखिल भारतीय साहित्य परिषद उत्तराखंड द्वारा हरिद्वार में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी 'नदी साहित्य' पर थी जिसमें मैं भी आमंत्रित थी। अब तक मैं परिषद के जिस भी कार्यक्रम में गई हूँ उसमें एक बतियाना सत्र साहित्यकारों का अपने आप बन जाता है। जिसका कोई फॉर्मेट नहीं होता। ये चाय पर या भोजन पर समूहों में अलग अलग होता है। मसलन पवन पाण्डे पाली(राजस्थान) ने, झाँसी में अपना परिचय देते हुए बताया कि वे जहाँ से हैं वहाँ पानी की बहुत कमी रहती हैं। उन्होंने बताया कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग के द्वारा उनके पास अभी 50000 लीटर पानी है। भू जल स्तर बहुत गिर गया है। वाटर हारवेस्टिंग की ज़रुरत पर बात होने लगी। उनकी चर्चा सुनते हुए मेरी आँखों के आगे पानी बर्वाद करने वाले लोग आने लगे। कुछ ऐसे पढ़े लिखे  लोग भी आने लगे जो गाड़ी खड़ी करने के लिए घर के आसपास कंक्रीट का फर्श बनवा देते हैं। मजाल है उसमें से एक बूंद भी वर्षा जल जमीन में चला जाए! उनको क्या नाम दें? पाठक बताएं।

लोकमंथन 2024 हैदराबाद में एक सत्र ऐसा था नाम मुझे नहीं याद आ रहा है उसमें एक बहुत लाज़वाब शॉर्ट फिल्म, लोक धुन के साथ दिखाई गई थी। जो आदिवासियों का एक रिवाज़ है जिसे हालमा (हुरमा )कहते हैं उस पर थी । इसमें मानसून शुरू होने से पहले सभी लोग इकट्ठे होते हैं। सभी के हाथों में टोकरा, कुदाल, बेलचा, फावड़ा होता है। जिससे वह गड्ढा खोदते हैं। उसे "हुरमा गड्ढा" कहते हैं।

इसे कई जगह *"हुरमा खोदना", "बुड़वा गाड़ना", "बांधा खोदना" भी कहते हैं। ये सिर्फ गड्ढा नहीं, बरसात को रोकने-समेटने का 1000 साल पुराना देसी तरीका है।हुरमा बारिश शुरू होने से 15-20 दिन पहले, ज्येष्ठ-आषाढ़ में आदिवासी खेत, गांव के बाहर, जंगल की ढलान पर गोल या चौकोर गड्ढे खोदते हैं।

ये गड्ढा लगभग 3 फीट गोल, 2-3 फीट गहरा। ऊपर थोड़ा चौड़ा, नीचे तंग -या मटके जैसा भी हो सकता है। इसका मकसद पानी रोकना = वाटर हार्वेस्टिंग =जल संचयन है। तेज बारिश का पानी बहकर नदी में चला जाता है। अब हुरमा गड्ढे में पानी रुक जाता है। जो धीरे-धीरे जमीन में रिसकर भूजल रिचार्ज करता है। 1 गड्ढा 5000 लीटर तक पानी जमीन में उतार देता है। जिससे मिट्टी बचती है। ढलान वाले खेत में बारिश से उपजाऊ मिट्टी बह जाती है। गड्ढा मिट्टी को पकड़ लेता है। जिससे अगली फसल के लिए खाद बन जाती है।

  गर्मी में जब सब सूख जाता है, तो गड्ढे में पानी रहता है। हिरण, पक्षी, जंगली जानवर यहीं पानी पीते हैं। आदिवासी इसे "जीव-जल" कहते हैं।

गड्ढा खोदना सिर्फ काम नहीं, रिवाज है। इसलिए

पहला फावड़ा गांव का मुखिया या पुजारी "बुड़ा देव" का नाम लेकर पहला फावड़ा चलाता है।

पहले गड्ढे में थोड़ा महुआ, चावल, सिंदूर डालते हैं। ऐसा मानते हैं कि धरती माता खुश होगी और वर्षा का जल उसकी प्यास बुझाएगा और यह हुरमा गड्ढे पानी से लबालब भर जाएंगे।

यह सामूहिक श्रम भावना से जुड़ा है। पूरा गांव मिलकर खोदता है। एक दिन में 50-100 गड्ढे हो जाते हैं। काम के बाद ढोल पर नाचते हैं। इसी को "हुरमा नाच" कहते हैं।

गोंड आदिवासी छत्तीसगढ़-बस्तर, MP में "डबरी" या "बांधा" बोलते हैं। भील आदिवासी राजस्थान, MP में "खड़ीन" टाइप गड्ढे। सहरिया आदिवासी बुंदेलखंड में "खोंद" गड्ढे। वारली आदिवासी  महाराष्ट्र में "पाडा" के पास गड्ढे खोदे जाते हैं।

बोरवेल सूख रहे हैं, बारिश अनियमित हो गई है। हमारे यहां 1100 से 12 00 mm वर्षा होती है जो विश्व औसत से कम नहीं है। हुरमा गड्ढा आदिवासियों की देसी वाटर हार्वेस्टिंग है। अपना 500 साल पुराना रिवाज वो धरती को खुश करने के लिए करते हैं , पर असल में धरती को पानी दे रहे हैं। आदिवासियों का ये हुरमा गड्ढा सबसे सस्ता और असरदार "क्लाइमेट सोल्यूशन" है।

5 जून विश्व पर्यावरण दिवस पर पेड़ लगाने का रिवाज़ है। मैं पेड़ पौधों में रुचि रखती हूं इसलिए यह ध्यान रखती हूं कि इस भीषण गर्मी में मेरे आस-पास  जो पेड़ पौधे हैं, वह पानी की कमी से मरे नहीं। इससे पहले प्रशासन से उम्मीद करती हूं कि वह रेन वाटर हार्वेस्टिंग, जल संचयन के जितने भी उपाय हैं उसको मानसून से पहले दुरुस्त करें। पार्क के आसपास का पानी पार्क में जाए। भूजल स्तर बढ़ाने के लिए जो भी उपाय हो, किया जाए। मानसून के समय वन महोत्सव मनाए। पेड़ पौधे लगाए। लोगों को पौधे बीज बांटे। उस समय लगाए गए पौधे जम जाते हैं। 

https://www.instagram.com/reel/DZH4_25A1VW/?igsh=Nmh3bmw1Mm9tNm5u



Friday, 5 June 2026

वर्टिकल गार्डनिंग का एक बेहतरीन उदाहरण और चुकंदर का पौधा An excellent example of vertical gardening and a beetroot plant. Migration to America Neelam Bhagi

 


गीता को सादा दही खाना बिल्कुल पसंद नहीं है। रायता बहुत पसंद है, खासकर चुकंदर का गुलाबी रायता। हरी पत्तेदार सब्जियां भी मन से नहीं खाती है । उसे हरी सब्जियां खिलाने के लिए उत्कर्षनी तरकीबें निकालती है। एक यह तरकीब है

चुकंदर के पत्तों का रायता, यह भी गुलाबी रंग का बनता है और इस बहाने पत्ते भी खाए जाते हैं। बाजार के हरे पत्ते कितना साफ़ करो पकाने पर तो ठीक है, पर रायते में कच्चे पड़ते हैं, जिससे मन में वहम रहता है इसलिए उत्कर्षनी ने कुछ चुकंदर के पौधे लगाए हैं । कभी-कभी इसके पत्तों को तोड़कर अच्छी तरह से धोकर बारीक काटकर बिना कुछ डालें 1 मिनट के लिए माइक्रोवेव कर लेती है। ठंडा करके इन पत्तों को फेटे दही में मिला देती है। ऊपर से लाल मिर्च के बड़े-बड़े कैंची से टुकड़े करके, मिर्च, सरसों और करी पत्ते का छौंक लगाकर नमक, थोड़ा सा काला नमक मिला कर हरा गुलाबी रायता तैयार।

इस तरह उत्कर्षनी वर्टिकल गार्डनिंग (Vertical Gardening) का एक बेहतरीन उदाहरण भी पेश करती है, जो कम जगह में पौधे उगाने का एक शानदार तरीका है।

चुकंदर (Beetroot): आप देख सकते हैं कि अलग-अलग परतों (tiers) वाले गमलों में चुकंदर के पौधे लगे हुए हैं।

उत्कर्षनी ने एक स्टैंड का उपयोग किया गया है जिसमें कई आयताकार गमले एक के ऊपर एक रखे गए हैं। वैसे यह सेटअप बालकनी या छोटे आंगन के लिए बहुत उपयोगी है।

सबसे ऊपर एक पानी की बोतल ( ड्रिप सिंचाई के लिए) जो पौधों को धीरे-धीरे पानी देने का एक जुगाड़ू तरीका  है। जब कहीं घूमने जाती है तो इस तरीके से पानी का इंतजाम करके जाती है।

चुकंदर उगाना, उसके तरह-तरह के व्यंजन बनाना पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

https://neelambhagi.blogspot.com/2020/11/beetroot-neelamm-bhagi.html

Thursday, 4 June 2026

लेमन ग्रास' उत्कर्षनी का कंटेनर हर्बस गार्डन Utkarshini's Container Herb gardan ' Lemon Grass' Migration to America Neelam Bhagi

 


अमेरिका में भारत जैसा तो नहीं है कि दरवाजे पर फल, सब्जियों के ठेले सुबह-सुबह आ जाते हैं। सब्जियां तो हफ्ते में दो बार स्टोर से खरीदी जाती है और गाड़ी से ही जाना पड़ता है। लेकिन तरह-तरह के देसी विदेशी व्यंजन बनाने की शौकीन उत्कर्षनी सब तरह के हर्ब्स तो नहीं खरीद के ला सकती इस्तेमाल न होने पर यह जल्दी खराब हो जाती हैं। क्योंकि गीता दित्या कभी भी अपनी चॉइस का कोई व्यंजन मांग लेती हैं इसलिए उत्कर्षनी ने गमलों में हर्ब्स उगा कर रखती है। जिनकी बहुत देखभाल भी करती है। यह ज्यादातर डिश का स्वाद बढ़ाने, महक और गार्निश करने के काम आती हैं। कुछ तरह-तरह के सूप में उपयोग होती हैं। दूसरा इनका सबसे अच्छा काम होता है महकना आसपास मच्छर नहीं आते हैं। लेमन ग्रास / नींबू घास / सिरड / Cymbopogon citratus नाम से ही पता चलता है, पत्ते तोड़ो तो नींबू जैसी खुशबू आएगी। देखने में तो सुंदर लगती ही हैं।

मुंबई में भी इसने खिड़की पर लेमन क्रॉस का गमला रखा हुआ था। लॉस एंजेलिस में भी अपने छोटे से कंटेनर गार्डन में गमले में लगा रखी है। किनारे की पत्ती जो पुरानी हो गई होती है, उसे काट के धोकर, छोटे-छोटे टुकड़े करके चाय में डालते हैं और इस चाय का स्वाद नींबू की महक वाला हो जाता है और जब उबलती है तो रसोई में नींबू की महक फैल जाती है। यह पौधा दिखता घास जैसा है पर फायदे "सुपरफूड" वाले हैं। थाई सूप "टॉम यम" का मेन इंग्रेडिएंट है।

इसे लगाना बहुत आसान है। मार्च-अप्रैल या जुलाई-अगस्त बेस्ट है। यह गर्मी-पानी दोनों झेल लेता है।

बाजार से 1 गड्डी ले आओ। नीचे 2 इंच डंठल वाला हिस्सा पानी में रख दो। 7 से 10 दिन में जड़ आ जाएगी। फिर गमले/जमीन में लगा दो। इसे फुल धूप चाहिए। हफ्ते में 2 बार पानी देना है। कीचड़ मत करो वरना जड़ सड़ेगी।

अगर जमीन में लगाते हैं तो 60 दिन में कटाई शुरू कर सकते हैं। जमीन से 3 इंच ऊपर काटो। फिर 40 दिन में दोबारा तैयार हो जाती है। एक बार लगाओ, 3-4 साल तक चलता है। और अधिक जानकारी के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक कीजिए

https://neelambhagi.blogspot.com/2020/11/lemon-grass-neelam-bhagi.html



Wednesday, 3 June 2026

लेमन बाम (Lemon Balm), Baam Mint Migration to America Neelam Bhagi अमेरिका प्रवास नीलम भागी

 


उत्कर्षनी के घर गमले में लगी हर्ब्स में एक लेमन बाम (Lemon Balm) भी है। यह पुदीना (Mint) परिवार का एक बारहमासी औषधीय पौधा है। इसकी पत्तियां अंडाकार या दिल के आकार की, खुरदरी और किनारों से दांतेदार होती हैं। पत्तियों को कुचलने पर नींबू जैसी ताज़ी और मनभावन सुगंध आती है। गर्मियों के दौरान इसमें छोटे सफेद या हल्के पीले रंग के फूल खिलते हैं जो मधुमक्खियों को आकर्षित करते हैं। लेमन बाम अपने शांत गुणों के लिए जाना जाता है। यह तनाव, चिंता (anxiety) को कम करने और बेहतर नींद (insomnia) को बढ़ावा देने में सहायक है। यह पाचन तंत्र को दुरुस्त करने, पेट की गैस, अपच और ऐंठन जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है।इसकी ताज़ा पत्तियों का उपयोग हर्बल चाय, सलाद, सूप और मछली या चिकन को मैरीनेट करने के लिए किया जाता है।

इसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण भी होते हैं।

इसे बीजों या कटिंग (तने) के जरिए आसानी से गमलों या बगीचे में उगाया जा सकता है। दो तरह के पुदीना उगा ने की विधि मैंने लिखी है नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके देखें।

https://neelambhagi.blogspot.com/2026/05/moroccan-mint-migration-to-america.html

इसको भी वैसे ही उगा सकते हैं।


 यह पौधा नम और आंशिक छाया वाली जगहों पर सबसे अच्छी तरह पनपता है। इसके अत्यधिक सेवन से कभी-कभी जी मिचलाना, सिरदर्द या पेट खराब होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 

Tuesday, 2 June 2026

सार्वजनिक साइकिल मरम्मत केंद्र Fixit Public Bike Repair Station Neelam Bhagi Migration to America अमेरिका प्रवास नीलम भागी

 


उत्कर्षनी की गाड़ी की धुलाई चल रही थी और मैं आस-पास अपनी आदत के अनुसार घूमने चल दी। साइकिल तो मुझे कहीं भी फुटपाथ पर पेड़ के नीचे खड़ी हुई दिख जाती, जिसको जरूरत होती है वह साइकिल की सवारी करके चला जाता। जहां भी छोड़नी होती है, वहीं छोड़ देता है। कोई बंदिश नहीं है कि जहां से ली है वही छोड़ो। पर मुझे साइकिल रिपेयर की दुकान कहीं नहीं दिखी। कहते हैं न कि गाड़ी से गुजरने में और पैदल चलने में फर्क होता है। आज थोड़ा सा पैदल चली तो यह मरम्मत के केंद्र दिखा, जिस पर कोई मैकेनिक नहीं है।  सार्वजनिक साइकिल मरम्मत केंद्र जो कंपनी द्वारा बनाया गया है। यह स्टेशन साइकिल चालकों को रास्ते में होने वाली छोटी-मोटी समस्याओं को खुद ठीक करने के लिए उपकरण और सुविधाएं प्रदान करता है।

इस स्टेशन की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं

स्टेशन के ऊपर दो डंडे निकले हुए हैं, जिन्हें हैंगर आर्म्स कहा जाता है। साइकिल को मरम्मत के दौरान इन पर लटकाया जा सकता है, जिससे पहिए और पैडल आसानी से घूम सकें और काम करना आसान हो जाए।

इस स्टेशन में बुनियादी मरम्मत के लिए आवश्यक सभी टूल्स लगे होते हैं, जैसे:फिलिप्स (Phillips) और फ्लैट हेड स्क्रूड्राइवर। विभिन्न आकारों के एलन रेंच (Allen wrenches) (2.5mm से 8mm तक)। हेडसेट और पैडल रेंच। 8mm से 11mm तक के बॉक्स रेंच। टायर लीवर्स (Tire levers) टायर बदलने के लिए। ये सभी टूल्स चोरी से बचाने के लिए स्टील की केबल्स से मजबूती से बंधे होते हैं।

स्टेशन के बगल में एक भारी-भरकम एयर पंप भी लगा होता है, जिससे टायर में हवा भरी जा सकती है।

स्टेशन के सामने एक QR कोड होता है, जिसे स्मार्टफोन से स्कैन करके साइकिल मरम्मत के विस्तृत निर्देश देखे जा सकते हैं।

यह स्टेशन आमतौर पर सार्वजनिक पार्कों, साइकिल मार्गों या व्यस्त शहरी क्षेत्रों में स्थापित किए जाते हैं ताकि साइकिल चालक अपनी यात्रा के दौरान ब्रेक या गियर्स को एडजस्ट कर सकें या पंक्चर ठीक कर सकें। 




Monday, 1 June 2026

सादगी, समर्पण, प्रकृति के प्रति कृतज्ञ जून के पर्व उत्सव June's Festivals and Celebrations: Simplicity, Dedication, and Gratitude towards Nature Neelam Bhagi

 


जून की भीषण गर्मी में हमारे उत्सव हमें यात्रा, संगीत, स्वास्थ और पर्यावरण का महत्व समझाते हुए हमसे मानसून का स्वागत भी करवाते हैं। जगह जगह आम महोत्सव मनाने की शुरूआत हो जाती है। जून के पहले सप्ताह में शिमला समर फैस्टिवल मनाया जाता है। इस प्रसिद्ध त्यौहार में खेलकूद की गतिविधियां, फैशनेबल कपड़ों, हैंिडक्राफ्ट वस्तुओं और व्यंजनों, फूलों की, कुत्तों की प्रदर्शनी लगती है। हवा में कलाबाजियां और लाइव फैशन शो का प्रदर्शन होता है। 19 साल बाद दुर्लभ संयोग के कारण, इस वर्ष मई-जून में कुल 8 बड़े मंगल पड़ रहे हैं। बुढ़वा मंगल (या बड़ा मंगल) के कुल चार महत्वपूर्ण त्यौहार हैं, जो ज्येष्ठ माह के अंतर्गत आते हैं। मई के मना चुके हैं और इस माह के   2, 9, 16 और 23 जून हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश मुख्य रूप से कानपुर, लखनऊ, वाराणसी, उन्नाव, सीतापुर, बाराबंकी, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, रायबरेली एवं प्रयागराज जिलों में बुढ़वा मंगल धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन संकटमोचन हनुमान जी तथा बालाजी मंदिर में सुन्दरकांड, हनुमान चालीसा का पाठ कर, चोला चढ़ाया जाता है। हनुमान भक्त जगह जगह भंडारे, लस्सी, ठंडाई एवं प्याऊ की व्यवस्था करते हैं।

परमा एकादशी 11 जून,  को मनाई जाएगी, यह एकादशी अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) के कृष्ण पक्ष में आती है और 3 साल में एक बार पड़ती है। यह विशेष व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है, जिसमें पूजा और उपवास से अपार पुण्य प्राप्त होता है।

ओडिशा में राजा संक्रांति समारोह मानसून के शुरुआत का तीन दिवसीय(14 से 16जून) उत्सव है। इसे’ स्विंग फेस्टिवल’ भी कहते हैं, जगह जगह पेड़ों पर झूले जो पड़ जाते हैं। पृथ्वी पर नंगे पांव भी नहीं चलते क्योंकि ऐसा माना जाता है कि मानसून की बारिश से पहले पृथ्वी को आराम दिया जाना चाहिए। महिलाएं घर के काम से छुट्टी लेतीं हैं और किसान खेती से। सब खेलों में व्यस्त रहते हैं। लड़कियां पारंपरिक पोशाक पहनतीं हैं और पैरों में आलता लगातीं हैं। दूसरे दिन को ’’सजबजा’’ कहते हैं। इसमें सिलबट्टे को सजा कर रखते हैं। हिंदू, देवी धरती के प्रतीक सिल को हल्दी का लेप लगा कर महिलाओं द्वारा स्नान कराया जाता है। धरती मां को फलों का भोग लगाया जाता है। बारिश का स्वागत करने के लिए सब एक साथ आते हैं। समापन 16 जून को इस विश्वास से कि धरती मां के आर्शीवाद स्वरुप अच्छी पैदावार होगी। ओचिरा कलि मंदिर से जुड़ा केरल का एक वार्षिक उत्सव है। जो पुराने समय में हुई एक लड़ाई की याद में लोग मनाते हैं। जिसमें दो समूह कायाकुलम और अलाप्पुझा के बीच लड़ाई हुई थी। मलयालम में कलि का अर्थ खेल होता है। ओचिरा कलि में पुरुष और लड़के पानी से भरे धान के खेत में नकली लडा़ई करते हैं। संगीतमय यह लड़ाई प्रतिभागियों के शारीरिक कौशल का प्रदर्शन है। 15, 16 जून को इसका आनन्द उठाने के लिए पर्यटक पहुंचते हैं। यहां कि अनोखी रस्म है 'बैलों की पूजा' क्योंकि शिव का वाहन नंदी बैल है।

 

जनिता चोपनेता च, यस्तु विद्यां प्रयच्छति।

अन्नदाता भयत्राता, पंचैते पितरः स्मृताः।।

फादर डे मनाने से पहले भी हमारे पुराण में इन पाँच को पिता के लिए कहा जाता था जन्मदाता, उपनयन करने वाला, विद्या देने वाला, अन्नदाता और भयत्राता। 

न तो धर्मचरणं किंचिदस्ति महत्तरम्।

यथा पितरि शुश्रूषा तस्य वा वचनक्रिया।।

पिता की सेवा अथवा उनकी आज्ञा का पालन करने से बढ़कर कोई धर्माचरण नहीं है। -वाल्मीकि रामायण

आजकल बच्चे जॉब के सिलसिले में घरों से दूर हैं। पिता ज़हन में तो रहते हैं। 

  साल में एक दिन जून के तीसरे रविवार 21 जून को फादर डे मनाने से वे सम्मान से उनके लिए अपनी भावनाएं प्रदर्शित कर, उनका दिन विशेष कर देते हैं।    सिख समुदाय में गुरु परंपरा के पाँचवें गुरु अर्जुन देव का शहीदी दिवस 18 जून को उनकी शहादत को याद करने के लिए मनाते हैं। गुरु अर्जुन देव जी सिख धर्म के पहले शहीद हैं। इन्होंने धर्म के लिए अपनी शहादत दी। इनके शहीदी दिवस पर जगह जगह ठंडे र्शबत की छबीलें लगाई जाती हैं। गुरु जी ने सिखों को अपनी कमाई का दसवां हिस्सा धार्मिक और सामाजिक कार्यों में लगाने के लिए प्रेरित किया।  

भारत द्वारा प्रस्तावित अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का रिर्काड 175 सदस्य देशों द्वारा इसका समर्थन किया गया। संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव पर 21 जून अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रुप में घोषित किया गया। इसका उद्देश्य योगाभ्यास करने के लाभ के बारे में विश्व की जागरुकता बढ़ाना है। 

योग और संगीत दोनों तनाव दूर करते हैं। हमारे मन को शांत रखते हैं। कहते हैं संगीत हर मर्ज की दवा है। मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए म्यूजिक थैरेपी बहुत कारगार है। 

संगीत की विभिन्न खूबियों की वजह से विश्व में एक दिन संगीत के नाम है। 21 जून को अर्न्तराष्ट्रीय संगीत दिवस मनाया जाता है। संगीत के बिना उत्सव कैसा! स्ंागीत हमें सकून पहुंचाता है। 

आंबुची मेला यह 22 जून सेे 26 जून तक चलने वाला मेला गोहाटी में मनाया जाता है। तीन दिन कामाख्या मंदिर बंद रहता है। तीन दिनों बाद, चौथे दिन देवी की प्रतिमा को नहलाया जाता है और भक्त मां के दर्शन के लिए आ सकते हैं। यहाँ मानसून वार्षिक मेला भी लगता है।

हर वर्ष जून पूर्णिमा के दिन जम्मू और कश्मीर के लेह में सिंधु दर्शन महोत्सव का तीन दिन 22 ये 27 जून तक आयोजन किया है। जिसमें बड़ी संख्या में विदेशी और घरेलू पर्यटक आते हैं। सिंधु दर्शन समारोह के आयोजन का मुख्य कारण सिंधु नदी को भारत के सांप्रदायिक सद्भाव और एकता के प्रतीक के रुप में समर्थन करना है। सिंधु दर्शन लेह के मुख्य शहर से 8 किमी. दूर स्थित शीला मनला में मनाया जाता है। यहां लगभग 50 वरिष्ठ लामा प्रार्थनाओं को अनुष्ठान के रुप में करते हैं। देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की एक श्रृंखला भी प्रस्तुत की जाती है। दस दिवसीय गंगा दशहरा का पर्व हर साल ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 22 जून को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन राजा भागीरथ के कठोर तपस्या के चलते मां गंगा का अवतरण पृथ्वी पर हुआ था। दशहरा का अर्थ 10 मनोविकारों के विनाश से है। क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी है।

 हिंदू धर्म में गंगा दशहरा पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता हैं। इस दिन गंगा जी में स्नान करना अपना सौभाग्य समझा जाता हैं। जहां पर जो भी नदी होती है, श्रद्धालू उसकी पूजा अर्चना कर लेते हैं क्योंकि नदियां हमारी संस्कृति की पोषक हैं। 

गोवा में साओ जोआओ 24 जून को मानसून आगमन के साथ ही में खास तौर पर मछुआरा समूह मनाते हैं। नाच गाना और तरह तरह के रंगारंग कार्यक्रमों द्वारा आपस में मनोरंजन करते हैं। ये उत्सव यहां का खास आर्कषण है।

    हिंदू धर्म में 24 एकादशियों का बहुत महत्व है। ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी 25 जून को निर्जला एकादशी कहते हैं। इसकी कथा में हिंदू धर्म की बहुत बड़ी विशेषता है कि वह सबको धारण ही नहीं करता है, सबके योग्य नियमों की लचीली व्यवस्था भी करता है। महर्षि वेदव्यास ने पाडंवों को एकादशी व्रत का संकल्प कराया तो भीम ने कहा,’’पितामह इसमें प्रति पक्ष एक दिन के उपवास की बात कही है। पर मैं तो एक समय भी भोजन के बगैर नहीं रह सकता। मेरे पेट में ’वृक’ नाम की जो अग्नि है उसे शांत रखने के लिए मुझे कई लोगों के बराबर और कई बार भोजन करना पड़ता है। क्या अपनी उस भूख के कारण मैं एकादशी जैसे पुण्य व्रत से वंचित रह जाऊंगा?’’ यह सुनते ही महर्षि ने भीम का मनोबल बढ़ाते हुए कहा,’’आप ज्येष्ठ मास की निर्जला नाम की एकादशी का व्रत करो। तुम्हें वर्ष भर की एकादशियों का फल मिलेगा।’’ इस एकादशी पर ठंडे र्शबत की जगह जगह छबीलें लगाई जातीं हैं। जिसे पीकर भीषण गर्मी में राहगीरों को बड़ी राहत मिलती है।

    पनिहाटी में प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ शुक्ल की त्रयोदशी 27 जून को दही चूड़ा का विशेष भोज होता है। इस 500 साल से चलने वाले ’दंड महोत्सव’ का विशेष विधान है। जो ’दही चूड़ा महोत्सव’ कहलाता है। पश्चिम बंगाल में कलकत्ता से 10 किमी.दूर पनिहाटी गाँव गंगा तट पर है। सोलहवीं शताब्दी में चैतन्य महाप्रभु संर्कीतन का यह प्रमुख केन्द्र बन गया। प्रभु भक्त रघुनाथ दास, प्रभु नित्यानंद के दर्शनों के लिए पानीहाटी गए। जहाँ प्रभु गंगा के तट पर बरगद के नीचे अपने शिष्यों से घिरे बैठे थे। रघुनाथ झिझक के मारे पेड़ के पीछे छिप कर उनके दर्शन कर रहे थे। प्रभु नित्यानंद ने उन्हें देख कर कहा,’’रघुनाथ दास! तुम चोर की तरह छिपे हो! और मैंने तुम्हें पकड़ लिया। यहाँ आओ मैं तुम्हें दण्ड दूंगा।’’ और दण्ड स्वरूप बड़ा उत्सव कर, भक्तों को दहीं चावल परोसने का आदेश दिया। अब चिलचिलाती गर्मी में सेठ ने बड़ी खुशी से उसमें फल मेवे मिलाकर लाजवाब प्रसाद बनाया। इस अद्भुत दण्ड की याद में यह उत्सव मनाया जाता है। संकीर्तन के कार्यक्रम के साथ इस महोत्सव का समापन होगा। बैंगलोर एस्कोन में भी इस दण्ड महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं।

  15वीं शताब्दी के प्रसिद्ध समाज सुधारक, कवि, संत का जन्म ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा 28 जून को हुआ था। जिसे कबीर प्रकाश दिवस के रुप में मनाया जाता है। कबीर अंधविश्वास और अंधश्रद्धा के प्रथम विद्रोही संत हैं। जगह जगह होने वाले कार्यक्रमों में इनके दोहे गाए जाते हैं।   

जून में जहाँ 27 से 35 डिग्री तापमान होता है, ये पर्यटन के लिए अनूकूल है। छुट्टियों के कारण यात्राएं भी की जाती हैं। 

हमारे देश में साल का छठा सबसे गर्म महीना जून है। ।भारत में मेलों, उत्सवों और महापुरुषों के कारण जून बहुत मुख्य है। इन सभी उत्सवों, व्रत और विशेष दिनों को मनाते हुए, हमें प्रयास करना चाहिए कि सामाजिक चेतना भी आए। 

नीलम भागी( लेखिका, जर्नलिस्ट, ब्लॉगर, ट्रैवलर)

यह लेख प्रेरणा शोध संस्थान से प्रकाशित प्रेरणा विचार पत्रिका के जून अंक में प्रकाशित हुआ है।






Sunday, 31 May 2026

मोरक्कन पुदीना /Moroccan Mint Migration to America Neelam Bhagi अमेरिका प्रवास नीलम भागी

 


उत्कर्षनी ने कंटेनर में कई तरह की हर्बस उगा रखी हैं।  जो गमले में देखने में भी सुंदर लगती है और किसी भी व्यंजन में बहुत कम मात्रा में इस्तेमाल होती हैं। घर में उगाने से जब जरूरत होती है तो ताज़ी मिल जाती है। ताजी पत्तियां होने से स्वाद भी बहुत बढ़ जाता है। इसे "Nana Mint" या "Spearmint की स्पेशल नस्ल" भी कहते हैं। मोरक्को की ट्रेडिशनल चाय इसी से बनती है। खुशबू नॉर्मल पुदीने से ज्यादा मीठी और ठंडी होती है। एक गमले में पुदीने से कुछ मिलते जुलते पत्ते देखे। तो उत्कर्षनी से उसकी जानकारी ली। यह मोरक्कन पुदीना कहलाता है। इसके पत्ते नॉर्मल पुदीने से लंबे, पतले और चमकदार होते हैं। डंठल सीधा ऊपर जाता है। स्वाद में कम कड़वा, ज्यादा स्वाद होता है।  मोरक्कन चाय की  खास महक इसी से आती है। इसके उगाने का तरीका भी नॉर्मल पुदीने जैसा है। मैं लिंक लगा दूंगी। आप क्लिक करके देख लेना।

https://neelambhagi.blogspot.com/2018/04/blog-post.html

सालभर उगता है, पर सर्दी-बारिश बेस्ट है। 15°C से 30°C तक आराम से चलता है। दिल्ली में अक्टूबर-मार्च बेस्ट है । लगाना भी बहुत आसान है।

नर्सरी से पौधा ले आओ या बाजार के पुदीने का तना पानी में रख दो। 7 से 14 दिन में जड़ आ जाएगी। इसे शाम को गमले में लगा दो।

50% मिट्टी + 30% गोबर खाद + 20% रेत। मिट्टी नम रहे पर पानी रुकना नहीं चाहिए। 8-10 इंच का चौड़ा गमला। गहरा कम, फैलाव ज्यादा चाहिए क्योंकि जड़ें साइड में भागती हैं। उसमें यह मिट्टी भर दो।

रोज 4-6 घंटे हल्की धूप चाहिए। दोपहर की तेज धूप से पत्ते जल जाते हैं। सेमी-शेड बेस्ट है ।

गर्मी में रोज, सर्दी में 1 दिन छोड़कर पानी देना है। मिट्टी हमेशा हल्की नम रखो।

जब पौधा 6 इंच का हो जाए, ऊपर से 2 इंच काट दो।  कटिंग जरूरी है। काटने से नीचे से झाड़ीदार हो जाएगा। नहीं काटोगे तो सिर्फ लंबा होगा।

इसे अकेले गमले में लगाओ क्योंकि इसकी जड़ फैलती हैं वरना जड़ें दूसरी सब्जी की जड़ें दबा देंगी।

महीने में 1 बार चाय की पत्ती की खाद या वर्मी कम्पोस्ट देनी है। बहुत खाद से खुशबू कम हो जाती है।

45-60 दिन में तोड़ने लायक। ऊपर से पत्ते तोड़ो, जड़ छोड़ दो। 3 महीने तक एक पौधा चलता है।

उपयोग मसलन मोरक्कन मिंट टी, लेमन मिंट ड्रिंक, तबूलेह सलाद, रायता, लस्सी, चटनी में डालो। मटन/चिकन के साथ बहुत बढ़िया लगता है। फ्रूट सलाद, आइसक्रीम, कोल्ड कॉफी के ऊपर गार्निश की जाती है।सांस की बदबू में 2-3 पत्ती चबाने से मुंह फ्रेश हो जाता है। गैस, अपच, एसिडिटी में तुरंत आराम मिलता है। खाने के बाद चबा लो। ज्यादा मात्रा नुकसान भी कर सकती है। 



Saturday, 30 May 2026

मनमोहक! Kenneth Hahn State Park in Los Angeles Migration to America Neelam Bhagi अमेरिका प्रवास नीलम भागी

 


केनेथ हान स्टेट पार्क लॉस एंजेलिस में पिकनिक और BBQ के लिए 100+ पिकनिक टेबल, बारबेक्यू के चूल्हे हैं। वीकेंड पर परिवारों की पार्टी होती है। एक ही पार्क में बच्चों के लिए तीन पार्क है, जिसमें झूले बहुत ग़ज़ब हैं।दित्या झूलों में मस्त हो गई और मैं उसकी नजरों के सामने आसपास घूमने लगी ताकि वह अकेलापन न महसूस करे। यहाँ बाज, कोयोट, खरगोश दिखते हैं। बारिश के बाद फरवरी-अप्रैल में जंगली फूल खिलते हैं और पहाड़ियां हरी हो जाती हैं। तो सिर्फ पहाड़, आसमान और सुकून में समय गुजारिये।  

रविवार को ढोल वाले ग्रुप, योगा क्लास, फैमिली गेट-टुगेदर होती रहती है।

बारिश के बाद पार्क आयरलैंड जैसा हरा-भरा दिखता है। फोटो के लिए बेस्ट टाइम फरवरी से अप्रैल है। हमें कुछ ही समय में एक नया अनुभव हुआ गर्मी थी। हम गर्मी के कपड़ों में यहां आए। दित्या झूले और रेत में खेलने लगी। मैं आसपास घूमने लगी यहां पर बच्चा खोने का तो डर ही नहीं है इसलिए मैं शौक़ से आसपास के न्यूज़ देख रही थी। LA में खूब अच्छी हवा चलती है  जो यहां भी चल रही थी। इतने में बादल आ गए। पिकनिक एरिया में शेड्स होते ही हैं इसलिए भीगने का डर नहीं था। बादल आते ही यहां पर ठंड हो गई। मैं डर गई कि दित्या बीमार हो जाएगी और मैं भी ठंड से कांपने लगे। देखा राजीव जी जैकेट पहने चले आ रहे हैं और एक मेरे लिए जैकेट थी और दित्या के लिए। आते ही वह कहने लगे कि हमारी गाड़ियों में हमेशा जैकेट रहती है क्योंकि यह LA का मौसम है और यह तो वैसे ही पार्क पहाड़ पर है। तो मैंने तो इस पार्क में गर्मी में सर्दी भी देख ली। शाम होने लगी राजीव जी बोले, "आप उस तरफ जाइए, वहां से सनसेट का व्यू बहुत सुंदर है। मैं गाड़ी लेकर आता हूं।" मैं दित्या को लेकर सेल्फी बनाने लगी। दित्या घर  लौटना नहीं चाह रही थी इसलिए इधर-उधर भाग रही थी। उधर  कुछ लड़के खेल रहे थे। उनमें से एक आकर बोला  आप इसे पकड़िए मैं फोटो लेता हूं। और वह हमारी फोटो लेकर चला गया। कुछ देर में राजीव जी भी आ गए। उत्कर्षनी का भी फोन आ गया कि वह गीता को लेकर घर पहुंच गई है। हम लोग घर की ओर चल पड़े। नीचे आते ही जैकट उतारी।

https://www.instagram.com/reel/DM_K1MoBs_W/?igsh=bnBrOWhhYWU1a3k=

https://www.instagram.com/reel/DY7qVXUSCZ4/?igsh=NnVzanh2aWZ1YzVu

https://www.instagram.com/reel/DY9J7RQxygX/?igsh=MXdqamZ1cmFnZWQ0Yg==








Thursday, 28 May 2026

स्थानीय लोगों की पसंद केनेथ हान स्टेट पार्क लॉस एंजेलिस Migration to America Neelam Bhagi अमेरिका प्रवास नीलम भागी part 2

 


खूबसूरत केनेथ हान स्टेट पार्क लॉस एंजेलिस,  401 एकड़ में फैला हुआ है इसलिए पहले सड़क पर गाड़ी से भ्रमण कर रहें हैं और राजीव जी पार्क की विस्तृत जानकारी दे रहे हैं। यहाँ पैदल चलने, हाइकिंग के 7+ मील के रास्ते हैं । आसान घुमावदार रास्तों से लेकर खड़ी चढ़ाई तक हैं। और बाल्डविन हिल्स सीनिक ओवरलुक की 282 सीढ़ियां वर्कआउट के लिए मशहूर हैं।

यहां से सनसेट का व्यू कमाल का है। पूरा LA बेसिन, LAX पर उतरते हवाई जहाज और प्रशांत महासागर दिखता है।








पिकनिक और BBQ के लिए 100+ पिकनिक टेबल, बारबेक्यू के चूल्हे हैं। वीकेंड पर परिवारों की पार्टी होती है।

डोरोथी ग्रीन पार्क के हिस्से में बतखों वाला तालाब और कमल के फूल हैं।

मछली पकड़ने के लिए छोटे तालाब में कैटफिश डाली जाती है। 16 साल से ऊपर वालों को CA फिशिंग लाइसेंस चाहिए।

यहां जापानी गार्डन  शांत बगीचा जिसमें कोइ मछली वाला तालाब, पुल और झरना है। $5 दान सुझाया जाता है।

डॉग पार्क बड़े और छोटे कुत्तों के लिए अलग जगह है । यहां कुत्तों को पट्टे के बिना छोड़ सकते हैं।

एंट्री फीस वीकेंड/छुट्टी पर प्रति गाड़ी के $6, बाकी दिन फ्री। पैदल या साइकिल वालों के लिए  हमेशा फ्री है ।

क्रमशः

 https://youtu.be/SlC9amoFsPk?si=I9HJ_H8MyJ_GimMZ

https://www.instagram.com/reel/DY112V3ASYA/?igsh=MWx0aGdyZ2kzcXc0NA==