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Tuesday, 6 January 2026

रंग में भंग! पाम कैन्यन, अमेरिका प्रवास Migration to America Neelam Bhagi नीलम भागी Part 13

 


 फॉरएवर मर्लिन प्रतिमा से, उत्तम सड़क ट्रैफिक व्यवस्था, डस्टबिन का प्रयोग करते  सभ्य लोग, आरामदायक जूते पहने, हम लोग फुटपाथ पर घूमते रहे। बड़े-बड़े ब्रांड के यहां शोरूम हैं। कहीं कोई कलाकार अपनी अपनी संगीत प्रस्तुति दे रहा है, जिसका गुणी श्रोता आनंद उठा रहे हैं। बैठने की तो जगह-जगह व्यवस्था है। गीता का तो एक ही काम है, नई तरह का अगर कैक्टस दिखा तो उसे छूना, कांटा चुभना तो लाजमी है! दित्या ने एक काम ले रखा है, सड़क क्रॉस के समय  स्टॉप का बटन दबाना, जब लाल बत्ती हो जाए तो हमें आज्ञा देना, " क्रॉस द रोड।" हम सड़क पार कर लेते हैं। फोटो में दिखाई देने वाले पीले रंग के खंभे (bollards) और उन पर लगे संकेत (signage) का उद्देश्य वाहन पार्किंग को प्रतिबंधित करना है. इन खंभों को उस विशेष क्षेत्र में वाहनों को अवैध रूप से या अस्थायी रूप से पार्क करने से रोकने के लिए स्थापित किया गया है। 


संकेत पर "NO PARKING ANY TIME" लिखा है, जिसका अर्थ है कि उस स्थान पर किसी भी समय पार्किंग की अनुमति नहीं है। एक मशहूर दुकान के आगे मेज कुर्सी पर मुझे बिठाकर उत्कर्षनी, बेटियों के साथ अंदर खजूर शेक और आइसक्रीम लेने गई। मैं बाहर बैठी, देश दुनिया के लोगों को देख रही हूँ। राजीव जी भी आसपास ही शोरूम में घूम रहे हैं। यहां सब सेल्फ सर्विसिंग होती है। उत्कर्षनी, गीता, दित्या ने हाथ में आइसक्रीम और खजूर शेक़ लाकर टेबल पर रखा उत्कर्षिनी ने बैठते ही मोबाइल चेक करने लगी और मैंने शेक का पहला घूंट भरा मुंह से 'लाजवाब' निकला और आंखें उत्कर्षनी के चेहरे पर! उसके चेहरे पर दुख और बेहद गुस्से के भाव देखकर, मैं परेशान हो गई। थोड़ी देर बाद वह बड़े दुखी मन से बोली, " मेल भेजने के 5 घंटे बाद मैं घर से निकली हूं। 12 घंटे बाद असिस्टेंट ने मेल चेक की है और मुझे मैसेज किया है कि आपकी फाइल खाली है। लैपटॉप मैं लाई नहीं, परिवार के साथ वेकेशन पर निकली हूं। घर से निकलने से पहले भी मैंने मेल चेक की कि उन विशिष्ट व्यक्तित्व ने जिनके प्रोजेक्ट पर काम कर रही हूं, ने मेरा लेखन पढ़कर क्या फीडबैक दिया है! असिस्टेंट अगर देखती, तो ही आगे का पता चलता न। अपनी नौकरी के साथ कोई इतनी बेवकूफी कैसे कर सकता है! जिसका काम ही मेरा यह सब देखना, मेल चेक करना है। मेरे लिए रिसर्च वगैरा करना आदि है।" इतने में राजीव जी भी आ गए। उन्होंने सुना, सुनते ही बोले, " मैं वापस जाकर लैपटॉप ले आता हूं।" उत्कर्षीनी ने सुनते ही जवाब दिया, " नहीं, वे बहुत भले इंसान हैं जब उन्हें पता चला कि मैं 15 दिन की वेकेशन पर जा रही हूं वो भी बहुत खुश हुए और दो दिन पहले से ही मीटिंग वगैरह बंद कर दी और कहा परिवार के साथ छुट्टियां बताओ। मैंने ही काफी समय पहले जो तारीख दी थी, उस पर काम दिया है,  दूसरे की लापरवाही से मेरा नियम भंग हुआ है।" आइस क्रीम, खजूर शेक खत्म करके राजीव बच्चों के साथ चल पड़े। रात भर की जगी, उत्कर्षनी मुझसे मन की भड़ास निकालती चलने लगी कि मां सुबह मेल सेंड करके, मैं बहुत खुश थी, हमेशा करती हूं। आगे असिस्टेंट  देखती है उसका काम ही यही है। भारत में कहां अभी से क्रिसमस शुरू हो जाता है, नहीं तो मान लेती क्रिसमस की छुट्टियां हैं। इतनी लापरवाही, ये डायरेक्टर  बहुत भले हैं। अभी ही ऐसा होना था। उनकी अच्छाइयों का वर्णन करती रही और मैं सुनती रही काफी देर में जाकर वह नॉर्मल हुई और हम लोग पार्किंग में जाकर गाड़ी पर बैठे।

क्रमशः

https://www.instagram.com/reel/DTL4T86Es6t/?igsh=MTV6OGJlYjA3MTlmaw==

https://www.instagram.com/reel/DSkbXZ8AIk2/?igsh=MXI5cmloMzlkenN2bg==

https://www.instagram.com/reel/DSgzhSggIq2/?igsh=dGs1ZW9mc2kzcnBw











Monday, 5 January 2026

"फॉरएवर मर्लिन" (Forever Marilyn) प्रतिमा पाम कैन्यन, अमेरिका प्रवास Migration to America Neelam Bhagi नीलम भागी Part 12

लॉस एंजेलिस से पाम कैन्यन तक का रास्ता सुंदर और रोमांचक है। जो कैलिफोर्निया के सुंदर नज़ारों  से गुजरता है। जिसमें पहाड़, घाटियाँ और रेगिस्तान शामिल हैं। यह शाम के समय कैलिफोर्निया की सुनहरी रोशनी में बहुत ही सुंदर लगते हैं। मेरी तो रास्ते से आंखें ही नहीं हट रहीं हैं। लाजवाब सड़के, सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन करते सभ्य लोग।

रास्ते में कई आकर्षक स्थल हैं, जैसे कि सैन गैब्रियल पर्वत और जोशुआ ट्री नेशनल पार्क। तेज हवा में चलती हुई विंडमिल ध्यान आकर्षित करती हैं।

यात्रा के दौरान कई आकर्षक शहरों में रुक सकते हैं, जैसे कि सैन बर्नार्डिनो और पाम स्प्रिंग्स।

लॉस एंजेलिस से पाम कैन्यन तक का रास्ता  व्यस्त रहता है। वैसे भी शनिवार है। गीता और दित्या भी सो कर उठ चुकी हैं और रास्ते की सुंदरता का आनंद उठा रही हैं। पाम कैन्यन की पार्किंग में गाड़ी पार्क करके लिफ्ट से ऊपर जाकर हम ग्राफिक पार्क की ओर चल दिए। पाम कैन्यन पाम स्प्रिंग्स में स्थित एक सुंदर घाटी है, जिसमें 3,000 से अधिक कैलिफोर्निया फैन पाल्म हैं। यह एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, जो अपने प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक महत्व के लिए जाना जाता है। कहते हैं कि पैदल चलने और गाड़ी से गुजरने में फर्क होता है और यह फर्क इन स्थानों पर पैदल घूमने से महसूस होता है। घूमते हुए हम "फॉरएवर मर्लिन" (Forever Marilyn) प्रतिमा के पास पास पहुंच गए। जो स्टुअर्ट जॉनसन द्वारा बनाई गई, मर्लिन मुनरो की एक बड़ी मूर्ति है, जो उनके प्रतिष्ठित पोज़ को दर्शाती है. 

8 मीटर (26 फीट) ऊंची और लगभग 15 टन वजनी यह मूर्ति पाम स्प्रिंग्स में प्रदर्शित की गई है। यह स्टील और एल्यूमीनियम की मूर्ति 1955 की फिल्म "द सेवन ईयर इच" (The Seven Year Itch) के एक प्रसिद्ध दृश्य को दर्शाती है, जिसमें मर्लिन मुनरो एक सबवे ग्रेट (subway grate) पर खड़ी हैं और हवा के झोंके से उनकी सफेद पोशाक उड़ जाती है। यहां पर्यटक सेल्फी और तस्वीरें ले रहे हैं।

क्रमशः

https://www.instagram.com/reel/DSkbXZ8AIk2/?igsh=MXI5cmloMzlkenN2bg==

https://www.instagram.com/reel/DSgzhSggIq2/?igsh=dGs1ZW9mc2kzcnBw








Sunday, 4 January 2026

यात्रा का पहला दिन और बच्चों का क्लेश! First day of the trip and the kids fight! 😃 अमेरिका प्रवास Migration to America Neelam Bhagi नीलम भागी Part 10

 


डिनर के बाद, राजीव जी के साथ दित्त्या गीता घर चले गए, मैं उत्कर्षनी के साथ घर की ओर। रास्ते में उत्कर्षनी यात्रा के बारे में बताती गई कि दिन में दर्शनीय स्थल देखते, घूमते हुए, अगले शहर जाएंगे। ज्यादा से ज्यादा शाम 5:00 से रात को रूकना है। ब्रेकफास्ट वाले होटल बुक हैं। सुबह आराम से उठाना है, नाश्ता करके, तैयार होकर निकलना है। तीन दिन बाद होटल की लॉन्ड्रिंग में कपड़े धुलेंगे। इस हिसाब से सामान लेना। सर्दी हर जगह होगी। कहीं-कहीं माइंस में टेंपरेचर होगा। मैं तो वैसे ही बहुत कम समान में सफर करती हूं क्योंकि अकेली होती हूं, मुझे समान खुद उठाना पड़ता है। फोटो में अलग-अलग पोशाक आए, अलग दिखूं, इस कारण से ढेरों कपड़े नहीं उठाती। थर्मल वगैरा का ध्यान रखा और बहुत कम कपड़ों में तैयारी कर ली क्योंकि सब की सर्दियों की जैकेट वगैरह बहुत हो जानी है। राजीव अपने ऑफिस में काम में लग गए, उन्हें तो कल ड्राइविंग भी करनी है । मैं और बच्चे सो गए। रात को जितनी बार भी मैं बाहर आई, उत्कर्षनी ड्राइंग रूम में, अधलेटी सी, लैपटॉप पर काम करती नज़र आई। मैं देख कर चुपचाप चली जाती, एक बार भी नहीं कहा, " बेटी सो जा। " क्योंकि मैं जानती हूं कि वह कमिटमेंट की बहुत पक्की है, मानेगी तो है नहीं। सुबह मैं उठी, कुछ देर बाद उत्कर्षनी ने लैपटॉप बंद करके, मुझे कहा, "अब मैं बिल्कुल फ्री हूं।" वेकेशन के मूड में आ गई और फटाफट तैयारियां करने लगी। मुझे एक बैग दिया और बोली , "आप अपना सामान इसमें रखो और तैयार हो जाओ।" मुझे करना ही क्या था, सामान कवर्ड  से उठाकर, उसी में रखा और तैयार होने चल दी। यहां बचपन से बच्चे आत्मनिर्भर है, अपने काम खुद करते हैं इसलिए बच्चों की पैकिंग माँ नहीं करती, गीता भी अपनी पैकिंग खुद कर रही थी। पर उत्कर्षनी मां है इसलिए उसकी पैकिंग पर नज़र पूरी रख रही थी कि कुछ छूट न जाए। लगेज से अलग, गीता ने अपने छोटे से बैकपैक में, उसके घुंघराले बाल और ना उलझे इसलिए साटिन कैप, आई मास्क दोनों रात को सोते समय इस्तेमाल करती है , इयरफोन, टैबलेट, ऊन क्रोशिया, रेगिस्तान पर किताब आदि रखा। साथ ही स्टफ एक किस्म का खिलौने की तरह हाथ में तकिया भी लिया।






 दित्या तो छोटी है, उसकी तैयारी तो माँ ही करेंगी। 5 घंटे में खाना पीना नहाना घर को व्यवस्थित करना और यात्रा की पूरी तैयारी करके, अपनी अपनी पानी की बोतल लेकर, हम लोग volks wagon गाड़ी में बैठ गए। उत्कर्षनी राजीव जी ने समान व्यवस्थित किया। पीछे की सीट पर सबकी जैकेट और एक छोटा ब्लांकेट के साथ गीता, उसमें चाहे सोए या बैठे। बीच की सीट पर कार सीट पर दित्या को बिठाया। वह उल्टा धूप का चश्मा पहन कर, घड़ी लगाकर बैठी टाइम से देखना नहीं आता😃 





यहां का नियम है बच्चा कार सीट पर ही बैठेगा। और साथ में दो सीटों पर मैं। पालती मार कर बैठना मुझे मना है और यात्रा में, मैं आंखें बाहर ही गढ़ाए रखती हूं इसलिए मुझे लेटना नहीं होता है। राजीव जी की आदत है, जब भी गाड़ी स्टार्ट करते हैं 'ओम नमः शिवाय' बोलते हैं, सब उनके पीछे बोलते हैं और गाड़ी चलती है। और हम चल दिए हैं। राजीव जी, उत्कर्षनी मुझे लॉस एंजेलिस के मशहूर जगहों के बारे में रास्ते में बताते जा रहे थे। पिछले अमेरिका प्रवास में, यह सब जगह है मैंने देखी थी, फोटो भी ली थीं अभी भी हैं पर किसी कारणवश मैं लिख नहीं पाई थी। इस यात्रा के बाद फोटो वीडियो हैं, उन्हें भी लिखूंगी। इतने में दित्या ने गर्दन घूमा कर पीछे देखा। गीता के हाथ में स्टफ देखते ही उसने मांग कर दी कि उसे नींद आ रही है और गोदी में स्टफ रखकर, उस पर सर रखकर सोएंगी। गीता अभी तो कुल 10 साल की है। उसने भी जीद पकड़ ली कि वह लेकर आई है अपने लिए उसे अभी नींद आ रही है। वह उस पर सर रखकर सोएगी। बच्चों के कमरे में तीन स्टिफ़ थे, किसी के दिमाग में ही नहीं आया कि इस पर बच्चे क्लेश करेंगे। गीता को समझाया कि तू जैकेट कंबल, शाल आदि रखे हैं, इन पर सर रख कर सो जा। नहीं! अब वह वह बड़ी दीदी बन गई और बहुत उचित तर्क दिया, " मैं लाई हूं इसलिए मैं ही इस पर सर रख कर सोऊंगी। यह छोटी है, इसकी हर बात मानोगे तो यह बिगड़ जाएगी।" अब बच्चे का तो एक ही अस्त्र होता है रोना! जिसे वह शस्त्र की तरह इस्तेमाल करता है, वही दित्या ने किया, रोना शुरू कर दिया। सड़क पर हैं पर, यहां ऐसे नहीं है कि गाड़ी कहीं भी मोड़ दी और किसी दुकान से खरीद लिया। हाईवे है 75 मील की स्पीड है। उत्कर्षनी ने कहा, " कोई भी स्टोर आते ही, या पेट्रोल पंप के स्टोर पर, वह दूसरा खरीद देगी। दित्या को दे दो वह छोटी है।" गीता ने उसे दे दिया और सुबकती हुई सो गई। दित्या ने उसको ऐसे पकड़ के रखा हुआ था, जैसे उसे दुनिया का सबसे बड़ा खजाना मिल गया और सो गई। स्टफ़ वहीं पड़ा, लुढ़कता रहा। मैंने उठा कर पीछे गीता की सीट पर रख दिया। वह गहरी नींद सो रही थी अब उसे भी इसकी जरूरत नहीं थी।😃 क्रमशः

https://www.instagram.com/reel/DTFGmGgAJlQ/?igsh=MWJkcnVzaXllOWY2bw==

Saturday, 3 January 2026

क़ृषि चक्र, मेलों, क्षत्रिये संस्कृतियों, स्थानीय जनजातियों से जुड़े January त्यौहारFestivals associated with the agricultural cycle, regional cultures, local tribes Neelam Bhagi, नीलम भागी

 माघ मेले  की आपको हार्दिक शुभकामनायें। यह लेख प्रेरणा शोध संस्थान से प्रकाशित प्रेरणा विचार पात्रिका के जनवरी अंक में प्रकाशित हुआ है।