फॉरएवर मर्लिन प्रतिमा से, उत्तम सड़क ट्रैफिक व्यवस्था, डस्टबिन का प्रयोग करते सभ्य लोग, आरामदायक जूते पहने, हम लोग फुटपाथ पर घूमते रहे। बड़े-बड़े ब्रांड के यहां शोरूम हैं। कहीं कोई कलाकार अपनी अपनी संगीत प्रस्तुति दे रहा है, जिसका गुणी श्रोता आनंद उठा रहे हैं। बैठने की तो जगह-जगह व्यवस्था है। गीता का तो एक ही काम है, नई तरह का अगर कैक्टस दिखा तो उसे छूना, कांटा चुभना तो लाजमी है! दित्या ने एक काम ले रखा है, सड़क क्रॉस के समय स्टॉप का बटन दबाना, जब लाल बत्ती हो जाए तो हमें आज्ञा देना, " क्रॉस द रोड।" हम सड़क पार कर लेते हैं। फोटो में दिखाई देने वाले पीले रंग के खंभे (bollards) और उन पर लगे संकेत (signage) का उद्देश्य वाहन पार्किंग को प्रतिबंधित करना है. इन खंभों को उस विशेष क्षेत्र में वाहनों को अवैध रूप से या अस्थायी रूप से पार्क करने से रोकने के लिए स्थापित किया गया है।
संकेत पर "NO PARKING ANY TIME" लिखा है, जिसका अर्थ है कि उस स्थान पर किसी भी समय पार्किंग की अनुमति नहीं है। एक मशहूर दुकान के आगे मेज कुर्सी पर मुझे बिठाकर उत्कर्षनी, बेटियों के साथ अंदर खजूर शेक और आइसक्रीम लेने गई। मैं बाहर बैठी, देश दुनिया के लोगों को देख रही हूँ। राजीव जी भी आसपास ही शोरूम में घूम रहे हैं। यहां सब सेल्फ सर्विसिंग होती है। उत्कर्षनी, गीता, दित्या ने हाथ में आइसक्रीम और खजूर शेक़ लाकर टेबल पर रखा उत्कर्षिनी ने बैठते ही मोबाइल चेक करने लगी और मैंने शेक का पहला घूंट भरा मुंह से 'लाजवाब' निकला और आंखें उत्कर्षनी के चेहरे पर! उसके चेहरे पर दुख और बेहद गुस्से के भाव देखकर, मैं परेशान हो गई। थोड़ी देर बाद वह बड़े दुखी मन से बोली, " मेल भेजने के 5 घंटे बाद मैं घर से निकली हूं। 12 घंटे बाद असिस्टेंट ने मेल चेक की है और मुझे मैसेज किया है कि आपकी फाइल खाली है। लैपटॉप मैं लाई नहीं, परिवार के साथ वेकेशन पर निकली हूं। घर से निकलने से पहले भी मैंने मेल चेक की कि उन विशिष्ट व्यक्तित्व ने जिनके प्रोजेक्ट पर काम कर रही हूं, ने मेरा लेखन पढ़कर क्या फीडबैक दिया है! असिस्टेंट अगर देखती, तो ही आगे का पता चलता न। अपनी नौकरी के साथ कोई इतनी बेवकूफी कैसे कर सकता है! जिसका काम ही मेरा यह सब देखना, मेल चेक करना है। मेरे लिए रिसर्च वगैरा करना आदि है।" इतने में राजीव जी भी आ गए। उन्होंने सुना, सुनते ही बोले, " मैं वापस जाकर लैपटॉप ले आता हूं।" उत्कर्षीनी ने सुनते ही जवाब दिया, " नहीं, वे बहुत भले इंसान हैं जब उन्हें पता चला कि मैं 15 दिन की वेकेशन पर जा रही हूं वो भी बहुत खुश हुए और दो दिन पहले से ही मीटिंग वगैरह बंद कर दी और कहा परिवार के साथ छुट्टियां बताओ। मैंने ही काफी समय पहले जो तारीख दी थी, उस पर काम दिया है, दूसरे की लापरवाही से मेरा नियम भंग हुआ है।" आइस क्रीम, खजूर शेक खत्म करके राजीव बच्चों के साथ चल पड़े। रात भर की जगी, उत्कर्षनी मुझसे मन की भड़ास निकालती चलने लगी कि मां सुबह मेल सेंड करके, मैं बहुत खुश थी, हमेशा करती हूं। आगे असिस्टेंट देखती है उसका काम ही यही है। भारत में कहां अभी से क्रिसमस शुरू हो जाता है, नहीं तो मान लेती क्रिसमस की छुट्टियां हैं। इतनी लापरवाही, ये डायरेक्टर बहुत भले हैं। अभी ही ऐसा होना था। उनकी अच्छाइयों का वर्णन करती रही और मैं सुनती रही काफी देर में जाकर वह नॉर्मल हुई और हम लोग पार्किंग में जाकर गाड़ी पर बैठे।
क्रमशः
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