चर्च से बाहर आते ही हम IAIA म्यूजियम, जो म्यूजियम ऑफ कंटेम्परेरी नेटिव आर्ट्स (Museum of Contemporary Native Arts - MoCNA) के नाम से जाना जाता है को देखने चले जाते हैं । यह संग्रालय समकालीन मूल अमेरिकी कला (contemporary Native American art) पर केंद्रित है। यह इंस्टीट्यूट ऑफ अमेरिकन इंडियन आर्ट्स (IAIA) का ही हिस्सा है जो MoCNA आर्ट गैलरी और एजुकेशनल सेंटर दोनों की तरह काम करता है। यहाँ ऐसे काम देखने को मिले जो स्वदेशी कलाकारों के आधुनिक विचारों और उनकी क्रिएटिविटी को दिखाते हैं। यह म्यूजियम उन लोगों के लिए बहुत अच्छा है जो मूल अमेरिकी कला और संस्कृति के समकालीन पहलुओं को समझना चाहते हैं। यह शहर के कुछ बेहतरीन म्यूजियम में से एक माना जाता है। यहां आभूषण प्रदर्शनियों हैं उन्हें देखते हुए लगता है कि यह बताती हैं कि कैसे वस्तुएं कहानियाँ, अर्थ और खुशी समेटे होती हैं। आभूषण केवल सजावट नहीं, बल्कि पहचान और इतिहास को दर्शाने का एक तरीका है।
आगंतुकों को स्टेंसिल (stencils) का उपयोग करके अपने स्वयं के आभूषण बनाने और यह साझा करने के लिए आमंत्रित किया जाता है कि वे उनके लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं? आभूषण प्रदर्शन देख कर गीता तो बहुत प्रेरित हो गई। वहां इयरिंग बनाने लगी। छोटी दित्या उसकी रचनात्मकता में बाधा डाल रही है इसलिए उत्कर्षनी गीता के पास रूक गई। राजीव जी दित्या को लेकर बाहर चले गए। म्यूजियम देखने के बाद मन में विचार आता है कि यह एक ऐसी जगह है जहाँ लोग आभूषणों के माध्यम से अपनी कहानियों और पहचान को व्यक्त कर सकते हैं।
क्रमशः
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