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Saturday, 25 April 2026

बैडवाटर नाम कैसे पड़ा! Death Valley National park USA Neelam Bhagi Migration to America नीलम भागी Part 91

 


    पानी देखते ही गीता जूते खोलकर पानी में चल दी और दित्या भी उसके पीछे पीछे चल दी। हमें यहां पर सूर्यास्त तक रुकना है। बैडवाटर बेसिन डेथ वैली की जान है। यही वो जगह है जिसकी वजह से डेथ वैली को "अमेरिका का सबसे निचला पॉइंट" कहते हैं। सबसे खूबसूरत समय सूर्योदय और सूर्यास्त है। हम तो सूर्यास्त देखेंगे। बैडवॉटर पर शाम को नमक, पहाड़ और आसमान के रंग हर मिनट पर बदलते हैं।  पुराने समय में यात्रियों और उनके जानवरों ने इसे पीने की कोशिश की तो स्वाद इतना खारा कि पी नहीं पाए। तो इसे "bad water" यानी "खराब पानी" कह दिया।

इसलिए 1800 के दशक में जब खोजकर्ता और वैगन से जाने वाले लोग यहां पहुंचे, तो उन्होंने अपने घोड़ों-खच्चरों को ये पानी पिलाने की कोशिश की। जानवरों ने पानी पीने से मना कर दिया और इसका नाम पड़ गया *Badwater* यानी "बुरा/खराब पानी"। बीच में नमक की परत 5 फीट तक मोटी है। किनारों पर पतली है। 10,000 साल पहले यहाँ 30 फीट गहरी और 100 मील लंबी मीठे पानी की झील थी इसका नाम था "लेक मनली"। मौसम बदलने से झील सूख गई और सिर्फ नमक बचा। बेसिन के तल पर जो पानी जमा होता है वो आसपास की चट्टानों से घुले हुए नमक और खनिजों से भरा होता है।

बैडवाटर से सामने टेलिस्कोप पीक दिखती है जो 11,049 फीट ऊंची है। यानी हम सबसे निचले पॉइंट पर खड़े होकर 11,331 फीट ऊंची चोटी देख रहे हैं। US में सबसे बड़ा वर्टिकल रिलीफ यहीं है।

इस खारे पानी में भी छोटे कीड़े और नमक से प्यार करने वाले बैक्टीरिया रहते हैं। यानी जिंदगी भी है। ये झील एंडोरहिक है - मतलब पानी इसमें आता तो है पर बाहर निकलता नहीं। गर्मी की वजह से पानी तेजी से भाप बनकर उड़ जाता है और पीछे नमक छोड़ जाता है।

 बंद जूत पहनें। नमक की पपड़ी धारदार होती है। मेरे जूते जहां, यहां के पानी से भीगे उस पर सफेद नमक की पपड़ी जम गई और पजामे का पहुंचा नीचे से थोड़ा भीगा, वह कड़क और भारी हो गया यानी इतना नमक और खनिज है।  

बैडवाटर पर खड़े होकर लगता है आप किसी दूसरे ग्रह पर हैं। चारों तरफ सफेद सन्नाटा, ऊपर नीला आसमान, और सामने दीवार जैसी पहाड़ियां। यहाँ की खामोशी कान में गूंजती है। गीता दित्या बहुत आगे तक चली गयीं। सूर्यास्त होते ही थोड़े उजाले में ही हमें निकलना है। क्योंकि डेथ वैली में कभी-कभी सिग्नल की प्रॉब्लम होती है और हमारी यात्रा गूगल और एप्पल के सहारे चल रही है। गीता दित्या को लौटने का इशारा कर रहे हैं, वो मस्त हैं, हमें इग्नोर कर रहीं हैं। अब उत्कर्षनी उन्हें लेने के लिए गई। सूर्यास्त गज़ब का है, जैसे आसमान का रंग बदलता, उसका प्रतिबिंब पानी पर भी बनता। सब कुछ सुनहरा लगता। कोई विशेष बिंदु नहीं है, सब कुछ खुला हुआ है हर ओर से यह खूबसूरत नज़ारा दिख रहा है। भीड़ देखकर थोड़ा पहले हमने चलने का विचार बनाया। हमारी गाड़ी पार्किंग में सबसे आखिर में खड़ी है। पार्किंग पहुंचने तक बिल्कुल अस्त हो जाएगा। बच्चों को बहुत अच्छा लग रहा है। दित्या बिल्कुल भी लौटने को तैयार नहीं। फिर हमने उसको लीडर बनाया। वह आगे आगे चल रही है। फॉलो द लीडर बोलती हुई हम उसके पीछे लाइन में चल रहे हैं।

जहां स्टॉप बोलती, हम रुक जाते जब चलती, उसके पीछे चलते हैं। कुछ और लोग भी हंसते हुए 4 साल की दित्या की हरकत पर हमारी लाइन में पीछे लग गए और फॉलो द लीडर करने लगे। दित्या इसी खुशी में गाड़ी तक पहुंच गई। अंधेरा होने से पहले हमने लौटने के लिए गाड़ी स्टार्ट कर ली।

क्रमशः

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