लास वेगास की तकनीकी चमक, दमक और वैभव जहां हैरान करता है, उसके बाद डेथ वैली की कच्ची, असली खूबसूरती सुकून देती है। अब उत्कर्षनी इसके नामकरण के बारे में बताने लगी।"गुडबाय, डेथ वैली"!!1849 में कैलिफोर्निया सोना ढूंढने के लिए हज़ारों लोग पश्चिम की तरफ जा रहे थे। लगभग 100 लोगों का एक ग्रुप शॉर्टकट के चक्कर में इस अनजान घाटी में घुस गया। उनके पास न नक्शा था, न पानी का इंतजाम। वे भटक गए। घाटी से बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला। दिसंबर 1849 से फरवरी 1850 तक लगभग 2 महीने ये लोग यहीं फंसे रहे। भूख और प्यास से बैल मर गए, खाने का सामान तो खत्म होना ही था। बर्फ पिघलाकर पानी पीना पड़ा। कुछ लोग रास्ता ढूंढने निकले और वे भी वापस नहीं आए। दो जवान आदमी मदद के लिए निकले और 1 महीने बाद लौटकर बाकियों को बचाया।
जब ग्रुप का आखिरी आदमी घाटी से बाहर निकल रहा था, तो उसने पीछे मुड़कर कहा: "Goodbye, Death Valley" हालांकि इस ग्रुप का केवल 1 आदमी मरा था, पर उनके 2 महीने का संघर्ष इतना खतरनाक था कि
यही नाम मशहूर हो गया। 1849 के बाद से "डेथ वैली" नाम ऑफिशियल हो गया। यहाँ के असली निवासी तिम्बिशा शोशोन लोग इसे "टम्पिसा" कहते हैं, जिसका मतलब है "चट्टान का रंग" या "लाल गेरू वाली जगह"। उनके लिए ये मौत की घाटी नहीं, घर थी। आज भी पार्क में बोर्ड लगे हैं: "Heat Kills" यानी गर्मी जान लेती है। इसलिए नवंबर-मार्च में ही जाना सेफ है। हाईवे से थोड़ा हटकर रेड रॉक सीनिक लूप दिखता है। बलुआ पत्थर की लाल दीवारें सूरज में दमकती हैं। सुबह के वक्त ये पहाड़ हल्के गुलाबी लगते हैं और शाम को आग की तरह लाल। हमारी गाड़ी लाजवाब सड़क पर दौड़ रही है और मेरे ज़हन में वह ग्रुप घूम रहा है इन रंग बदलती पहाड़ियों के बीच में इन्होंने कैसे समय बिताया होगा। जिनके कारण इस खूबसूरत जगह का नामकरण डेथ वैली हुआ !! हम सुबह जल्दी निकलें हैं ताकि 11 बजे तक डांटेस व्यू पहुंच जाएं। गर्मी में दोपहर को सड़क का डामर भी चमककर मिराज बनाने लगता है।
क्रमशः
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