मेरे दिमाग में हमेशा एक प्रश्न उठ खड़ा होता था कि देश दुनिया में बहुत बड़े-बड़े आविष्कार हुए हैं। हमारे देश में भी कुछ कम नहीं हुए। हम भारतीयों ने अपनी प्रतिभा का उपयोग तरह-तरह की मिठाइयां, नमकीन और शरबत बनाने में किया है, जिसमें हम अव्वल हैं। जितने साल में दिन होते हैं, उतने ही हमारे यहां व्यंजन है। अब देखिए न पंजाबी विकास मंच द्वारा निर्जला एकादशी और गुरु अर्जन देव जी के शहीदी दिवस पर शरबत की छबील लगाई जाती है। मेंबर खूब सेवा देते हैं। ऐसे में सविता अरोड़ा जिस समय आती हैं, उनके हाथ में एक टैप डिस्पेंसर आम के पन्ने का भरा होता है, साथ में वह ढेर सारे नींबू और अपने हाथ से बनाया शिकंजी मसाला लेकर आती हैं। मीठे शरबत को पीने और बरताने से मेंबर अघाय होते हैं। भीषण गर्मी में जिस प्रकार राहगीरों को छबील से मीठा शरबत पीकर आनंद मिलता है। उसी प्रकार सविता जी का बनाया आम का पना पीकर मेंबरों में और एनर्जी आ जाती है। यह पना जल्दी खत्म हो जाता है फिर सविता जी शिकंजी बनाना शुरू करती हैं। इस बार सामूहिक सलाह से एक नया पेय पदार्थ बन गया। पढ़ने के बाद पाठक इसका नाम रखें। संजीव पुरी ने नींबू निचोड़े, संजय खत्री ने चीनी घोली, सविता जी के निर्देशन में, उन्होंने शिकंजी मसाला मिलाया। जैसे ही सविता जी ने कहा, " शिकंजी तैयार है।" दीपक विज बोले, "इसमें शरबते रूह अफजा( कई तरह के शरबत थे जो जुबां पर चढ़ा वही बोला) मिलाओ। सविता जी दलीलें दे रहीं कि शिकंजी में कौन शरबत डालता है भला! असी ता कदि नई सुनिया। आज तक कदी नहीं पाया। लो करलो गल! कुछ महिलाएं हंस रही, कुछ कह नहीं डालो क्योंकि शिकंजी तो ऐसी ही बनती है। पंजाबी विकास मंच में सबको बोलने की छूट है। इस पर फिर डिबेट चली। मैंने कहा" कुछ नया करने में क्या हर्ज है! करके देख लो। फिर दीपक जी के कहने पर संजीव पुरी ने शरबत की बोतल शिकंजी में पलट दी तो गुरिंदर बंसल जी ने खोल दी। संजय खत्री ने मुझे स्वाद चखने को दिया। एक ही शरबत में मीठा, नमकीन, खट्टा गज़ब का बैलेंस था। इस प्रकार इस छबील में एक नए लाजवाब स्वाद का शरबत ईजाद हुआ। 😄
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