गाड़ी का दरवाजा खोलते ही बर्फीली ठंडी हवा लगने लगी। तुरंत दरवाजा बंद कर दिया फिर बड़ी हिम्मत करके बाहर निकले। गीता तो गाड़ी से बाहर ही नहीं निकली कि वह अंदर से सब देख रही है और एन्जॉय कर रही है। वहां बस एक ही गाड़ी खड़ी है, उसमें भी कोई नहीं है और दूर दूर तक कोई नजर भी नहीं आ रहा है। शायद मौसम के कारण। कटीली हवा की भी आवाज है। साफ सुथरा टॉयलेट है और बड़ा सा डस्टबिन है। 9000 फीट की ऊंचाई पर यह झील है और हाड कपाने वाली सर्दी है और हवा है, जिसकी स्पीड बहुत है। अचानक खुला मौसम एकदम बादलों से ढक गया और यह देखकर हम लोग भी गाड़ी में बैठकर, आसपास के नज़ारों का आनंद उठाने लगे। अब मौसम का मिजाज देखकर चल पड़े। कुछ देर बाद बूंदाबांदी, बर्फबारी में बदलने लगी। राजीव जी ने गाड़ी साइड में लगा दी। ठंड के कारण हम गाड़ी से बाहर नहीं निकले क्योंकि आगे लंबी यात्रा पर जाना है। डर है दित्या छोटी है, बीमार न पड़ जाए। गाड़ी रुकते ही दित्या गाड़ी से सबसे पहले बाहर निकलने को मचलती है फिर उसे वापिस car seat पर बिठाना मुश्किल हो जाता है। आसमान से बर्फ़ रुई के रेशों के रूप में गिरती जा रही है । मैंने बर्फ पड़ी हुई तो देखी है पर पड़ते हुए नहीं देखी है। आज बर्फ गिरते हुए देखना, बहुत अच्छा लग रहा है फिर मेरा मन भी डरने लगा कि कहीं इतनी बर्फ़ न पड़ जाए कि रास्ते बंद हो जायें। मैं चलो चलो कहने लगी। वापस तो यह चल पड़े पर मेरे मन के डर को समझ गए। और रास्ते में बताते जा रहे हैं कि वे कहां-कहां गए थे। और जहाँ भी स्नोफॉल हुई, यहां बर्फबारी रुकते ही तुरंत ही सड़कें साफ कर दी जातीं हैं।
क्रमशः
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