अहिल्याबाई होलकर का जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के चोंडी गांव में हुआ था। उनके पिता ने उनको पढ़ना और लिखना सिखाया।
1733 में उनका विवाह मल्हार राव होलकर के पुत्र खंडेराव होलकर से हुआ था। पति की मृत्यु 1754 में कुम्हेर की लड़ाई में हुई थी, जिसके बाद उन्होंने अपने ससुर की सलाह पर प्रशासन और सैन्य मामलों में भाग लेना शुरू किया।
1767 में अपने पुत्र माले राव की मृत्यु के बाद, अहिल्याबाई ने पेशवा से मालवा के शासन की जिम्मेदारी लेने का अनुरोध किया। उन्होंने अपने शासनकाल में न्याय, प्रशासन और कला को बढ़ावा दिया।
अहिल्याबाई ने कई मंदिरों, घाटों और धर्मशालाओं का निर्माण करवाया, जिनमें काशी विश्वनाथ मंदिर, सोमनाथ मंदिर और द्वारिकापुरी में मंदिर शामिल हैं।
उन्होंने महेश्वर को अपनी राजधानी बनाया और वहां एक कपड़ा उद्योग स्थापित किया, जो महेश्वरी साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है।
उनके शासनकाल में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए कई कदम उठाए, जैसे कि विधवाओं की संपत्ति के अधिकार की रक्षा करना।
अहिल्याबाई एक कुशल सैन्य नेता भी थीं और उन्होंने अपने शासनकाल में कई लड़ाइयों में भाग लिया।
अहिल्याबाई होलकर की विरासत आज भी जीवित है। उन्हें एक न्यायप्रिय और दूरदर्शी शासक के रूप में याद किया जाता है. उनका जीवन, शासन, उपलब्धियां और विरासत का मंचन गजब का किया गया.
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