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Saturday, 21 March 2026

फोर कॉर्नर मॉन्यूमेंट , The Four Corners Monument, Neelam Bhagi Migration to America नीलम भागी अमेरिका प्रवास

 


     दित्या सो गई है। उसे जगाना उचित नहीं समझा इसलिए राजीव जी उसके पास रुक गए कि अगर वह अपने आप जाग जाएगी तो उसे ले आएंगे। उत्कर्षनी, मैं और गीता जाकर लाइन में लग गए। खूब ठंड, हवा और तीखी धूप के साथ, एकदम शांति!! अमेरिका के दक्षिण-पश्चिमी भाग में स्थित यह एक महत्वपूर्ण स्थल है, जहां चार राज्यों - एरिजोना, कोलोरेडो, न्यू मेक्सिको, और उटाह - की सीमाएं मिलती हैं।

यह एकमात्र स्थान है, जहां चार राज्यों की सीमाएं एक साथ मिलती हैं। यह स्थल नवाज़ों नेशन के क्षेत्र में स्थित है, जो एक स्वायत्त मूल अमेरिकी जनजाति है। फोर कॉर्नर मौनुमेंट एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, जहां लोग चार राज्यों में एक साथ खड़े होने का अनुभव कर सकते हैं । मौनुमेंट के आसपास नवाज़ों और उटे जनजातियों के कलाकारों द्वारा बनाए गए हस्तशिल्प और स्मृति चिन्ह बेचे जाते हैं। यहां एक छोटा सा बाजार भी है, जहां हम स्थानीय उत्पादों और भोजन का आनंद ले सकते हैं।मौनुमेंट का निर्माण 1875 में किया गया था, और तब से यह एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल बन गया हैमौनुमेंट के आसपास की प्राकृतिक सुंदरता अद्वितीय है, जिसमें पहाड़, कैन्यन, और वनस्पतियां शामिल हैं। मौनुमेंट के आसपास के क्षेत्र में प्राचीन प्यूब्लो लोगों के अवशेष और कलाकृतियां हैं।मौनुमेंट के पास होटल, रेस्टोरेंट, और अन्य आधारभूत सुविधाएं हैं। फोर कॉर्नर मौनुमेंट का इतिहास

1860 के दशक में अमेरिका ने इस क्षेत्र को मेक्सिको से अधिग्रहित किया था। 1875 मौनुमेंट का निर्माण किया गया था। 1912 मौनुमेंट को आधिकारिक तौर पर मान्यता दी गई थी। यहां सब अपने परिवार मित्रों के साथ आए हैं। उस बिंदु पर अकेले और ग्रुप में फोटो खिंचवा रहे हैं। जब ग्रुप में खिंचवाते हैं तो लाइन में से कोई भी व्यक्ति बिना कहे फोटो खींच देता है। उनकी, उनके ही मोबाइल या कैमरे से। इतने सभ्य लोग हैं, कोई भी नहीं कहता कि जल्दी करो। चुपचाप अपने क्रम का इंतजार करते हैं। हमारे नंबर से कुछ पहले उत्कर्षनी लाइन से निकलकर दित्या के पास चली गई, यह कहकर कि देख तो लिया है फोटो ही तो नहीं खींचेगी और जाकर राजीव जी को भेज दिया। राजीव जी के आने पर  हमारा नंबर भी आ गया। हम चार राज्यों में एक साथ खड़े होने का अनुभव करके आ गए। दित्या और उत्कर्षनी का अनुभव रह गया। मैंने उत्कर्षनी से कहा, " इतनी देर से लाइन में खड़ी रही, सब ने तुमको देखा है  तुम भी चलो, मैं तुम्हारी फोटो तो खींच दूं, जहां चार राज्य मिलते हैं। यहां लोग बहुत अच्छे हैं, कोई भी तुमको रोकेगा नहीं।" उसने उत्तर दिया, " मैंने राजीव जी को अपनी जगह भेज दिया न। किसी के आगे नहीं लगूंगी और फिर से लाइन में लगने से समय बहुत लग जाएगा।" और अब हम अपनी अगली यात्रा पर चल दिए। हंसते हुए उसने मुझे मेरा लिखा आर्टिकल याद दिलाया, " लाइन में लगना, मेरी इगो के रिवर्स है।" नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

क्रमशः

https://neelambhagi.blogspot.com/2018/12/blog-post_16.html








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